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Jammu News: अस्थायी कर्मियों को राहत के लिए कई आदेश जारी, किसी पर भी अमल नहीं
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1994 से लेकर 2015 तक एसआरओ 64, 381 और 520 हो चुके हैं जारी, तीनों ही हो चुके निरस्त
सतीश वालिया
जम्मू। प्रदेश के 61 हजार अस्थाई कर्मचारियों के लिए राहत देने के लिए सरकारी आदेश जारी होते रहे मगर इन पर अधिकारियों ने अमल ही नहीं किया। नतीजा कर्मचारियों को कोई लाभ नहीं मिला। पहले आदेश जारी हुए आदेशों पर चंद कर्मचारियों को लाभ मिला। अब अधिकांश कर्मचारी बिना वित्तीय लाभ के ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
1994 से लेकर अब एसआरओ यानी वैधानिक विनियम और अध्यादेश 381, 64 और 520 लागू किया गया। एसआरओ 64 में प्रावधान था कि कर्मचारियों को नियमित किया जाना था। इसमें 1994 तक कर्मचारियों को लाभ मिला। इसके बाद इसे बंद कर दिया गया। इसी तरह एसआरओ 520 में कर्मचारियों को सेवा काल के हिसाब से लाभ मिलना था। इसमें दस साल सेवा वाले कर्मचारियों को दस तो 15 साल वालों को 15 हजार रुपये मिलना था।
इसी तरह बिजली विभाग में एसआरओ 381 को यूटी और कारपोरेशन बनने के बाद निरस्त कर गाइडलाइन फार रेगुलाइजेशन पीडीएल, टीडीएल 2022 लागू की गई है। इसे लागू करने का कारण रहा है कि बिजली कारपोरेशन में बिना स्टाफ के कामकाज प्रभावित हो रहा है। ऐसे में हर साल कर्मचारियों को लाभ दिया जा रहा है।
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इसमें फर्क यह रहा कि एसआरओ 381 में नियमित करने का प्रावधान था। इससे बरकरार रखा गया। इसका प्रयोग चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के खाली होने वाले पदों की जगह पर अस्थाई कर्मचारियों को रखने का प्रावधान है। अब नौबत यह है कि कर्मचारी हक के लिए प्रदर्शन और रैलियां निकाल रहे हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि इन एसआरओ से चहेतों को ही लाभ मिला है अन्य को नहीं। सरकारें एसआरओ पर एसआरओ जारी करती रही मगर काम नहीं चला।
54 विभागों में दे रहे सेवाएं
प्रदेशभर में 54 विभागों में कुल 61 हजार कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। कर्मचारियों को 1990 से रखने पर कार्रवाई आरंभ हुई थी। 2018 तक जारी रही है। मौजूदा समय में कर्मचारी 311 रुपये दिहाड़ी ले रहे हैं। बता दें कि 1990 से प्रदेश में 25 रुपये दिहाड़ी पर कर्मचारियों को रखा गया था। कर्मचारियों को आस थी कि पांच साल बाद पक्के हो जाएंगे। विभागों में काम चलाने के लिए कर्मचारियों को हर साल रखना जारी रहा 34 साल बाद महज 286 रुपये ही बढ़ पाए हैं।
क्या हैं मुख्य मांगें
- कर्मचारियों को नियमित किया जाए
- यूटी की तर्ज 500 रुपये प्रति दिन मानदेय जारी हो
- 60 से 70 माह का लंबित वेतन का भुगतान हो
क्या है एसआरओ
वैधानिक विनियम और अध्यादेश को सरकार द्वारा जारी किया जाता रहा है। अलग-अलग एसआरओ में अलग अलग तरह की कर्मचारियों के लिए व्यवस्था की जाती है और राहत दी जाती है।
किस विभाग में कितने अस्थायी कर्मचारी
मौजूदा समय में कुल कर्मचारियों की संख्या 61161 है। इसमें पीडीडी में 12500, पीएचई में 32500, सिंचाई विभाग में 1096, स्वास्थ्य विभाग में 3065, वन विभाग में 6369, पर्यटन विभाग में 639, ग्रामीण विभाग में 18, सचिवालय में 33, हाउसिंग बोर्ड में 70, एक्साइज विभाग में 01, इस्लामिक कॉलेज श्रीनगर में 67, पशुपालन विभाग में 173, एस्टेट में 413, कला विभाग में 56, उद्यान विभाग में 256 और पीडब्ल्यूडी में 3968 सहित अन्य विभागों में कर्मचारी सेवारत हैं।
कर्मचारियों के नियमितीकरण का मामला सरकार के ध्यान में है। जैसे आदेश मिलेंगे, उसी तर्ज पर काम किया जाएगा।
- विकास शर्मा, मुख्य अभियंता, जलशक्ति विभाग
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सतीश वालिया
जम्मू। प्रदेश के 61 हजार अस्थाई कर्मचारियों के लिए राहत देने के लिए सरकारी आदेश जारी होते रहे मगर इन पर अधिकारियों ने अमल ही नहीं किया। नतीजा कर्मचारियों को कोई लाभ नहीं मिला। पहले आदेश जारी हुए आदेशों पर चंद कर्मचारियों को लाभ मिला। अब अधिकांश कर्मचारी बिना वित्तीय लाभ के ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
1994 से लेकर अब एसआरओ यानी वैधानिक विनियम और अध्यादेश 381, 64 और 520 लागू किया गया। एसआरओ 64 में प्रावधान था कि कर्मचारियों को नियमित किया जाना था। इसमें 1994 तक कर्मचारियों को लाभ मिला। इसके बाद इसे बंद कर दिया गया। इसी तरह एसआरओ 520 में कर्मचारियों को सेवा काल के हिसाब से लाभ मिलना था। इसमें दस साल सेवा वाले कर्मचारियों को दस तो 15 साल वालों को 15 हजार रुपये मिलना था।
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इसी तरह बिजली विभाग में एसआरओ 381 को यूटी और कारपोरेशन बनने के बाद निरस्त कर गाइडलाइन फार रेगुलाइजेशन पीडीएल, टीडीएल 2022 लागू की गई है। इसे लागू करने का कारण रहा है कि बिजली कारपोरेशन में बिना स्टाफ के कामकाज प्रभावित हो रहा है। ऐसे में हर साल कर्मचारियों को लाभ दिया जा रहा है।
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इसमें फर्क यह रहा कि एसआरओ 381 में नियमित करने का प्रावधान था। इससे बरकरार रखा गया। इसका प्रयोग चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के खाली होने वाले पदों की जगह पर अस्थाई कर्मचारियों को रखने का प्रावधान है। अब नौबत यह है कि कर्मचारी हक के लिए प्रदर्शन और रैलियां निकाल रहे हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि इन एसआरओ से चहेतों को ही लाभ मिला है अन्य को नहीं। सरकारें एसआरओ पर एसआरओ जारी करती रही मगर काम नहीं चला।
54 विभागों में दे रहे सेवाएं
प्रदेशभर में 54 विभागों में कुल 61 हजार कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। कर्मचारियों को 1990 से रखने पर कार्रवाई आरंभ हुई थी। 2018 तक जारी रही है। मौजूदा समय में कर्मचारी 311 रुपये दिहाड़ी ले रहे हैं। बता दें कि 1990 से प्रदेश में 25 रुपये दिहाड़ी पर कर्मचारियों को रखा गया था। कर्मचारियों को आस थी कि पांच साल बाद पक्के हो जाएंगे। विभागों में काम चलाने के लिए कर्मचारियों को हर साल रखना जारी रहा 34 साल बाद महज 286 रुपये ही बढ़ पाए हैं।
क्या हैं मुख्य मांगें
- कर्मचारियों को नियमित किया जाए
- यूटी की तर्ज 500 रुपये प्रति दिन मानदेय जारी हो
- 60 से 70 माह का लंबित वेतन का भुगतान हो
क्या है एसआरओ
वैधानिक विनियम और अध्यादेश को सरकार द्वारा जारी किया जाता रहा है। अलग-अलग एसआरओ में अलग अलग तरह की कर्मचारियों के लिए व्यवस्था की जाती है और राहत दी जाती है।
किस विभाग में कितने अस्थायी कर्मचारी
मौजूदा समय में कुल कर्मचारियों की संख्या 61161 है। इसमें पीडीडी में 12500, पीएचई में 32500, सिंचाई विभाग में 1096, स्वास्थ्य विभाग में 3065, वन विभाग में 6369, पर्यटन विभाग में 639, ग्रामीण विभाग में 18, सचिवालय में 33, हाउसिंग बोर्ड में 70, एक्साइज विभाग में 01, इस्लामिक कॉलेज श्रीनगर में 67, पशुपालन विभाग में 173, एस्टेट में 413, कला विभाग में 56, उद्यान विभाग में 256 और पीडब्ल्यूडी में 3968 सहित अन्य विभागों में कर्मचारी सेवारत हैं।
कर्मचारियों के नियमितीकरण का मामला सरकार के ध्यान में है। जैसे आदेश मिलेंगे, उसी तर्ज पर काम किया जाएगा।
- विकास शर्मा, मुख्य अभियंता, जलशक्ति विभाग