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Jammu News: कश्मीर के बाद अब जम्मू में भी होगी उच्च जोखिम संक्रमित बीमारियों की पहचान
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जीएमसी में अप्रैल से बीएसएल-3 लैब शुरू करने की तैयारी, संक्रमण को रोकने में मिलेगी मदद
पठानकोट और हिमाचल प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों को मिलेगा लाभ, संक्रमण को रोकने में मिलेगी मदद
अमित कुमार
जम्मू। सार्स, कोविड, जीका और स्वाइन फ्लू जैसी उच्च जोखिम वाली संक्रमित बीमारियों की जल्द पहचान कश्मीर के बाद अब जम्मू संभाग भी हो पाएगी। इसी कड़ी में जीएमसी जम्मू के माइक्रोबायोलाजी विभाग में अप्रैल से बीएसएल-3 (बायो सेफ्टी लेवल) लैब को शुरू करने की तैयारी की जा रही है। अभी तक कोविड और दूसरी उच्च जोखिम संक्रमित बीमारियों के सैंपल को आईसीएमआर-एनआईवी पुणे आदि लैब में भेजा जा रहा था। लेकिन जीएमसी में बीएसएल-3 लैब में उक्त सभी टेस्ट होने से संक्रमण के प्रसार को रोकने के साथ पीड़ितों को उचित चिकित्सा देखभाल में मदद मिलेगी। भविष्य में इस लैब का पठानकोट और हिमाचल प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों को भी लाभ मिलेगा।
जीएमसी जम्मू में कोविड के दौरान जांच करते समय बड़ी संख्या में डाॅक्टर और चिकित्सा स्टाफ संक्रमित हो गया था, क्योंकि यहां बीएसएल-3 लैब की कोई सुविधा नहीं थी और सभी टेस्ट खुले वातावरण में हो रहे थे। इससे आसपास के लोग संक्रमण की चपेट में आते गए। मगर बीएसएल-3 लैब में पूरी तरह से सुरक्षित वातावरण में परीक्षण किए जाते हैं। लैब में हवा भी 100 प्रतिशत फिल्टर होकर भीतर जाती है। लैब में ही पानी आदि तरल पदार्थों का उत्पादन होता है और उसे एक उच्च प्रक्रिया के बाद बाहर भेजा जाता है। इससे उच्च जोखिम संक्रमित बीमारियों के वायरस, वैक्टीरिया आदि के खुले वातावरण में आने का कोई मौका नहीं रहता है। यह संक्रमण खुले में पहुंचकर मानव शरीर को भारी हानि पहुंचाते हैं। लैब में गंभीर परीक्षण के साथ भविष्य में उच्च जोखिम संक्रमित बीमारियों की रोकथाम के लिए शोध भी किए जाते हैं।
सात साल से लटकी थी परियोजना
जीएमसी जम्मू में सात साल से बीएसएल-3 लैब की परियोजना विभिन्न कारणों से लटकी थी। लेकिन अब इसे शुरू करने के लिए अंतिम प्रक्रिया जारी है। लैब में अत्याधुनिक उपकरणों के लिए साढ़े तीन करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। जीएमसी में ब्लड बैंक के नीचे इस लैब को स्थापित किया गया है। जम्मू संभाग में किसी भी सरकारी अस्पताल में यह लैब स्थापित नहीं है। आईआईआईएम जम्मू में यह लैब काम कर रही है। इससे पहले जीएमसी के लिए लैब को दो बार निविदाएं की गईं, लेकिन कोई निविदा नहीं आई। श्रीनगर में कोविड के दौरान बीएसएल-3 लैब स्थापित थी और उसी में गंभीर जोखिम संक्रमित वाले परीक्षण किए गए। लेकिन जम्मू संभाग के ज्यादातर सैंपल पुणे भेजे जाते थे।
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बीएसएल-3 लैब के लिए अगले हफ्ते संबंधित कंपनी के विशेषज्ञ आ रहे हैं। उम्मीद है कि लैब को अप्रैल में शुरू कर दिया जाएगा। इसमें विदेश से लाए गए उपकरण स्थापित किए गए हैं। नगरोटा जम्मू में एनआईवी की लैब भी स्थापित की जा रही है।
- डाॅ. संदीप डोगरा, एचओडी, माइक्रोबायोलाजी विभाग, जीएमसी जम्मू
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पठानकोट और हिमाचल प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों को मिलेगा लाभ, संक्रमण को रोकने में मिलेगी मदद
अमित कुमार
जम्मू। सार्स, कोविड, जीका और स्वाइन फ्लू जैसी उच्च जोखिम वाली संक्रमित बीमारियों की जल्द पहचान कश्मीर के बाद अब जम्मू संभाग भी हो पाएगी। इसी कड़ी में जीएमसी जम्मू के माइक्रोबायोलाजी विभाग में अप्रैल से बीएसएल-3 (बायो सेफ्टी लेवल) लैब को शुरू करने की तैयारी की जा रही है। अभी तक कोविड और दूसरी उच्च जोखिम संक्रमित बीमारियों के सैंपल को आईसीएमआर-एनआईवी पुणे आदि लैब में भेजा जा रहा था। लेकिन जीएमसी में बीएसएल-3 लैब में उक्त सभी टेस्ट होने से संक्रमण के प्रसार को रोकने के साथ पीड़ितों को उचित चिकित्सा देखभाल में मदद मिलेगी। भविष्य में इस लैब का पठानकोट और हिमाचल प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों को भी लाभ मिलेगा।
जीएमसी जम्मू में कोविड के दौरान जांच करते समय बड़ी संख्या में डाॅक्टर और चिकित्सा स्टाफ संक्रमित हो गया था, क्योंकि यहां बीएसएल-3 लैब की कोई सुविधा नहीं थी और सभी टेस्ट खुले वातावरण में हो रहे थे। इससे आसपास के लोग संक्रमण की चपेट में आते गए। मगर बीएसएल-3 लैब में पूरी तरह से सुरक्षित वातावरण में परीक्षण किए जाते हैं। लैब में हवा भी 100 प्रतिशत फिल्टर होकर भीतर जाती है। लैब में ही पानी आदि तरल पदार्थों का उत्पादन होता है और उसे एक उच्च प्रक्रिया के बाद बाहर भेजा जाता है। इससे उच्च जोखिम संक्रमित बीमारियों के वायरस, वैक्टीरिया आदि के खुले वातावरण में आने का कोई मौका नहीं रहता है। यह संक्रमण खुले में पहुंचकर मानव शरीर को भारी हानि पहुंचाते हैं। लैब में गंभीर परीक्षण के साथ भविष्य में उच्च जोखिम संक्रमित बीमारियों की रोकथाम के लिए शोध भी किए जाते हैं।
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सात साल से लटकी थी परियोजना
जीएमसी जम्मू में सात साल से बीएसएल-3 लैब की परियोजना विभिन्न कारणों से लटकी थी। लेकिन अब इसे शुरू करने के लिए अंतिम प्रक्रिया जारी है। लैब में अत्याधुनिक उपकरणों के लिए साढ़े तीन करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। जीएमसी में ब्लड बैंक के नीचे इस लैब को स्थापित किया गया है। जम्मू संभाग में किसी भी सरकारी अस्पताल में यह लैब स्थापित नहीं है। आईआईआईएम जम्मू में यह लैब काम कर रही है। इससे पहले जीएमसी के लिए लैब को दो बार निविदाएं की गईं, लेकिन कोई निविदा नहीं आई। श्रीनगर में कोविड के दौरान बीएसएल-3 लैब स्थापित थी और उसी में गंभीर जोखिम संक्रमित वाले परीक्षण किए गए। लेकिन जम्मू संभाग के ज्यादातर सैंपल पुणे भेजे जाते थे।
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बीएसएल-3 लैब के लिए अगले हफ्ते संबंधित कंपनी के विशेषज्ञ आ रहे हैं। उम्मीद है कि लैब को अप्रैल में शुरू कर दिया जाएगा। इसमें विदेश से लाए गए उपकरण स्थापित किए गए हैं। नगरोटा जम्मू में एनआईवी की लैब भी स्थापित की जा रही है।
- डाॅ. संदीप डोगरा, एचओडी, माइक्रोबायोलाजी विभाग, जीएमसी जम्मू