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J&K: वार्ता की संभावनाएं तलाशने के लिए अलगाववादियों ने बनाई समिति, आम कश्मीरियों से रायशुमारी

Sun, 03 Jun 2018 02:30 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, जम्मू Updated Sun, 03 Jun 2018 02:30 PM IST
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jammu and kashmir- separatists formed committee to look into the possibility of negotiation

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की घोषणा के बाद अलगाववादियों ने वार्ता की संभावनाएं तलाशने तथा आम कश्मीरियों की राय लेने के लिए छह सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति ने घाटी में लोगों से रायशुमारी शुरू भी कर दी है। 

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सूत्रों के अनुसार समिति का गठन गिलानी, मीरवाइज व यासीन मलिक के नेतृत्व वाले अलगाववादियों के संगठन ज्वाइंट रेजिस्टेंस लीडरशिप ने किया है। इसमें तीनों गुट के दो-दो सदस्य शामिल किए गए हैं। समिति में मीरवाइज गुट के गुलाम नबी जाकी व गुलाम नबी नजर, गिलानी ग्रुप से उमर आदिल डार व हाकिम राशिद और मलिक ग्रुप से शेख अब्दुल राशिद व यासीन भट को रखा गया है। 
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राजनाथ की घोषणा के बाद अलगाववादियों के ज्वाइंट रेजिस्टेंस लीडरशिप (जेआरएल) ने 29 मई को बैठक कर केंद्र से बातचीत के लिए तैयार होने का एलान तो किया था, लेकिन इसके लिए शर्तें भी रखी थी। शर्त यह थी कि दिल्ली अपने बयानों को लेकर स्पष्ट रुख सामने रखे। भारत, पाकिस्तान और कश्मीर तीनों कश्मीर मसले में हितधारक हैं। अगर कोई एक इस वार्ता प्रक्रिया में शामिल नहीं होता, तो कोई समाधान नहीं निकलेगा।
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गिलानी के आवास पर ज्वाइंट रेजिस्टेंस लीडरशिप (जेआरएल) के नेता सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज मौलवी उमर फारूक और मोहम्मद यासीन मलिक की घंटे भर चली बैठक में केंद्र से बातचीत के लिए तैयार होने पर रजामंदी हुई थी। बैठक के बाद बयान जारी कर कहा गया था कि सरकार को इस बात को स्पष्ट करना होगा कि वह किसे लेकर बात करना चाहती है, तभी वह वार्ता प्रक्रिया में भाग लेने के लिए तैयार हैं। बयान में उन्होंने यह भी कहा था कि पिछले 70 सालों से जम्मू-कश्मीर के लोग मुसीबतें झेल रहे हैं। वह कश्मीर मसले का समाधान राजनीतिक तौर पर चाहते हैं, ना कि सैन्य बल के जरिए।

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