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जम्मू-कश्मीर: टाइगर हिल को मुक्त करवाते शहीद हुआ था उधमपुर का रतन चंद
Sat, 24 Jul 2021 10:14 PM IST
करिश्मा चिब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Sat, 24 Jul 2021 10:14 PM IST
सार
1999 में जब पाकिस्तान सेना ने कारगिल के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया तो उसके पति की बटालियन को टाइगर हिल को पाकिस्तानी सेना से मुक्त करवाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
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कारगिल युद्ध
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना के कब्जे से टाइगर हिल को मुक्त करवाते समय युद्ध के दौरान उधमपुर का जांबाज सिपाही रतन चंद शहीद हुए थे। उनकी शहादत को आज भी लोग याद रखे हुए हैं। वहीं शहीद की पत्नी व बच्चों का कहना है कि उनको अपने पिता की शहादत पर नाज है। पत्नी ने बताया कि पति ने कारगिल से पत्र भेजा था, जोकि उनको पति के शहीद होने के बाद मिला था।
शहीद की पत्नी सुषमा देवी ने बताया कि पति रतन चंद 1987 में सेना की 18 ग्रेनेडियर में भर्ती हुए थे। उन्होंने कमांडो प्रशिक्षण लिया था। 1999 में जब पाकिस्तान सेना ने कारगिल के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया तो उसके पति की बटालियन को टाइगर हिल को पाकिस्तानी सेना से मुक्त करवाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। पांच जुलाई को दुश्मनों से लोहा लेते हुए पति शहीद हो गए थे। शव न मिलने पर पहले सेना ने बताया कि उसका पति लापता हो गया है। लेकिन कुछ दिनों के बाद सेना ने सूचित किया किया पांच जुलाई को रतन चंद दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हो गया है।
शहीद होने के दो दिन बाद मिला था पति का लिखा हुआ खत
सुषमा देवी ने बताया कि 30 जून, 1999 को पति रतन चंद ने उसको एक खत लिखा था, जिसमें बताया था कि वह ठीक है और बच्चों के साथ पूरे परिवार का हाल भी जाना था। यह खत उसको सात जुलाई को पति की मौत के दो दिन बाद मिला। जब खत पड़ा तो लगा ही नहीं कि पति युद्ध में शहीद हो चुका है।
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यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर: कारगिल युद्ध के शहीदों के सम्मान में निकाली चार बाइक रैलियां द्रास पहुंची
शहीद के बेटा बनना चाहता है इंजीनियर और बेटी ने इतिहास में की एमए
जब रतन चंद शहीद हुआ तो उसके दोनों बच्चे बहुत ही छोटे थे। रतन चंद का बेटे हनी ने दिल्ली में बी टेक कर ली है और वह इंजीनियर बन कर माता पिता का नाम रोशन करना चाहता है। बेटी ने जम्मू यूनिवर्सिटी में इतिहास में एमए कर ली है। वह सरकारी नौकरी कर आगे बढ़ना चाहती है।
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शहीद की पत्नी सुषमा देवी ने बताया कि पति रतन चंद 1987 में सेना की 18 ग्रेनेडियर में भर्ती हुए थे। उन्होंने कमांडो प्रशिक्षण लिया था। 1999 में जब पाकिस्तान सेना ने कारगिल के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया तो उसके पति की बटालियन को टाइगर हिल को पाकिस्तानी सेना से मुक्त करवाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। पांच जुलाई को दुश्मनों से लोहा लेते हुए पति शहीद हो गए थे। शव न मिलने पर पहले सेना ने बताया कि उसका पति लापता हो गया है। लेकिन कुछ दिनों के बाद सेना ने सूचित किया किया पांच जुलाई को रतन चंद दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हो गया है।
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शहीद होने के दो दिन बाद मिला था पति का लिखा हुआ खत
सुषमा देवी ने बताया कि 30 जून, 1999 को पति रतन चंद ने उसको एक खत लिखा था, जिसमें बताया था कि वह ठीक है और बच्चों के साथ पूरे परिवार का हाल भी जाना था। यह खत उसको सात जुलाई को पति की मौत के दो दिन बाद मिला। जब खत पड़ा तो लगा ही नहीं कि पति युद्ध में शहीद हो चुका है।
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शहीद के बेटा बनना चाहता है इंजीनियर और बेटी ने इतिहास में की एमए
जब रतन चंद शहीद हुआ तो उसके दोनों बच्चे बहुत ही छोटे थे। रतन चंद का बेटे हनी ने दिल्ली में बी टेक कर ली है और वह इंजीनियर बन कर माता पिता का नाम रोशन करना चाहता है। बेटी ने जम्मू यूनिवर्सिटी में इतिहास में एमए कर ली है। वह सरकारी नौकरी कर आगे बढ़ना चाहती है।