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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   jammu kashmir and ladakh news One month to submit report on pending cases against MLA MP

श्रीनगर: विधायकों-सांसदों के खिलाफ लंबित मामलों पर रिपोर्ट पेश करने करने के लिए एक माह की मोहलत

Fri, 22 Oct 2021 06:05 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Fri, 22 Oct 2021 06:05 PM IST
सार

पिछले महीने हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एक जनहित याचिका दर्ज करने का आदेश दिया था, जिसमें एक साल से अधिक समय पहले मौजूदा व पूर्व विधायकों (सांसदों या विधायकों) के खिलाफ लंबित मामलों की सुनवाई की प्रगति की निगरानी के निर्देश देने का आदेश दिया था।

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उच्च न्यायालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने दोनो केंद्र शासित प्रदेश के मौजूदा व पूर्व विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों की जांच का ब्यौरा पेश करने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकारों को एक माह का और समय दिया है। पूर्व में दी गई अनुमित की अवधि गुरुवार को खत्म हो गई।  

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मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल और न्यायमूर्ति विनोद चटर्जी कौल की खंडपीठ ने जम्मू-कश्मीर सरकार और केंद्र सरकार द्वारा पूर्व में तय की गई समय सीमा में रिपोर्ट न पेश कर पाने पर दोनों के वकीलों द्वारा रिपोर्ट दाखिल करने के लिए और समय देने के आग्रह किया गया। इसके बाद अदालत ने समय सीमा बढ़ा दी। 
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पिछले महीने हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एक जनहित याचिका दर्ज करने का आदेश दिया था, जिसमें एक साल से अधिक समय पहले मौजूदा व पूर्व विधायकों (सांसदों या विधायकों) के खिलाफ लंबित मामलों की सुनवाई की प्रगति की निगरानी के निर्देश देने का आदेश दिया था। इस मामले में वकील को विभिन्न अधीनस्थ अदालतों में लंबित मुकदमों की संख्या के साथ-साथ उक्त सांसदों या विधायकों के खिलाफ उच्च न्यायालय में लंबित मामलों के बारे में अदालत को सूचित करना था। जिसकी अवधि वीरवार को समाप्त हो गई।

देश की अदालतों में लंबित हैं मामले  
16 सितंबर 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को विशेष पीठों का नेतृत्व करने और मौजूदा और पूर्व विधायकों के खिलाफ लंबे समय से लंबित आपराधिक मामलों की तुरंत सुनवाई करने को कहा था। देश की विभिन्न अदालतों में भ्रष्टाचार से लेकर मनी लॉन्ड्रिंग तक के कई आपराधिक मुकदमे लंबित हैं। आदेश में कहा गया है, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत लगभग 175 मामले हैं और मौजूदा / पूर्व विधायकों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम  2002 के तहत 14 मामले लंबित हैं।

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