लापरवाही: जम्मू कश्मीर में 80 प्रतिशत आबादी ने नहीं ली कोरोना की एहतियाती खुराक
कोरोना वायरस से बचने के कोविड दिशानिर्देशों का पालन करने के साथ टीका लगाना भी जरूरी है। कोविड की पिछली तीन लहरों को झेलने के बाद एहतियाती खुराक लेनी चाहिए।
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देश के विभिन्न राज्यों में कोविड का नया वेरिएंट संक्रमण फैला रहा है। मार्च 2022 में कोविड का प्रभाव कम होने के बाद लोग खासतौर पर एहतियाती कोविड की खुराक को लेकर बेपरवाह रहे। जम्मू-कश्मीर की बात करें तो 18 से अधिक आयु वर्ग की अनुमानित 93 लाख (कुल आबादी का 66 प्रतिशत का हिस्सा) आबादी में से 80 प्रतिशत (76 लाख से अधिक) ने एहतियाती खुराक ली ही नहीं है। यानी अगर कोविड संक्रमण अपना प्रभाव दिखाता है तो एहतियाती खुराक नहीं लेने वाले सबसे पहले चपेट में आएंगे।
कोविड की पिछली तीन लहरों को झेलने के बाद एहतियाती खुराक लेनी चाहिए। विशेषज्ञ डाक्टरों के अनुसार कोविड से बचाव के लिए जरूरी टीके की खुराक के साथ कोविड दिशानिर्देशों का पालन करना भी जरूरी है।
चिकित्सा केंद्रों पर मौजूदा एहतियाती टीके की खुराक उपलब्ध नहीं
जम्मू-कश्मीर के चिकित्सा केंद्रों पर मौजूदा एहतियाती टीके की खुराक उपलब्ध नहीं है। स्वास्थ्य निदेशालय की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से खुराक की मांग की गई है, लेकिन अभी तक यह उपलब्ध नहीं हो पाई है। एक साल से प्रदेश में कोविड दिशानिर्देशों का पालन नहीं हो रहा है। सार्वजनिक स्थानों के लेकर चिकित्सा केंद्रों तक यही हालत है। सामाजिक दूरी, मास्क का प्रयोग, बार-बार हाथ धोने का चलन खत्म हो चुका है। इससे कोविड बार-बार दस्तक दे रहा है।
एहतियाती खुराक नहीं लेने वाले बीमार लोगों के लिए नया वेरिएंट हो सकता है घातक
डॉक्टरों के अनुसार जो लोग पहले से बीमार हैं और उन्होंने एहतियाती कोविड की खुराक नहीं ली है तो उनके लिए कोविड का नया वेरिएंट घातक हो सकता है। हालांकि पिछले साल लगभग लोगों ने कोविड की दो टीके की खुराक ली हैं, लेकिन टीके की खुराक का वायरस से लड़ने की मानव शरीर में 6 से 8 माह तक का ही समय रहता है, यानी अब लगभग लोगों को टीके की खुराक की जरूरत है। लेकिन एहतियाती खुराक नहीं लेने वाले शारीरिक क्षमता के हिसाब से अधिक कमजोर हैं।
शारीरिक क्षमता को मजबूत करती है एहतियाती खुराक
जीएमसी के माइक्रोबायोलाजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संदीप डोगरा के अनुसार कोविड टीके की खुराक लेने के 15 से 20 दिन के बाद ही मानव शरीर में शारीरिक क्षमता बढ़ती है। इसलिए अगर एहतियाती खुराक ले ली जाती है तो समाज का एक बड़ा वर्ग वायरस से लड़ने के लिए सक्षम हो सकता है।
लोगों के लिए एहतियाती खुराक उपलब्ध करवाई गई थी, लेकिन उन्होंने इसे नजरअंदाज किया है। कोशिश की जा रही है कि यह खुराक जल्द से जल्द उपलब्ध करवाई जाए। - डॉ. सलीम उर रहमान, स्वास्थ्य निदेशक, जम्मू।