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जम्मू-कश्मीर: फीस रेगुलेशन कमेटी ने श्रीनगर में निजी स्कूल के वित्तीय मामलों की मांगी जांच

Wed, 03 Nov 2021 01:35 PM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Wed, 03 Nov 2021 01:35 PM IST
सार

एफएफआरसी ने कहाए कि इसके अलावा 11 कारों को स्कूल के निपटान में रखा गया है, यह निर्दिष्ट किए बिना कि वे किसके निपटान में हैं और 11 कारों को शैक्षणिक संस्थान में रखने की क्या आवश्यकता है।

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jammu-kashmir: Fee regulation committee seeks inquiry into financial matters of private school in Srinagar
स्कूल फीस रेगुलेशन कमेटी

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में स्कूल फीस रेगुलेशन के लिए एक कमेटी ने कश्मीर के एक प्रमुख निजी स्कूल के वित्तीय मामलों की जांच की मांग की है। प्रदेश प्रशासन से मामले की जांच के लिए एक स्वतंत्र प्राधिकरण नियुक्त करने के लिए कहा है। कमेटी फॉर फिक्सेशन एंड रेगुलेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल (एफएफआरस) ने भी अथॉरिटी से दो महीने के अंदर में रिपोर्ट देने के लिए कहा है।

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एफएफआरसी के अध्यक्ष पूर्व न्यायाधीश मुजफ्फर हुसैन अत्तर ने कहा कि शुरूआती जांच में पाया गया है कि एक सुविचारित योजना के तहत श्रीनगर के अथवाजन स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल का प्रयोग भारी धन कमाने के लिए किया जा रहा है। पैनल ने सोमवार को पारित एक आदेश में कहा कि एफएफआरसी यह सुनिश्चित करने के लिए वैधानिक दायित्व के तहत है कि शिक्षा का कोई व्यवसायीकरण न हो।
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कमेटी ने कहा कि डीपी धर मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से 2003 में स्थापित स्कूल की फीस और अन्य रिकॉर्ड की जांच के दौरान पाया गया कि ट्रस्ट में विजय धर और उनकी पत्नी किरण धर के अलावा उनके दो बेटे ट्रस्टी हैं। एफएफआरसी के आदेश में कहा गया कि ट्रस्टी विजय धर, किरण धर और अन्य व्यक्तियों ने डीपीएस मेमोरियल ट्रस्ट को वित्तीय सहायता प्रदान की है और लेनदार उनके द्वारा उधार दिए गए पैैसे पर 12 प्रतिशत का ब्याज वसूल रहे हैं, जो कि बैंकों के शुल्क से अधिक है।
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समिति ने कहा कि प्राप्तियों और भुगतान विवरणों से पता चलता है कि तीन वित्तीय वर्षों के दौरान प्रत्येक को 40 से 50 करोड़ रुपये के बीच राशि प्राप्त हुई है। इन वर्षों की प्राप्तियां और भुगतान विवरण आगे दिखाते हैं कि हर साल लोगों के एक विशेष समूह द्वारा स्कूल को ऋण दिया जा रहा है और उन्हें स्कूल ट्रस्ट को ऋण के रूप में अग्रिम राशि से अधिक वापस मिल रहा है। एफएफआरसी सचिव बोस मनीषा सरीन और सदस्य स्कूल शिक्षा निदेशक कश्मीर तसद्दुक हुसैन मीर ने कहा कि हर साल भारी आय की स्थिति में ऋण आगे बढ़ाने की स्कूल की क्या आवश्यकता थी।

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जाहिर है कि 12 प्रतिशत ब्याज लगाया गया है और इसे प्राप्त किया गया है। यह ऋण सुविधा भूमि के ट्रस्टियों, मालिकों द्वारा प्रदान की जा रही है। यहां तक कि वित्तीय संस्थान भी कामर्शियल लोन पर मुश्किल से 12 फीसदी ब्याज लेते हैं। अगर स्कूल को कोई वित्तीय सहायता प्राप्त करने की आवश्यकता होती है, तो वित्तीय संस्थान अनुसूचित बैंक इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए अल्प ब्याज पर प्रदान करेंगे कि शैक्षणिक संस्थान के संचालन के लिए वित्तीय सहायता की आवश्यकता थी, जो शिक्षा प्रदान करता है, अन्यथा एक धर्मार्थ कार्य।

स्कूल को आड़े हाथ लेते हुए समिति ने कहा कि ट्रस्ट के सदस्यों द्वारा किराया वसूल किया जा रहा है, जोकि जमीन के जमींदार हैं। एफएफआरसी ने कहाए कि इसके अलावा 11 कारों को स्कूल के निपटान में रखा गया है, यह निर्दिष्ट किए बिना कि वे किसके निपटान में हैं और 11 कारों को शैक्षणिक संस्थान में रखने की क्या आवश्यकता है। इनकी मरम्मत और रखरखाव पर 3.2 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई है।

18 लाख रुपये से अधिक की राशि छात्रावास और भोजन के खर्च के रूप में भुगतान किया गया है, जब स्कूल एक गैर बोर्डिंग स्कूल है और विज्ञापनों, यात्रा और कारों के चलने पर भारी खर्च किया गया है। समिति ने कहा कि एक स्वतंत्र प्राधिकरण द्वारा स्कूूल के वित्त की जांच करवाना तत्काल जरूरी है। यह भी कहा कि इस मामले में जो तथ्य रिकॉर्ड से सामने आए हैं, वे डीपीएस स्कूल अठवाजन, श्रीनगर के वित्तीय मामलों की गहन जांच की मांग करते हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शिक्षा का कोई व्यवसायीकरण नहीं हो। समिति ने कहा कि जांच अधिकारी अपनी नियुक्ति की तारीख से दो महीने के भीतर एफएफआरसी को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।

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