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लैवेंडर की खुशबू से महकेगी एक जिला एक उत्पाद योजना
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भद्रवाह। देश में बैंगनी क्रांति की शुरुआत करने वाले जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में लैवेंडर अब एक जिला एक उत्पाद योजना में भी अपने रंग और खुशबू की छटा बिखेरेगा। केंद्र सरकार की ओर से लैवेंडर को डोडा का ब्रांड उत्पाद घोषित करने के बाद लैवेंडर प्रोत्साहन बढ़ने लगा है। कई संस्थानों के साथ अब सेना ने भी लैवेंडर के जरिए किसानों की आय बढ़ाने में सक्रियता बढ़ा दी है।
एक तरफ डोडा जिले को लैवेंडर का बड़ा केंद्र बनाने की तैयारी चल रही है, वहीं जम्मू संभाग के रियासी, उधमपुर, कठुआ और राजोरी में भी लैवेंडर की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। भद्रवाह में राष्ट्रीय राइफल यूनिट ने द्रढू गांव में लैवेंडर नर्सरी को वित्त पोषित किया है। वहीं नई बस्ती गांव में लैवेंडर से साबुन, अगरबत्ती, इत्र समेत अन्य खुशबूदार उत्पाद बनाने के लिए इकाई स्थापित कर दी है। यहां पर गांव की महिलाओं व उद्यमशील युवाओं को स्वरोजगार का अवसर दिया जा रहा है। राष्ट्रीय राइफल यूनिट के कमांडिंग अफसर कर्नल रजत परमार ने बताया कि औषधीय और सुगंधित पौधों से जुड़ा उद्योग एक बड़ी संभावना है। इसके लिए सेना हर संभव मदद करेगी।
वहीं, सीएसआईआर-आईआईआईएम जम्मू के अरोमा मिशन नोडल अफसर सुमित गैरूला ने कहा कि संस्थान की ओर से लैवेंडर के 8 लाख पौधे किसानों को दिए गए हैं। सितंबर तक भद्रवाह में 50 लाख पौधे तैयार करने का लक्ष्य है। डोडा के अलावा रियासी, उधमपुर, कठुआ और राजोरी के किसानों को भी अरोमा मिशन के साथ जोड़ा जाएगा। अगले दो से तीन वर्ष में लैवेंडर उत्पादन में पांच गुना तक बढ़ोतरी होने की संभावना है। राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किसान भारत भूषण ने कहा कि 10 वर्ष पूर्व लैवेंडर की खेती शुरू की थी। वर्तमान में लैवेंडर भद्रवाह घाटी में बैंगनी क्रांति ला चुका है। नाबार्ड ने एफपीओ के लिए वित्तीय मदद दी है, जिसमें 120 किसान लैवेंडर पर काम कर रहे हैं। लैवेंडर की दो दर्जन नर्सरी बनाई जा चुकी हैं।
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एक तरफ डोडा जिले को लैवेंडर का बड़ा केंद्र बनाने की तैयारी चल रही है, वहीं जम्मू संभाग के रियासी, उधमपुर, कठुआ और राजोरी में भी लैवेंडर की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। भद्रवाह में राष्ट्रीय राइफल यूनिट ने द्रढू गांव में लैवेंडर नर्सरी को वित्त पोषित किया है। वहीं नई बस्ती गांव में लैवेंडर से साबुन, अगरबत्ती, इत्र समेत अन्य खुशबूदार उत्पाद बनाने के लिए इकाई स्थापित कर दी है। यहां पर गांव की महिलाओं व उद्यमशील युवाओं को स्वरोजगार का अवसर दिया जा रहा है। राष्ट्रीय राइफल यूनिट के कमांडिंग अफसर कर्नल रजत परमार ने बताया कि औषधीय और सुगंधित पौधों से जुड़ा उद्योग एक बड़ी संभावना है। इसके लिए सेना हर संभव मदद करेगी।
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वहीं, सीएसआईआर-आईआईआईएम जम्मू के अरोमा मिशन नोडल अफसर सुमित गैरूला ने कहा कि संस्थान की ओर से लैवेंडर के 8 लाख पौधे किसानों को दिए गए हैं। सितंबर तक भद्रवाह में 50 लाख पौधे तैयार करने का लक्ष्य है। डोडा के अलावा रियासी, उधमपुर, कठुआ और राजोरी के किसानों को भी अरोमा मिशन के साथ जोड़ा जाएगा। अगले दो से तीन वर्ष में लैवेंडर उत्पादन में पांच गुना तक बढ़ोतरी होने की संभावना है। राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किसान भारत भूषण ने कहा कि 10 वर्ष पूर्व लैवेंडर की खेती शुरू की थी। वर्तमान में लैवेंडर भद्रवाह घाटी में बैंगनी क्रांति ला चुका है। नाबार्ड ने एफपीओ के लिए वित्तीय मदद दी है, जिसमें 120 किसान लैवेंडर पर काम कर रहे हैं। लैवेंडर की दो दर्जन नर्सरी बनाई जा चुकी हैं।
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