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जम्मू-कश्मीर: जम्मू में पर्यटन को लगेंगे पंख, तवी नदी कृत्रिम झील एक साल में बनकर होगी तैयार
Tue, 20 Jul 2021 06:00 PM IST
करिश्मा चिब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Tue, 20 Jul 2021 06:00 PM IST
सार
साबरमती की तर्ज पर तवी रिवर फ्रंट परियोजना को साकार करने के प्रयास तेज। उप राज्यपाल बोले-इस परियोजना से जम्मू में बदल जाएगा पर्यटन का नक्शा। प्रदेश के सभी अस्पतालों, आंगनबाड़ी केंद्रों तथा स्कूलों में 15 अगस्त तक जलापूर्ति।
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तवी नदी
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए साबरमती की तर्ज पर तवी रिवर फ्रंट परियोजना को साकार करने के लिए प्रयास तेज कर दिए गए हैं। अगले एक साल में तवी नदी कृत्रिम झील बनकर तैयार हो जाएगी। इसके लिए बैराज का निर्माण पूरा हो जाएगा, जो इस परियोजना का एक अहम हिस्सा है। उप राज्यपाल ने इसके लिए समयसीमा तय करते हुए हिदायत दी कि तवी रिवर फ्रंट से जुड़ी अन्य जल परियोजनाओं को भी त्वरित गति से पूरा किया जाए। यह परियोजना जम्मू में पर्यटन का नक्शा बदल देगा और नए पर्यटन स्थल के रूप में लोगों को आकर्षित करेगा।
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जलशक्ति विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए उप राज्यपाल ने प्रदेश के सभी अस्पतालों, आंगनबाड़ी केंद्रों तथा स्कूलों में 15 अगस्त तक जलापूर्ति सुनिश्चित करने की हिदायत दी। यह सुनिश्चित होना चाहिए कि कोई भी केंद्र जलापूर्ति से वंचित न रह जाए। कई गांवों में पेयजल समस्या का संज्ञान लेते हुए उन्होंने तत्काल इसे हल करने को कहा। साथ ही हिदायत दी कि कोई भी व्यक्ति और गांव पेयजल से वंचित न रहे। समस्या समाधान में हीलाहवाली पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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जलजीवन मिशन की समीक्षा करते हुए कहा कि अगस्त 2022 तक हर घर को नल से जलापूर्ति का लक्ष्य रखा गया है, जिसे हर हाल में पूरा किया जाना है। सभी पंचायत घरों में जलापूर्ति सुनिश्चित किया जाए। लोगों को नियमित रूप से जलापूर्ति बनाए रखने के लिए स्त्रोत का रखरखाव भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। इसके लिए योजना बनाते समय सभी हितधारकों की राय ली जानी चाहिए ताकि इसे और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
जलापूर्ति कनेक्शन की सुविधा होगी ऑनलाइन
एलजी ने जलापूर्ति कनेक्शन को और सुविधाजनक बनाने के लिए इस सेवा को ऑनलाइन करने की हिदायत दी। सरकारी कार्यों में देरी का कड़ा संज्ञान लेते हुए कहा कि अधिकारियों की हीलाहवाली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जल संसाधन नियामक प्राधिकरण को और अधिक विशेषज्ञों को जोड़ने को कहा गया ताकि योजनाओं को सही समय पर पूरा किया जा सके।
कम राजस्व वसूली वाले अफसरों की जवाबदेही होगी तय
उप राज्यपाल ने कहा कि राजस्व प्राप्ति भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जिन जोन में कम राजस्व वसूली हुई है उनके जिम्मेदार अफसरों की जवाबदेही तय की जाए। विभाग को लंबित उपभोक्ता प्रमाणपत्र 15 दिन में केंद्र सरकार को जमा करने को कहा गया। जलशक्ति विभाग के आयुक्त सचिव एम राजू ने विभिन्न योजनाओं की प्रगति की जानकारी दी। बैठक में सलाहकार राजीव राय भटनागर, मुख्य सचिव डा. अरुण कुमार मेहता, जल जीवन मिशन के निदेशक डा. सैयद आबिद रशीद, जल संसाधन नियामक प्राधिकरण के अध्यक्ष जीएस झा व सदस्य ए परमेशम, किशोर चंद्र नायक उपस्थित थे।