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Jammu News: 19 करोड़ के घोटाले में 7 मृत अधिकारियों समेत 13 के खिलाफ आरोपपत्र दायर
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2002 से 2006 के बीच बीपीएल परिवारों के 4,39,503.21 क्विंटल राशन के घोटाले का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। क्राइम ब्रांच ने राशन घोटाले मामले में तत्कालीन सीएपीडी अधिकारियों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दायर कर दिया है। इनमें 13 पूर्व अधिकारी (9 सहायक निदेशक, दो मुख्य लेखा अधिकारी व दो टीएसओ) शामिल हैं।
इन पर वर्ष 2002, 2003, 2005 और 2006 के दौरान 4,39,503.21 क्विंटल बीपीएल राशन का घोटाला करने का आरोप है। 19.20 करोड़ रुपये के इस घोटाले में मामला दर्ज किया गया था। कैग रिपोर्ट के अनुसरण में विभाग द्वारा क्राइम ब्रांच में एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें ऑडिट का जिक्र किया गया था।
पुलिस उपाधीक्षक स्तर के चार वरिष्ठ जांच अधिकारियों ने बड़े राशन घोटाले के इस मामले में गहन जांच की। आरोपियों के खिलाफ अपराध साबित हुए। अदालत में अंतिम रिपोर्ट दायर की गई। इन 13 आरोपियों में से सात की मृत्यु हो चुकी है। एक को जमानत मिल गई, एक ने अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया व शेष चार को गिरफ्तार कर लिया गया है।
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आरोप पत्र प्रस्तुत करने के समय अदालत में पेश किया गया। वर्ष 2004 के दौरान भी इसी तरह का राशन गबन किया गया था, जिसकी जांच एसीबी द्वारा की गई थी और चालान भी पेश किया गया था। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बेनाम तोश ने बताया कि 2009 में 409, 420 120-बी आरपीसी के तहत मामला दर्ज किया गया था। जांच में इन अधिकारियों की संलिप्तता पाई गई। लिहाजा अब चालान पेश किया गया है।
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जारी किया जरूरत से अधिक राशन
घोटाले में शामिल अधिकारियों ने जरूरत से अधिक राशन जारी किया। यदि एक परिवार को पांच किलो राशन मिलना था, तो उसके नाम का 10 किलो राशन निकाल लिया। इस तरह से जरूरत से अधिक राशन के नाम पर पैसे निकाल लिए। कैग की रिपोर्ट में पता चला कि इस तरह से ये लोग 19 करोड़ रुपये राशन के नाम पर विभाग से निकाल चुके हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। क्राइम ब्रांच ने राशन घोटाले मामले में तत्कालीन सीएपीडी अधिकारियों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दायर कर दिया है। इनमें 13 पूर्व अधिकारी (9 सहायक निदेशक, दो मुख्य लेखा अधिकारी व दो टीएसओ) शामिल हैं।
इन पर वर्ष 2002, 2003, 2005 और 2006 के दौरान 4,39,503.21 क्विंटल बीपीएल राशन का घोटाला करने का आरोप है। 19.20 करोड़ रुपये के इस घोटाले में मामला दर्ज किया गया था। कैग रिपोर्ट के अनुसरण में विभाग द्वारा क्राइम ब्रांच में एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें ऑडिट का जिक्र किया गया था।
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पुलिस उपाधीक्षक स्तर के चार वरिष्ठ जांच अधिकारियों ने बड़े राशन घोटाले के इस मामले में गहन जांच की। आरोपियों के खिलाफ अपराध साबित हुए। अदालत में अंतिम रिपोर्ट दायर की गई। इन 13 आरोपियों में से सात की मृत्यु हो चुकी है। एक को जमानत मिल गई, एक ने अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया व शेष चार को गिरफ्तार कर लिया गया है।
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आरोप पत्र प्रस्तुत करने के समय अदालत में पेश किया गया। वर्ष 2004 के दौरान भी इसी तरह का राशन गबन किया गया था, जिसकी जांच एसीबी द्वारा की गई थी और चालान भी पेश किया गया था। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बेनाम तोश ने बताया कि 2009 में 409, 420 120-बी आरपीसी के तहत मामला दर्ज किया गया था। जांच में इन अधिकारियों की संलिप्तता पाई गई। लिहाजा अब चालान पेश किया गया है।
जारी किया जरूरत से अधिक राशन
घोटाले में शामिल अधिकारियों ने जरूरत से अधिक राशन जारी किया। यदि एक परिवार को पांच किलो राशन मिलना था, तो उसके नाम का 10 किलो राशन निकाल लिया। इस तरह से जरूरत से अधिक राशन के नाम पर पैसे निकाल लिए। कैग की रिपोर्ट में पता चला कि इस तरह से ये लोग 19 करोड़ रुपये राशन के नाम पर विभाग से निकाल चुके हैं।