जम्मू-कश्मीर: आठ साल से खेल कोटे में नौकरी नहीं, रोजगार की आस में ओवरएज हो रहे चैंपियन
नौकरी की आस में चैंपियन ओवरएज हो रहे हैं। एसआरओ 349 का मामला 2017 से उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। मामले में फैसले की बजाय खिलाड़ियों को तारीख पर तारीख मिल रही है।
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खेलों की दुनिया में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले प्रदेश के खिलाड़ी सरकार की उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं। एसआरओ 349 खेल कोटे के तहत आठ वर्षों से चैंपियन खिलाड़ियों को नौकरी नहीं मिली है। नौकरी की आस में चैंपियन ओवरएज हो रहे हैं। एसआरओ 349 का मामला 2017 से उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। मामले में फैसले की बजाय खिलाड़ियों को तारीख पर तारीख मिल रही है।
प्रदेश सरकार आउट स्टैंडिंग स्पोर्ट्स पर्सन रूल 1998 के तहत प्रति वर्ष अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले 25 सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को विभिन्न विभागों में नौकरी देती है। प्रदेश सरकार ने एसआरओ 349 के तहत 2017 में 2014-15, 2015-16, 2016-17 के लिए आवेदन मांगे थे। इसके लिए राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों ने आवेदन किए। उस समय के स्पोर्ट्स काउंसिल के सचिव वहीद रहमान पारे ने प्वाइंट सिस्टम में बदलाव कर राष्ट्रीय स्तर पर पदक विजेता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक विजेता से ज्यादा अंक दिए। इस फैसले के खिलाफ कुछ खिलाड़ी कोर्ट में गए। इसके बाद से मामला कोर्ट में विचाराधीन है, इस कारण पिछले आठ वर्षों से चैंपियन खिलाड़ियों को स्पोर्ट्स कोटे का लाभ नहीं मिल रहा है।
क्या कहते हैं खिलाड़ी
2017 में स्पोर्ट्स कोटे के तहत आवेदन किया था। स्पोर्ट्स काउंसिल द्वारा बनाए प्वाइंट सिस्टम के खिलाफ कुछ युवाओं ने हाईकोर्ट का रुख किया, जिसके बाद से मामला अभी तक कोर्ट में है। सरकार को चाहिए वह इस मामले में हस्तक्षेप करे। नौकरी की आस खत्म हो रही है। प्रदेश के लिए मेडल जीतने के बाद भी इस तरह का व्यवहार दुखद है। -दानिश शर्मा, जूडो खिलाड़ी
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एसआरओ-349 पर स्टे लगा है। इसका कारण स्पोर्ट्स काउंसिल द्वारा एसआरओ की भर्ती में नियमों में बदलाव करना था। प्वाइंट सिस्टम में अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने वाले खिलाड़ी को राष्ट्रीय पदक जीतने वाले खिलाड़ी से कम अंक दिए जा रहे थे। इसके विरोध में खिलाड़ियों ने कोर्ट का रुख किया है। सरकार को चाहिए वह इस मामले में हस्तक्षेप करे और मामले में तेजी लाने के लिए कोर्ट से अपील करे। -राजेंद्र सिंह, वूशु खिलाड़ी
स्पोर्ट्स के तहत नौकरी नहीं मिलना निराशा की बात है। 2017 में आवेदन किया था, लेकिन मामला कोर्ट में चला गया। कुछ वर्षों तक मामला उच्च न्यायालय के पास रहा है फिर न्यायालय ने मामले को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण को सौंपा, अब फिर मामले को उच्च न्यायालय को सौंपा गया है। -अरविंद सेठी, ताइक्वांडो खिलाड़ी