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जम्मू दर्शन : ऐतिहासिक मंदिरों से रूबरू होंगे यात्री

Tue, 26 Jun 2018 05:14 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Updated Tue, 26 Jun 2018 05:14 AM IST
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Jammu Darshan: Travelers will be from historical temples.

पर्यटन विभाग जम्मू की ओर से अमरनाथ यात्रियों के लिए जम्मू दर्शन की व्यवस्था की गई है। शहर के ऐतिहासिक मंदिरों के दर्शन कराए जाएंगे। इसके लिए आधार शिविर भगवती नगर जम्मू से एसआरटीसी के वाहनों से यात्रियों को अखनूर, सुचेतगढ़ बार्डर और जम्मू जिले के अन्य तीर्थ स्थलों में भ्रमण करने का मौका मिलेगा।

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रघुनाथ मंदिर
उत्तर भारत के सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक तीर्थ स्थल होने के कारण श्री रघुनाथ मंदिर में वैष्णो देवी व अन्य धार्मिक स्थलों पर आने वाले यात्री पहुंचते हैं। मंदिर में भगवान विष्णु जी के रूप में सवा बारह लाख शालीग्राम (छोटे शिवलिंग) स्थापित हैं। ऐसी मान्यता है कि इनकी परिक्रमा लेने से 33 करोड़ देवी देवताओं की परिक्रमा करने का पुण्य प्राप्त होता है।
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उत्तर भारत में इसी एकमात्र प्राचीन मंदिर में यह व्यवस्था है। मंदिर परिसर में नटराज जी के दरबार में स्पटीकेश्वर (पारदर्शी) के करीब ढाई फुट के शिवलिंग स्थापित हैं, जो विश्व के ऐसे सबसे बड़े शिवलिंग माने जाते हैं। इसके अलावा मंदिर परिसर में करीब छह फुट के विशाल शिवलिंग आकर्षण का केंद्र हैं।

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Jammu Darshan: Travelers will be from historical temples.

रणवीरेश्वर प्राचीन मंदिर
शहर में स्थित प्राचीन रणवीरेश्वर मंदिर की महाराजा रणवीर सिंह ने सन् 1920 में स्थापना की थी। मंदिर के मुख्य द्वार पर अष्ट धातु से स्थापित विशाल नंदीगण उत्तर भारत में प्रमुख स्थान रखते हैं। मंदिर परिसर में 11 छोटे और बड़े शिवलिंग को स्थापित किया गया है। इसमें उत्तर भारत में करीब सात फुट के सबसे लंबे शिवलिंग यहां विराजमान हैं। इसके अलावा पीरखो का प्राचीन मंदिर भी भक्तों की आस्था का केंद्र रहा है। ऐसी मान्यता है कि यहां भगवान शिव की आराधना करने से मन की मुराद पूरी होती है। यहां प्राकृतिक शिव लिंग स्थापित हैं।
 
बावे वाली माता का मंदिर 
शहर का प्रमुख बावे वाली माता का मंदिर कई इतिहास समेटे हुए है। पुराने शहर से पांच किमी. दूर पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर का डोगरा शासक महाराजा गुलाब सिंह ने सन 1822 में निर्माण करवाया था। इस मंदिर के साथ ही तीन हजार साल पहले जम्मू राज्य के संस्थापक रहे राजा जंबू लोचन के बड़े भाई बाहु लोचन ने बाहु किले का निर्माण करवाया था। जिसके बाद इसे बाग-ए-बाहु के नाम से ख्याति मिली। 19वीं सदी में डोगरा शासकों द्वारा इसका नवीनीकरण किया गया था।

यह किला एक हिंदू धार्मिक स्थान है और इसके परिसर में बावे वाली माता का मंदिर स्थापित है। किले से सूर्य पुत्री तवी नदी के उस पार पुराने शहर का विहंगम नजारा दिखता है। ऐसी मान्यता है कि भारत-पाकिस्तान में युद्ध के दौरान लड़ाकू जहाज से बम गिराने आए पाक पायलटों को बावे वाले स्थान के आसपास नीचे सिर्फ लाल वस्त्रों में एक कन्या के अलावा कुछ दिखाई नहीं दिया था, जिसके बाद वे लौट गए थे।  

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