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जम्मू-कश्मीर में प्रशासन ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनाया कड़ा रुख, कई अफसर और नेता नपे

Wed, 05 Aug 2020 03:49 PM IST
प्रशांत कुमार अजय मीनिया, जम्मू
अजय मीनिया, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Wed, 05 Aug 2020 03:49 PM IST
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Jammu and Kashmir news, Administration takes strong stand against corruption in Jammu and Kashmir
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

जम्मू-कश्मीर में निजाम बदलते ही भ्रष्टाचारियों के खिलाफ भी शिकंजा कस दिया गया है। सबसे बड़ी कार्रवाई जेएंडके बैंक पर हुई। बैंक के कई पूर्व अफसरों पर मुकदमा दर्ज हुआ। पूर्व वित्त मंत्री अब्दुल रहीम राथर के बेटे हिलाल राथर तथा पूर्व मंत्री लाल सिंह पर सीबीआई ने शिकंजा कसा। केंद्रीय कानून लागू होने के बाद अब रिश्वत लेने व देने वाले दोनों को जिम्मेदार बनाया गया है।

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अक्तूबर 2019 में एसीबी ने जेएंडके बैंक के पूर्व चेयरमैन मुश्ताक अहमद के खिलाफ फर्जी लोन मंजूर करने का केस दर्ज किया। ठीक दो महीने बाद जनवरी 2020 में बैंक के अधिकारियों पर बैंक में 3 हजार अवैध नियुक्तियों के अलावा करोड़ों रुपये के लोन बांटने के आधा दर्जन केस दर्ज किए गए। 2020 में जेएंडके बैंक की रेजिडेंसी रोड शाखा जम्मू में भी वित्तीय घोटाले का केस दर्ज किया गया। एसीबी ने जम्मू सेंट्रल कोआपरेटिव बैंक लिमिटेड के जीएम, राजोरी की कोआपरेटिव बैंक शाखा में भी भ्रष्टाचार को लेकर केस दर्ज किया।
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जेएंडके बैंक में अवैध नियुक्तियों और करोड़ों रुपये के लोन की जांच में एसीबी ने नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी की सरकारों के कार्यकाल में हुई धांधलियों का कच्चा चिट्ठा बाहर निकाला। एसीबी ने नेशनल कांफ्रेंस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री अब्दुल रहीम राथर के बेटे हिलाल राथर पर जेएंडके बैंक से 177 करोड़ रुपये का लोन लेने और वापस न करने का केस दर्ज किया। एसीबी की सिफारिश पर अब सीबीआई जांच चल रही है। हाल ही में पूर्व मंत्री लाल सिंह के शिक्षण संस्थान के लिए जमीन आवंटित करने के मामले में सीबीआई ने कार्रवाई शुरू की है।
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इसके साथ ही एसीबी ने जेएंडके बैंक के अलावा सिकॉप के पूर्व एमडी पर अवैध नियुक्ति, बेनामी संपत्ति का केस दर्ज किया। इसी तरह से उधमपुर के सीएपीडी के निदेशक पर 260 करोड़ रुपये का राशन घोटाला करने का केस, जनजाति मामलों के निदेशक पर स्कॉलरशिप घोटाले का केस, पीडीडी के चीफ इंजीनियर प्रोजेक्ट विंग पर सौभाग्य योजना के तहत हेराफेरी का केस दर्ज किया।

एसीबी को मिले अधिकार, एक साल में 49 केस दर्ज

तत्कालीन राज्यपाल सत्यपाल मलिक के कार्यकाल में गठित एंटी करप्शन ब्यूरो को अनुच्छेद 370 हटने के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ ज्यादा अधिकार दिए गए। एंटी करप्शन ब्यूरो की सीधी कमान केंद्र के हाथ में जाने पर इसका पुनर्गठन भी हुआ। केंद्र ने न सिर्फ एसीबी का अमला बढ़ाया, बल्कि बैंकों पर भी कार्रवाई का अधिकार दे दिया। पहले एसीबी बैंकों में कार्रवाई नहीं कर पाती थी। 370 हटने के बाद एसीबी ने प्रदेश में भ्रष्टाचार को लेकर 49 केस दर्ज किए हैं।

एसीबी के पास अब 100 से अधिक की टीम
370 हटने से पहले एंटी करप्शन ब्यूरो के पास 35 से 40 लोगों की टीम थी। अब एसीबी के पास 100 से अधिक लोगों की संख्या है। एसीबी की अपनी बेवसाइट है। साथ ही एसीबी की ओर से व्हाटसएप और सोशल मीडिया के जरिए भी लोगों की शिकायतें सुनी जाती हैं।

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