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Ground Report : तोरा-बोरा की तरह आतंकवाद का ठौर रहा है त्राल, यहां कई परिवारों ने पीढ़ियों से नहीं किया मतदान

Sun, 15 Sep 2024 04:11 AM IST
दुष्यंत शर्मा उपमिता वाजपेयी, त्राल
उपमिता वाजपेयी, त्राल Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 15 Sep 2024 04:11 AM IST
सार

त्राल के सबसे खूबसूरत इलाके शिकारगाह में रहने वाले सलीत कहते हैं, वह वक्त था जब चुनाव प्रचार कम ही होता था और वोट भी कम ही पड़ते थे। त्राल ऐसा इलाका है जहां कई पीढ़ियां गुजर गईं लेकिन परिवार में से किसी ने वोट नहीं डाले। वजह सिर्फ एक थी, आतंकवादियों का डर।

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Jammu Kashmir Elections 2024 : Many families in Tral have not voted for generations
जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कश्मीर में त्राल आतंकवाद का ठौर माना जाता था। इसकी तुलना अफगानिस्तान के तोरा बोरा से होती थी। तोरा बोरा की पहाड़ी गुफाओं में जिस तरह अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन ने अपना ठिकाना बनाया था, उसी तरह त्राल बुरहान वानी  व जाकिर मूसा जैसे आतंकियों की शरणस्थली रहा है। यह घने जंगल और दूर-दूर बिखरे घरों वाला इलाका है। पहाड़ी रास्ते। संकरी घुमावदार सड़कें। न कोई बड़े कारोबार न विकास के पैमाने पर फिट बैठने वाली राजनीतिक सुविधाएं। त्राल के सबसे खूबसूरत इलाके शिकारगाह में रहने वाले सलीत कहते हैं, वह वक्त था जब चुनाव प्रचार कम ही होता था और वोट भी कम ही पड़ते थे। त्राल ऐसा इलाका है जहां कई पीढ़ियां गुजर गईं लेकिन परिवार में से किसी ने वोट नहीं डाले। वजह सिर्फ एक थी, आतंकवादियों का डर। उनके घर में भी किसी ने कभी वोट नहीं डाला। अब हालात सुधर चुके हैं। यहां अब सक्रिय आतंकी भी नहीं। पहले शाम 6 बजे दुकानें बंद हो जाती थीं। अब 10 बजे तक खुली रहती हैं। हां लेकिन... खौफ से बेखौफ होने की अब तक आदत नहीं हुई, इसलिए अंधेरा होते ही सड़कों को सूनसान हो जाना पड़ता है। 

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2002 में आतंकियों के खौफ से कभी त्राल नहीं आया  सिर्फ अखबार में इश्तेहार दिया और चुनाव जीत गया
घर के दरवाजे पर एक बंकर बना हुआ है। पक्का बंकर। वजह पूछी तो मालूम हुआ त्राल में इस घर पर सबसे ज्यादा बार हमले हुए हैं। यह घर नेशनल कॉन्फ्रेंस के पूर्व नेता और त्राल से निर्दलीय उम्मीदवार गुलाम नबी भट का है। उनके पिता और दो भाइयों की आतंकी हत्या कर चुके हैं। भट की सियासी कहानी शुरू हुई 2002 में, जब उनके छोटे भाई की हत्या के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के बड़े नेता ने उन्हें सऊदी अरब में डॉक्टर की नौकरी से इस्तीफा दिलाकर वापस बुला लिया। हुकुम दिया, तुम्हें चुनाव लड़ना है।  उस वक्त पुलवामा जाकर त्राल के चुनावों को पर्चा भरना होता था। भट ने पर्चा तो भरा पर  खौफ से एक बार भी त्राल नहीं आए। अखबार में छोटा सा इश्तेहार दिया, मैं त्राल से चुनाव लड़ रहा हूं, मुझे जिताओ। भट कहते हैं, चुनाव बमुश्किल 5 प्रतिशत वोट पड़े थे और मैं जीत गया। पुराने वक्त से तुलना पर कहते हैं, अब मैं एक जिप्सी में तीन-चार सीआरपीएफ वालों को साथ लेकर प्रचार के लिए किसी भी गांव-गली में निकल जाता हूं। अब हालात वैसे नहीं हैं।
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भट कहते हैं, लोकसभा चुनावों में 40 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। उम्मीद है विधानसभा में 60-70 प्रतिशत जरूर होगी।  भट कहते हैं, त्राल को विकास की जरूरत है। मुफ्ती मोहम्मद सईद जब सीएम थे तो मैंने उनसे गुजारिश की थी कि त्राल में भी कोई छोटी-मोटी इंडस्ट्री लगवा दें। मुफ्ती साहब ने जवाब दिया था, लगवा तो दूंगा पर तुम लोग उसे उड़ा दोगे तो 7-8 करोड़ का नुकसान हो जाएगा। तुम पहले त्राल से मेहमानों (आतंकियों) को तो वापस भेजो, तभी इंडस्ट्री लगेगी। भट कहते हैं, यहां के युवाओं के दिमाग में आतंकवाद का कीड़ा है। लेकिन, अगर हम उन्हें डेवलपमेंट और नौकरी देंगे तो वो 370 और आतंकवाद दोनों भूल जाएंगे।
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भाजपा ने देशभक्त बनाने की वॉशिंग मशीन लगाई है  जो सपोर्ट करे वो मौलवी, जो न करे देशद्रोही : नाइक
महबूबा मुफ्ती कुछ देर पहले ही उनके इलाके से रैली करके गई हैं। पीडीपी प्रत्याशी रफीक अहमद नाइक अपने घर के बाग में ताजे टूटे अंगूर का तसला लिए बैठे हैं। लोग उन्हें घेरे बैठे हैं, जिनमें ज्यादातर युवा हैं। रफीक कहते हैं, तब डर का माहौल था। दोनों तरफ बंदूकें थीं। अब हालात ठीक हैंे। हुर्रियत और जमात के नेताओं के चुनाव लड़ने पर कहते हैं, भाजपा ने कश्मीर में आतंकी से देशभक्त बनाने की वॉशिंग मशीन लगा रखी है। जो उनको सपोर्ट करे वो मौलवी और जो न करे वो देशद्रोही। नाइक की बातों में महात्मा गांधी का भी जिक्र आता है और अबुल कलाम आजाद का भी। वे कहते हैं, हम कश्मीरियों से ज्यादा सेकुलर मेहमाननवाज कोई और नहीं। त्राल में धर्म-जाति की राजनीति नहीं होती। यहां हिंदू, मुस्लिम, सिख सभी जिंदाबाद हैं। 370 हटने पर कहते हैं, हमें डर है कि हमारी जमीनों पर कब्जा हो जाएगा। पांच बार के एमएलए, मंत्री व सांसद रहे अली मोहम्मद नाइक उनके पिता हैं। 2006 में त्राल में हुए हमले में अली बुरी तरह जख्मी हुए। तीन साल अस्पताल में रहे। गले का ऑपरेशन करना पड़ा और फिर कभी बोल नहीं पाए। रफीक ने तय कर लिया था कि अब कोई उनके घर से राजनीति में नहीं जाएगा। वो लॉ डिपार्टमेंट में नौकरी करने लगे। इस वर्ष रिटायर हुए हैं। कहते हैं, सियासत के बिना कश्मीर के मसलों का हल नहीं। इसलिए चुनाव लड़ रहे हैं। 

  • नाइक के पिता ने 1999 में आखिरी चुनाव लड़ा था और अब बेटे का यह पहला चुनाव है। नाइक कहते हैं, आतंकवाद से सिर्फ जानें जाती हैं। अगर हम युवाओं को बार-बार डंडे मारेंगे तो वे आतंकी बनेंगे। रफीक पिछले दिनों प्रचार में गए तो 12-13 औरतें एक कतार में बैठी इंतजार कर रहीं थीं। उन सभी के बेटे जेल में थे, आैर वे उनकी रिहाई में मदद मांग रही थीं। 

इंजीनियर रशीद की पार्टी के सिख प्रत्याशी हरबख्श प्रचार के लिए जाते हैं तो मुस्लिम महिलाएं पगड़ी चूमकर देती हैं दुआएं
त्राल विधानसभा सीट पर तीन सिख चुनाव मैदान में हैं। उनमें से एक हैं हरबख्श सिंह। पीडीपी छोड़कर इंजीनियर रशीद की पार्टी में आए हैं। 2021 में त्राल से डीडीसी का चुनाव जीता तो उनके हिस्से किसी गैर मुसलमान के सबसे ज्यादा मार्जिन से जीतने का दिक्षण कश्मीर में रिकॉर्ड बना। हरबख्श कहते हैं, उन्होंने पीडीपी को 13 साल दिए। उसके नेताओं ने कहा था, उनका टिकट पक्का है। लेकिन फिर आधे घंटे पहले पार्टी ज्वाइन करने वाले को टिकट दे दिया। हरबख्श को अपनी जीत का भरोसा है। कहते हैं, यहां के लोग उनसे मोहब्बत करते हैं। आखिर उनके लिए इतने साल काम किया है। वह जब प्रचार के लिए जाते हैं तो मुस्लिम महिलाएं उनकी पगड़ी चूमकर दुआएं देती हैं। हर दिन 3-4 नोटों की मालाएं पहनाई जाती हैं। छोटे-छोटे बच्चों को भी उनका चुनाव चिह्न पता है। 



अपने मोहल्ले में हरबख््श का अकेला सिख परिवार है। लेकिन, आजतक न वहां सुरक्षाकर्मी लगे, न बंकर बना न ही कभी हमला हुआ। वह कहते हैं कि त्राल की पहचान बुरहान वानी और जाकिर मूसा से नहीं बल्कि यहां के इस्लाम और सेकुलरिज्म से होनी चाहिए। जेल फ्री कश्मीर उनका नारा है। हरबख्श कहते हैं, इंजीनियर रशीद भले नॉर्थ कश्मीर के नेता हों, पर उनके इलाके में रशीद की बहुत इज्जत है। उन्हें तिहाड़ में डालने का जनता जवाब देगी। उनके इलाके के बच्चों को पुलिस और एजेंसी सिर्फ इसलिए जेल में डाल देती है क्योंकि उसने फेसबुक पर कुछ लिखा या उसके फोन में किसी का फोटो मिला। यह बंद करना होगा। हरबख्श ने आरोप लगाया कि कश्मीर के नेताओं ने इन बच्चों के लिए कुछ नहीं किया। कहते हैं, यही वजह है कि महबूबा मुफ्ती की रैली में जितने लोग आते हैं उतनी तो इंजीनियर रशीद के जलसे में गाड़ियां होती हैं। उनका दावा तो यह भी है कि जब पिछले दिनों रशीद के बेटे की त्राल में रैली हुई तो 250 गाड़ियां उसमें शामिल हुईं। पहली बार कश्मीर में पंजाब की तरह लोग ट्रैक्टर लेकर आए। 

कश्मीर के त्राल व बारामुला में सबसे ज्यादा सिख आबादी है। हरबख्श सिंह सासन को पूरा भरोसा है कि 2 प्रतिशत सिख आबादी वाले कश्मीर में 98 प्रतिशत वाली मुस्लिम अवाम सिख नेता को विधानसभा तक जरूर पहुंचाएगी।


 

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