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जम्मू-कश्मीर:पीडीपी ने परिसीमन आयोग से बनाई दूरी कहा- पहले से तय है क्या होने वाला है
Wed, 07 Jul 2021 10:23 AM IST
करिश्मा चिब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Wed, 07 Jul 2021 10:23 AM IST
सार
आयोग के पैनल को बताया गैर सांविधानिक और गैर कानूनी।
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पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती
- फोटो : PTI
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विस्तार
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने जम्मू-कश्मीर में विधानसभा सीटों की परिसीमन प्रक्रिया से किनारा कर लिया है। पीडीपी के महासचिव गुलाम नबी हंजूरा ने परिसीमन आयोग के पैनल की अध्यक्ष सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश रंजना देसाई को पत्र लिखकर कहा है कि आयोग के पास जम्मू-कश्मीर में परिसीमन करने का सांविधानिक व कानूनी आधार नहीं है। यह केवल दिखावा है। केंद्र ने जम्मू-कश्मीर की अवाम के हक और कम करने की योजना बना रखी है, जिसे पैनल के माध्यम से अंजाम दिया जा रहा है।
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दो पेज के पत्र में हंजूरा ने कहा कि परिसीमन की कसरत असल में केंद्र की सुनियोजित प्रक्रिया है, जिससे जम्मू-कश्मीर की अवाम के हितों को और ठेस पहुंचेगी। पत्र में पांच अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 व 35-ए हटाकर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने का जिक्र किया गया है। पीडीपी ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ धोखा किया गया। लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार छीने गए। ऐसी परिस्थितियों में परिसीमन आयोग के पास कोई सांविधानिक व कानूनी अधिकार नहीं रह जाते। इसे देखते हुए पीडीपी इस प्रक्रिया का हिस्सा बनने से परहेज कर रही है।
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एक पार्टी के राजनीतिक दृष्टिकोण पर चल रही प्रक्रिया
पीडीपी ने भाजपा का नाम लिए बगैर आरोप लगाया कि परिसीमन की प्रक्रिया से यह भी अंदेशा है कि एक राजनीतिक पार्टी के विजन को पूरा किया जा रहा है। अन्य लोगों की राय और नजरिए पर कोई विचार नहीं किया जाएगा।
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पीएम से बैठक के बाद भी निराशा
पीडीपी ने कहा कि प्रधानमंत्री के साथ बैठक में शामिल होने की वजह राजनीतिक प्रक्रिया की दिशा में उठाए गए कदम को स्वीकार करना था, लेकिन पीएम से बैठक के बाद ही हालात नहीं बदले हैं। विश्वास बहाली के लिए कई सुझाव दिए गए लेकिन जमीनी स्तर पर इसके उलट हो रहा है। कर्मचारियों के चरित्र की वेरिफिकेशन का आदेश और दरबार मूव की व्यवस्था खत्म करने के फैसले ने जम्मू और कश्मीर संभागों की खाई को और बड़ा करने का काम किया है।
नेकां के बागी नेता ने पीडीपी को सराहा
नेशनल कांफ्रेंस के बागी नेता और पार्टी के पूर्व मुख्य प्रवक्ता आगा रहुल्लाह मेहंदी ने परिसीमन प्रक्रिया पर पीडीपी के स्टैंड का समर्थन किया है। मेहंदी ने कहा कि अपने अधिकारों के लिए खड़े होने के लिए कोई भी वक्त देर नहीं होता। उम्मीद है कि पीडीपी का आयोग के नाम पत्र एक संयुक्त आम राय बनाएगा। पूर्व मंत्री और प्रभावशाली शिया नेता ने अनुच्छेद 370 हटने के बाद पार्टी आला कमान के रवैए पर नाइत्तेफाकी जताते हुए पार्टी से बगावत कर दी थी। प्रधानमंत्री के साथ जम्मू-कश्मीर के नेताओं की बैठक के बाद भी मेहंदी ने कश्मीरी नेताओं का कड़ा विरोध किया था।