आतंकियों और अलगाववादियों से संबंध बना फारूक अब्दुल्ला पर पीएसए लगने का कारण

एजेंसी, श्रीनगर Published by: Pranjal Dixit Updated Fri, 20 Sep 2019 02:18 PM IST
फारूक अब्दुल्ला
फारूक अब्दुल्ला - फोटो : फाइल, अमर उजाला
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देश के खिलाफ लोगों को लामबंद करने और घाटी में सार्वजनिक रूप से अव्यवस्था पैदा करने की ‘जबरदस्त क्षमता’ वाले बयान उन सूचीबद्ध आरोपों में शामिल हैं, जिनके तहत जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारुक अब्दुल्ला को जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) में गिरफ्तार किया गया है। 
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डॉ. अब्दुल्ला राज्य के पहले पूर्व मुख्यमंत्री हैं, जिन्हें सोमवार को पीएसए के तहत गिरफ्तार किया गया और उनके गुपकार रोड स्थित आवास को जेल घोषित कर दिया गया। पांच अगस्त को राज्य को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से वह अपने घर में ही नजरबंद हैं। पीएसए के प्रावधानों के तहत तीन से छह महीने तक जेल में रखा जा सकता है।


श्रीनगर के 81 वर्षीय लोकसभा सांसद और नेशनल कांफ्रेंस के चेयरमैन पर अपने भाषणों में आतंकियों और अलगाववादियों की महिमा मंडन का भी आरोप लगाया गया है। डॉ. अब्दुल्ला के खिलाफ की गई पीएसए की कार्रवाई में 2016 से अब तक के सात मौकों का हवाला दिया गया है, जिसमें उन्होंने अलगाववादी हुर्रियत कांफ्रेंस और आतंकी समूहों के हित में बात की।

उन पर यह भी आरोप है कि डॉ. अब्दुल्ला अनुच्छेद 370 व 35ए का सहारा लेकर लोगों को भड़का सकते थे। वह देश की अखंडता को खतरे में डाल कर उग्रवाद का महिमामंडन कर सकते थे। उनकी विचारधारा अलगाववाद का समर्थन करते हुए आम लोगों के जीवन और स्वतंत्रता के लिए खतरा पैदा कर रही थी। 

पीएसए आदेश में कहा गया है कि फारुक के पास श्रीनगर और घाटी के अन्य हिस्सों में सार्वजनिक अव्यवस्था पैदा करने की ‘जबरदस्त क्षमता’ है। इसे देश के खिलाफ भड़काने की कार्रवाई से जोड़ कर देखा जाता है। उन पर राज्य प्रशासन के कानूनों के विरोध में बयान जारी करने का भी आरोप लगाया गया है। कहा गया कि इसका मकसद सार्वजनिक व्यवस्था को अस्त-व्यस्त करना था।


पीएसए में दो खंडों का प्रावधान

पीएसए में दो खंड हैं, एक है सार्वजनिक व्यवस्था जबकि दूसरा है राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा। इसके दोनों खंड पहले तीन से छह महीने के लिए परीक्षण और बाद में दो साल के लिए हिरासत में रखने की अनुमति देता है। पीएसए सिर्फ जम्मू और कश्मीर में लागू है। देश में अन्य हिस्सों में समान कानून राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) लागू है।

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