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Jammu News: सुधार योग्य दोष को ठीक करने का मौका दिए बिना आवेदन खारिज करना गलत
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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने पलटा सिंगल बेंच का फैसला, फिर सुनवाई का आदेश
केंद्र सरकार ने अपील कर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के फैसले को दी थी चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। अनियमितता और सुधार योग्य दोष को ठीक करने का अवसर दिए बिना आवेदन को खारिज करना गलत है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने एक मामले का फैसला सुनाते हुए ये टिप्पणी की है। साथ ही फिर सुनवाई का आदेश दिया है। भारत सरकार ने हाईकोर्ट में एक अपील की थी। अपील में हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती दी गई थी। जिस पर फैसला करते हुए हाईकोर्ट ने सिंगल बेंच के फैसले को पलट दिया।
जम्मू की मेसर्स देश राज नागपाल इंजीनियर्स एंड कॉन्ट्रेक्टर्स फर्म और सरकार के बीच किसी काम के लिए अनुबंध हुआ था। अनुबंध के अनुसार काम 9 जनवरी, 2003 तक पूरा किया जाना था। मेसर्स देस राज नागपाल ने इस काम को देरी से 30 मार्च, 2005 को पूरा किया।
मामले में दोनों पक्षों के बीच कुछ विवाद हुए जिनके समाधान के लिए सैन्य अभियंता सेवा (एमईएस) के मुख्य अभियंता को मध्यस्थ नियुक्त किया गया। मध्यस्थ ने साल 2012 में मामले में अपना फैसला (पंचाट) जारी किया। इससे असंतुष्ट होकर सरकार ने पठानकोट जोन के मुख्य अभियंता और गैरीसन इंजीनियर, सतवारी कैंट के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
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हाईकोर्ट के समक्ष मामले की सुनवाई के दौरान मेसर्स देश राज नागपाल की ओर से तर्क दिया गया कि गैरीसन इंजीनियर सरकार से हुए अनुबंध में पक्षकार नहीं था। इसलिए वह याचिका दायर करने के लिए योग्य नहीं है। साथ ही याचिका पर सिर्फ गैरीसन इंजीनियर ने ही हस्ताक्षर किए हैं, मुख्य अभियंता ने हस्ताक्षर नहीं किये हैं। इसपर हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया। इसी के खिलाफ सरकार की ओर से हाईकोर्ट की डबल बेंच के समक्ष अपील के गई।
मामले का फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश संजीव कुमार और न्यायाधीश पुनीत गुप्ता की बेंच ने माना कि मुख्य अभियंता द्वारा याचिकाओं पर हस्ताक्षर न करना अनियमितता है, जोकि सुधार योग्य दोष है। अपीलकर्ताओं को अनियमितता को ठीक करने का अवसर दिए बिना आवेदन को खारिज करना गलत है। इसी के साथ साथ हाईकोर्ट ने सिंगल बेंच के फैसले को पलटते हुए याचिका पर फिर से सुनवाई का आदेश दिया है।
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केंद्र सरकार ने अपील कर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के फैसले को दी थी चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। अनियमितता और सुधार योग्य दोष को ठीक करने का अवसर दिए बिना आवेदन को खारिज करना गलत है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने एक मामले का फैसला सुनाते हुए ये टिप्पणी की है। साथ ही फिर सुनवाई का आदेश दिया है। भारत सरकार ने हाईकोर्ट में एक अपील की थी। अपील में हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती दी गई थी। जिस पर फैसला करते हुए हाईकोर्ट ने सिंगल बेंच के फैसले को पलट दिया।
जम्मू की मेसर्स देश राज नागपाल इंजीनियर्स एंड कॉन्ट्रेक्टर्स फर्म और सरकार के बीच किसी काम के लिए अनुबंध हुआ था। अनुबंध के अनुसार काम 9 जनवरी, 2003 तक पूरा किया जाना था। मेसर्स देस राज नागपाल ने इस काम को देरी से 30 मार्च, 2005 को पूरा किया।
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मामले में दोनों पक्षों के बीच कुछ विवाद हुए जिनके समाधान के लिए सैन्य अभियंता सेवा (एमईएस) के मुख्य अभियंता को मध्यस्थ नियुक्त किया गया। मध्यस्थ ने साल 2012 में मामले में अपना फैसला (पंचाट) जारी किया। इससे असंतुष्ट होकर सरकार ने पठानकोट जोन के मुख्य अभियंता और गैरीसन इंजीनियर, सतवारी कैंट के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
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हाईकोर्ट के समक्ष मामले की सुनवाई के दौरान मेसर्स देश राज नागपाल की ओर से तर्क दिया गया कि गैरीसन इंजीनियर सरकार से हुए अनुबंध में पक्षकार नहीं था। इसलिए वह याचिका दायर करने के लिए योग्य नहीं है। साथ ही याचिका पर सिर्फ गैरीसन इंजीनियर ने ही हस्ताक्षर किए हैं, मुख्य अभियंता ने हस्ताक्षर नहीं किये हैं। इसपर हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया। इसी के खिलाफ सरकार की ओर से हाईकोर्ट की डबल बेंच के समक्ष अपील के गई।
मामले का फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश संजीव कुमार और न्यायाधीश पुनीत गुप्ता की बेंच ने माना कि मुख्य अभियंता द्वारा याचिकाओं पर हस्ताक्षर न करना अनियमितता है, जोकि सुधार योग्य दोष है। अपीलकर्ताओं को अनियमितता को ठीक करने का अवसर दिए बिना आवेदन को खारिज करना गलत है। इसी के साथ साथ हाईकोर्ट ने सिंगल बेंच के फैसले को पलटते हुए याचिका पर फिर से सुनवाई का आदेश दिया है।