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छह साल में मोदी के मिशन से कश्मीर पर चढ़ा भगवा रंग, डीडीसी चुनाव में पहली बार घाटी में खुला खाता

Wed, 23 Dec 2020 08:54 AM IST
शाहरुख खान बृजेश कुमार सिंह, अमर उजाला, जम्मू
बृजेश कुमार सिंह, अमर उजाला, जम्मू Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 23 Dec 2020 08:54 AM IST
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jammu kashmir ddc election results 2020 Special story Modi mission successful
DDC Election - फोटो : अमर उजाला
पिछले छह साल की कोशिशों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिशन कश्मीर का रंग डीडीसी चुनावों में सुर्ख होने में कामयाब रहा। कश्मीर ने पहली बार भगवा चोला ओढ़ा और पार्टी तीन सीटें जीतने में सफल रही। संख्या बल में तो यह गुपकार गठबंधन के मुकाबले काफी कम है, लेकिन खास बात यह है कि आतंक का गढ़ दक्षिणी कश्मीर हो या फिर एलओसी से लगा उत्तरी कश्मीर या फिर अलगाववादियों का गढ़ रहे मध्य कश्मीर। सभी जगह भगवा ब्रिगेड ने एक-एक सीटें जीतकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। 
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जिला विकास परिषद चुनाव में आतंक का गढ़ रहे दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा की काकपोरा सीट से मिन्हा लतीफा, श्रीनगर (मध्य कश्मीर) की खानमोह से इंजीनियर एजाज और बांदीपोरा (उत्तरी कश्मीर) की तुलैल सीट से एजाज अहमद खान सीट जीतने में कामयाब रहे हैं। 
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कश्मीर घाटी में भाजपा ने 140 में से 50 पर अपने प्रत्याशी खड़ेेे किए थे। घाटी में कमल खिलाने को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ते हुए पार्टी ने युद्धस्तर पर तैयारियां कीं। केंद्रीय मंत्रियों की पूरी फौज उतार दी गई। केंद्रीय नेता शाहनवाज हुसैन ने यहां कैंप कर रखा था। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी, अनुराग ठाकुर व डॉ. जितेंद्र सिंह, राष्ट्रीय महामंत्री व जम्मू-कश्मीर प्रभारी तरुण चुघ, आशीष सूद ने पूरे संभाग में भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने के लिए सभाएं कीं। 

कुल 100 से अधिक सभाएं विभिन्न स्थानों पर की गईं। इसके साथ ही भाजपा ने डल झील में तिरंगा शिकारा रैली निकालकर फिजा बनाने की कोशिश की। गुपकार रोड पर महबूबा के घर के बाहर तिरंगा रैली निकाली।

यूं तो भाजपा ने 2014 के विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करते हुए 25 सीटें (23 फीसदी मत) हासिल की थीं, लेकिन कश्मीर में खाता नहीं खुला था। पहली बार भाजपा पीडीपी के साथ मिलकर सरकार बनाने में भी कामयाब हुई थीं। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर को देश के विकसित राज्यों की श्रेणी में लाने का प्रयास शुरू किया। 

मोदी के सपने को साकार करने के लिए केंद्र तथा राज्य दोनों ही सरकारों ने तमाम विकास योजनाओं की शुरूआत की। युवाओं को रोजगार के साधन मुहैया कराने की भी कोशिशें हुईं। विश्लेषकों का कहना है कि अब जाकर भाजपा की स्वीकार्यता कश्मीर में भी बनी है। 

भाजपा के कश्मीर प्रभारी विबोध गुप्ता का कहना है कि डीडीसी चुनाव में कश्मीर में भाजपा ने नींव रखी है। जल्द ही वहां बड़ा महल बनने वाला है। अलगाववाद तथा आतंकवाद परस्त राजनीति के अंत की शुरूआत है। यह जम्हूरियत की जीत है। साथ ही 30 साल के आतंक पर भी जीत है। 

370 हटने के बाद बने माहौल का चुनाव पर असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद घाटी में बने माहौल, विकास कार्यों, आतंकवाद तथा अलगाववाद पर प्रभावी नियंत्रण का आम कश्मीरियों पर असर पड़ना शुरू हुआ है। इस वजह से ही लोगों ने भाजपा का दामन थामा है ताकि पिछले 30 साल से हिंसा के दुष्चक्र में फंसे लोगों की आने वाली पीढ़ियों को यह सब न झेलना पड़े। नौजवानों के हाथ में बंदूक की बजाय कलम व लैपटॉप हो। हर हाथ को काम हो। 

घाटी में भाजपा का जीतना जम्मू-कश्मीर की राजनीति के लिए सकारात्मक संकेत

कश्मीर घाटी में भाजपा का तीन सीटों पर चुनाव जीतना अच्छा संकेत है। यह भाजपा के लिए ही नहीं बल्कि जम्मू-कश्मीर की राजनीति तथा स्वस्थ लोकतंत्र के लिए भी बेहतर तथा सकारात्मक संकेत है। इसका सीधा आशय है कि 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में भाजपा की ओर से विकास के मोर्चे पर किए गए प्रयासों पर भी मुहर लगी है। आतंक के साये में जी रहे कश्मीर में भाजपा ने कार्यकर्ताओं की फौज तैयार की जिससे वह सीट जीतने में सफल रही तो यह अच्छा प्रयास है। 
- प्रो. एम ताजुद्दीन, राजनीति विज्ञान विभाग-जम्मू विश्वविद्यालय
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