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लीज नीति में होगा बदलाव, रोशनी अधिनियम की तर्ज पर योजना लाएगी सरकार : उमर
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विधानसभा में अनुदान मांगों के जवाब के दौरान मुख्यमंत्री ने दी जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में रोशनी अधिनियम के तहत भूमि योजना की तर्ज पर सरकार नई भूमि योजना लाने की तैयारी में है। इसमें लीज नीति में बदलाव करके नई योजना को रोशनी भूमि योजना का स्वरूप दिया जाएगा। यह जानकारी मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने वीरवार को विधानसभा में अनुदान मांगों पर अपने जवाब में दी।
उन्होंने कहा कि प्रदेशवासियों की बेहतरी के लिए डाॅ. फारूक अब्दुल्ला के कार्यकाल में रोशनी भूमि योजना को लाई गई थी, जिसका उद्देश्य सरकारी जमीन पर लीज लेकर बैठे लोगों की लीज को फ्री होल्ड में बदलना था। इस योजना के लिए एक समय सीमा निर्धारित की गई थी। लेकिन, आतंकवाद के दौरान घपले हुए।
पीडीपी-कांग्रेस की गठबंधन सरकार में मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने रोशनी भूमि योजना में बदलाव लाकर समय सीमा को हटा दिया, जिससे हम न्यायालय में इस योजना को बचा नहीं पाए। जिन लोगों रोशनी योजना के तहत लीजों पर फ्री होल्ड करवाया था उनके पास न तो लीज है और न फ्री होल्ड। हमें अपनी लीज नीति को दुरुस्त करना होगा और रोशनी को किसी न किसी सूरत में दोबारा लाना होगा। अनुदान मांगों पर बहस में विभिन्न सदस्यों ने रोशनी भूमि योजना का मुद्दा उठाया था।
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रोशनी योजना में बड़े पैमाने पर हुआ था भूमि घोटाला
वर्ष 2001 में जम्मू-कश्मीर राज्य भूमि (कब्जाधारियों को स्वामित्व का हस्तांतरण) अधिनियम, 2001 के तहत तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला द्वारा रोशनी भूमि योजना (रोशनी अधिनियम) को लागू किया था। 2018 में तत्कालीन राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने रोशनी अधिनियम को निरस्त कर दिया था। यह मामला न्यायालय में चला गया और 2020 में मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई। जम्मू-कश्मीर सरकार ने रोशनी योजना के तहत हस्तांतरित भूमि को वापस लेने का फैसला किया था। योजना का उद्देश्य राज्य की भूमि पर अनधिकृत रूप से कब्जा करने वालों को स्वामित्व अधिकार प्रदान करना था, ताकि बिजली परियोजनाओं के लिए धन जुटाया जा सके। बताया जाता है कि 25 हजार करोड़ रुपये का रोशनी अधिनियम घोटाला हुआ। इसमें हाई प्रोफाइल लाभार्थियों की जारी सूची में पूर्व मंत्री भी शामिल हैं। नवंबर 2006 में सरकार के अनुमान के मुताबिक 20 लाख कनाल से भी ज्यादा भूमि पर लोगों का अवैध कब्जा था। बहुचर्चित रोशनी भूमि घोटाले में श्रीनगर की सीबीआई कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ने कश्मीर के तत्कालीन मंडलायुक्त समेत छह लोगों के खिलाफ आरोप तय किए थे।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में रोशनी अधिनियम के तहत भूमि योजना की तर्ज पर सरकार नई भूमि योजना लाने की तैयारी में है। इसमें लीज नीति में बदलाव करके नई योजना को रोशनी भूमि योजना का स्वरूप दिया जाएगा। यह जानकारी मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने वीरवार को विधानसभा में अनुदान मांगों पर अपने जवाब में दी।
उन्होंने कहा कि प्रदेशवासियों की बेहतरी के लिए डाॅ. फारूक अब्दुल्ला के कार्यकाल में रोशनी भूमि योजना को लाई गई थी, जिसका उद्देश्य सरकारी जमीन पर लीज लेकर बैठे लोगों की लीज को फ्री होल्ड में बदलना था। इस योजना के लिए एक समय सीमा निर्धारित की गई थी। लेकिन, आतंकवाद के दौरान घपले हुए।
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पीडीपी-कांग्रेस की गठबंधन सरकार में मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने रोशनी भूमि योजना में बदलाव लाकर समय सीमा को हटा दिया, जिससे हम न्यायालय में इस योजना को बचा नहीं पाए। जिन लोगों रोशनी योजना के तहत लीजों पर फ्री होल्ड करवाया था उनके पास न तो लीज है और न फ्री होल्ड। हमें अपनी लीज नीति को दुरुस्त करना होगा और रोशनी को किसी न किसी सूरत में दोबारा लाना होगा। अनुदान मांगों पर बहस में विभिन्न सदस्यों ने रोशनी भूमि योजना का मुद्दा उठाया था।
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रोशनी योजना में बड़े पैमाने पर हुआ था भूमि घोटाला
वर्ष 2001 में जम्मू-कश्मीर राज्य भूमि (कब्जाधारियों को स्वामित्व का हस्तांतरण) अधिनियम, 2001 के तहत तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला द्वारा रोशनी भूमि योजना (रोशनी अधिनियम) को लागू किया था। 2018 में तत्कालीन राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने रोशनी अधिनियम को निरस्त कर दिया था। यह मामला न्यायालय में चला गया और 2020 में मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई। जम्मू-कश्मीर सरकार ने रोशनी योजना के तहत हस्तांतरित भूमि को वापस लेने का फैसला किया था। योजना का उद्देश्य राज्य की भूमि पर अनधिकृत रूप से कब्जा करने वालों को स्वामित्व अधिकार प्रदान करना था, ताकि बिजली परियोजनाओं के लिए धन जुटाया जा सके। बताया जाता है कि 25 हजार करोड़ रुपये का रोशनी अधिनियम घोटाला हुआ। इसमें हाई प्रोफाइल लाभार्थियों की जारी सूची में पूर्व मंत्री भी शामिल हैं। नवंबर 2006 में सरकार के अनुमान के मुताबिक 20 लाख कनाल से भी ज्यादा भूमि पर लोगों का अवैध कब्जा था। बहुचर्चित रोशनी भूमि घोटाले में श्रीनगर की सीबीआई कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ने कश्मीर के तत्कालीन मंडलायुक्त समेत छह लोगों के खिलाफ आरोप तय किए थे।