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नए जम्मू-कश्मीर का एक सालः गोरखा समाज के लोग बोले- '73 साल से दरबदर थे अब हुए आजाद, मनाएंगे जश्न'

Tue, 04 Aug 2020 12:20 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Tue, 04 Aug 2020 12:20 PM IST
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jammu and kashmir news, abrogation of article 370 in jammu and kashmir
जम्मू कश्मीर - फोटो : अमर उजाला

अनुच्छेद 370 व 35 ए हटाए जाने से गोरखा समाज को भी काफी राहत मिली है। अब उन्हें यहां की नागरिकता और अन्य अधिकार मिले हैं। महाराजा गुलाब सिंह की सेना का अहम हिस्सा रहे गोरखा समाज के लोगों की उपेक्षा 1947 के बाद शुरू हुई। 1989 के बाद सेना में भी इनके लिए भर्ती रैली बंद कर दी गई। नौकरी न मिलने और अन्य परेशानियों के चलते कई परिवार बाहरी राज्यों को पलायन कर गए, जो यहां रहे उन्हें अपने अधिकारों से वंचित रहना पड़ा।

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अब पिछले साल पांच अगस्त को 370 हटने से इन्हें इनके अधिकार वापस मिले हैं। समाज के लोग कहते हैं देश तो 1947 में आजाद हुआ लेकिन जम्मू-कश्मीर में रहने वाले गोरखा समाज को पिछले साल पांच अगस्त को वास्तविक आजादी मिली। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि 370 हटने से जैसे परिणामों की अपेक्षा थी वैसे नहीं मिले। नए जम्मू-कश्मीर में बेरोजगारी और भ्रष्टाचार अब भी चरम सीमा पर है। विकास परवान नहीं चढ़ सका है। टोल प्लाजा की संख्या बढ़ने और इंटरनेट समस्या से भी लोग परेशान हैं।  
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महाराजा गुलाब सिंह के समय लगभग 200 साल पहले हम यहां आए थे। ज्यादातर लोग सेना में रहे। अब यहां पांचवीं पीढ़ी रह रही है। उन्हें सबसे पहले श्रीनगर के मगरमल बाग इलाके में रखा गया। महाराजा हरि सिंह के समय ऊंचे ओहदे वालों को पीआरसी भी दिया गया। 1947 के बाद समाज की उपेक्षा की जाने लगी। 1989 तक गोरखा समाज के लिए सेना में भर्ती रैलियां भी आयोजित की जाती थीं, जिसे बंद कर दिया गया। नौकरी न मिलने पर कई परिवार हिमाचल प्रदेश, देहरादून, दार्जिलिंग, शिलांग शिफ्ट हो गए। अब उन्हें हक मिला है।- करुणा क्षेत्री, अध्यक्ष-आल जेएंडके गोरखा सभा

 

370 व 35ए हटना गोरखा समाज के लिए वरदान है। देश तो 1947 में आजाद हुआ लेकिन जम्मू-कश्मीर में रहने वाले गोरखा समाज को पिछले साल पांच अगस्त को वास्तविक आजादी मिली। पिछले 70 साल से सिर्फ समाज का इस्तेमाल किया गया। पार्षद से लेकर हर चुनाव में उनका वोट लिया जाता रहा, लेकिन पीआरसी नहीं मिली। तीन पीढ़ियां बिल्कुल अलग-थलग पड़ी रही। उनकी गिनती किसी खाते में नहीं होती थी। आखिर कोई तो बताए कि उनका कसूर क्या था। - कैप्टन (रि) शंकर सिंह, उपाध्यक्ष-आल जेएंडके गोरखा सभा

 

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए हटाए जाने के बाद से यहां के नागरिकों को पूर्ण रूप से भारतीय होने का अधिकार मिला। हालांकि, अनुच्छेद हटने के बाद जैसे परिणामों की अपेक्षा थी वैसे सकारात्मक परिणाम नहीं मिले। जम्मू-कश्मीर के साथ जो वादे केंद्र सरकार ने किए थे वो जमीनी स्तर पर पूरे नहीं हुए। बेरोजगारी, भ्रष्टाचार अब भी चरम सीमा पर है। विकास परवान नहीं चढ़ सका है।- साहिल शर्मा, पुरखु

 


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ढेरों उम्मीदें थीं, लेकिन यह पूरी नहीं हो पाईं। जम्मू शहर को टोल का शहर बना दिया गया। पीआरसी की जगह डोमिसाइल व्यवस्था शुरू की गई, लेकिन यह भी आसान नहीं है। लोगों को आनलाइन प्रमाणपत्र लेने में दिक्कतें आ रही हैं। महाराजा हरि सिंह की जयंती पर छुट्टी की पुरानी मांग यहां के बाशिंदों की रही है, जिसे पूरा नहीं किया गया। -रघुबीर सिंह बागल, विजयपुर

 

370 व 35ए हटने से आजादी मिली है। रोजगार के द्वार खुले हैं। घाटी में आतंकवाद पर अंकुश लगा है। पत्थरबाजी में कमी आई है। विकास को बढ़ावा मिला है। आने वाले दिनों में इसका फायदा आम लोगों को मिलता दिखेगा। -साहिल गुप्ता, वार्ड 37

 

 अब आम नागरिकों को राहत मिली है। भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सकेगा। प्रशासन का रवैया बदला है। प्रशासन में बैठे लोगों की जिम्मेदारी तय हो पाई है। इससे लोगों की मुश्किलों का समाधान समय पर हो पाएगा। -अनिकेत शर्मा, मीरां साहिब

 

अनुच्छेद 370 हटने के बाद प्रदेश की जनता ने सिर्फ परेशानियां ही उठाई हैं। पहले तो मोबाइल इंटरनेट को अस्थायी तौर पर बंद किया गया जो अब स्थायी हो गया। डोमिसाइल प्रमाणपत्र व टोल प्लाजा का बोझ भी डाला गया। एक साल पहले किसी राज्य का भविष्य बदल दिया गया।- प्रशांत दुबे, तालाब तिल्लो

अनुच्छेद 370 की वजह से बाहर ब्याहने वाली महिलाओं को किसी प्रकार का अधिकार नहीं मिल पाता था। वह अपनी पैतृक संपत्ति से हाथ धो बैठती थीं। अब ऐसा नहीं होगा। इसके साथ ही बदतर जिंदगी जी रहे रिफ्यूजियों को भी नागरिकता का तोहफा मिल गया है। -सतिंदर कौर, लकड़ मंडी

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