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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Jammu Kashmir Elections: Delimitation should be on census after 2026, National Conference objected to the proposal of the commission

Jammu Kashmir Elections : परिसीमन 2026 के बाद की जनगणना पर हो, आयोग के प्रस्ताव पर नेशनल कांफ्रेंस जताई आपत्ति 

Sat, 01 Jan 2022 12:23 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: विमल शर्मा Updated Sat, 01 Jan 2022 12:23 AM IST
सार

जम्मू संभाग में छह और कश्मीर में एक विधानसभा सीट बढ़ाने के प्रस्ताव के मसौदे पर परिसीमन आयोग के सामाने नेकां सांसदों ने अपनी आपत्तियां दर्ज करवाईं। कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन सांविधानिक मामले के फैसले का इंतजार किया जाना चाहिए।  

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Jammu Kashmir Elections: Delimitation should be on census after 2026, National Conference objected to the proposal of the commission
फाइल फोटो - फोटो : बासित जरगर

विस्तार

परिसीमन आयोग के जम्मू संभाग में छह और कश्मीर में एक विधानसभा सीट प्रस्ताव के मसौदे पर शुक्रवार को नेकां सांसदों ने अपनी आपत्तियां दर्ज करवाईं। इसमें कई बिंदुओं को उजागर करते हुए परिसीमन प्रक्रिया को संविधान के विपरीत बताया गया है। पार्टी ने 2026 के बाद की जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया को करवाने पर जोर दिया है। कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन सांविधानिक मामले के फैसले का इंतजार किया जाना चाहिए।  

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नेकां सांसद व परिसीमन आयोग के सहयोगी साथी हसनैन मसूदी ने कहा कि हमने आपत्ति दर्ज की है कि परिसीमन प्रक्रिया ऐसे समय में कर रहे हैं, जब इस कानून को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। न्यायालय देख रहा है कि क्या यह सांविधानिक है या नहीं। ऐसे में न्यायालय का फैसला आने तक परिसीमन प्रक्रिया नहीं की जानी चाहिए।
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वहीं देशभर में 2026 तक परिसीमन प्रक्रिया स्थगित की गई है, ऐसे में 2026 के बाद में होने वाले पहली जनगणना के मुताबिक परिसीमन प्रक्रिया होनी चाहिए। मौजूदा स्थिति में देश के किसी हिस्से में परिसीमन प्रक्रिया नहीं हो रही है। ऐसे में जम्मू-कश्मीर में परिसीमन प्रक्रिया करने की क्या जरूरत है।
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असम में भी परिसीमन प्रक्रिया की घोषणा की गई थी, लेकिन उसे वापस लिया गया और वहां चुनाव करवाए गए। इसी तरह देश के अन्य हिस्सों में भी बिना परिसीमन प्रक्रिया के चुनाव करवाए गए हैं। जम्मू कश्मीर के संविधान के मुताबिक ही 2026 के बाद परिसीमन प्रक्रिया को किया जा सकता है।

इसके साथ परिसीमन प्रक्रिया में आबादी मुख्य मूलमंत्र होता है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में मौजूदा परिसीमन प्रक्रिया में ऐसे मानदंडों का पालन नहीं किया गया है। इसके अलावा अन्य कानूनी मद्दों को भी उठाया गया है। दिल्ली में आयोग के समक्ष आपत्तियां दर्ज करवाई गई हैं।


आयोग के मसौदे में 90 सदस्यीय विधानसभा में जम्मू में 43 और कश्मीर में 47 सीटों का प्रावधान है। आयोग के सहयोगी सदस्य नेकां अध्यक्ष व सांसद डॉ. फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व में गुपकार गठबंधन सहित अन्य कई राजनीतिक दल ड्राफ्ट का विरोध कर चुके हैं। नेकां से सांसद मोहम्मद अकबर लोन भी आयोग के सदस्य हैं।

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