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प्रदेश में इस साल 122 मीट्रिक बढ़ा दुग्ध उत्पादन
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर में दूध उत्पादन कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। दूध उत्पादन से हजारों लोग स्वरोजगार कर रहे हैं। प्रदेश में 2019-20 में वार्षिक दूध उत्पादन 18 हजार मीट्रिक टन था, जो 2021-22 में 140 हजार मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। इस साल 122 मीट्रिक दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हुई है।
शनिवार को मुख्य सचिव डॉ. अरुण कुमार मेहता ने पशु, भेड़ पालन और मत्स्य पालन विभाग के कामकाज और प्रमुख योजनाओं की उपलब्धियों की समीक्षा की। उन्होंने विभाग को अगले तीन वर्षों में अपनी अर्थव्यवस्था में 1500 करोड़ रुपये जोड़ने का लक्ष्य रखने को कहा। उन्होंने विभाग को स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए रास्ते तलाशने को कहा और अगले तीन वर्षों में केंद्र शासित प्रदेश में आय और आजीविका को लगभग 1500 करोड़ रुपये तक बढ़ाने की एक बड़ी क्षमता अभी भी मौजूद है। उन्होंने कहा कि सेब, नकदी फसलों, मुर्गी पालन, चारा और मांस के गुणात्मक उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में संयुक्त पहल से अर्थव्यवस्था में 5000 करोड़ रुपये जोड़ने की क्षमता है। एफएमडी और ब्रुसेलोसिस जैसी बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए एनएडीसीपी-द्वितीय कार्यक्रम के तहत मिशन मोड में सभी जानवरों का टीकाकरण पूरा करने को कह।
693 नए भेड़ बकरी इकाइयां होगा शुरू
पिछले वर्ष शुरू की गई एकीकृत भेड़ विकास योजना को बड़ी सफलता मिली है। विभाग अब तक, 2284 भेड़ बकरी इकाइयां स्थापित की गई हैं। इस वित्तीय वर्ष के अंत तक 693 और स्थापित की जाएंगी। इससे 5954 लोगों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होगा और मटन उत्पादन में लगभग 12 लाख किलोग्राम की वृद्धि होगी।
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मत्स्य उत्पादन में 25 फीसदी बढ़ोतरी
वहीं मछली उत्पादन में भी वृद्धि हुई है। 31 मार्च 2020 तक 21,100 मीट्रिक टन उत्पादन 31 मार्च 2022 तक 25 फीसदी बढ़ने का अनुमान है, जबकि अकेले ट्राउट उत्पादन में 156 फीसदी की वृद्धि का अनुमान है।
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शनिवार को मुख्य सचिव डॉ. अरुण कुमार मेहता ने पशु, भेड़ पालन और मत्स्य पालन विभाग के कामकाज और प्रमुख योजनाओं की उपलब्धियों की समीक्षा की। उन्होंने विभाग को अगले तीन वर्षों में अपनी अर्थव्यवस्था में 1500 करोड़ रुपये जोड़ने का लक्ष्य रखने को कहा। उन्होंने विभाग को स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए रास्ते तलाशने को कहा और अगले तीन वर्षों में केंद्र शासित प्रदेश में आय और आजीविका को लगभग 1500 करोड़ रुपये तक बढ़ाने की एक बड़ी क्षमता अभी भी मौजूद है। उन्होंने कहा कि सेब, नकदी फसलों, मुर्गी पालन, चारा और मांस के गुणात्मक उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में संयुक्त पहल से अर्थव्यवस्था में 5000 करोड़ रुपये जोड़ने की क्षमता है। एफएमडी और ब्रुसेलोसिस जैसी बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए एनएडीसीपी-द्वितीय कार्यक्रम के तहत मिशन मोड में सभी जानवरों का टीकाकरण पूरा करने को कह।
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693 नए भेड़ बकरी इकाइयां होगा शुरू
पिछले वर्ष शुरू की गई एकीकृत भेड़ विकास योजना को बड़ी सफलता मिली है। विभाग अब तक, 2284 भेड़ बकरी इकाइयां स्थापित की गई हैं। इस वित्तीय वर्ष के अंत तक 693 और स्थापित की जाएंगी। इससे 5954 लोगों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होगा और मटन उत्पादन में लगभग 12 लाख किलोग्राम की वृद्धि होगी।
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मत्स्य उत्पादन में 25 फीसदी बढ़ोतरी
वहीं मछली उत्पादन में भी वृद्धि हुई है। 31 मार्च 2020 तक 21,100 मीट्रिक टन उत्पादन 31 मार्च 2022 तक 25 फीसदी बढ़ने का अनुमान है, जबकि अकेले ट्राउट उत्पादन में 156 फीसदी की वृद्धि का अनुमान है।