{"_id":"614777928ebc3e4732175293","slug":"jammu-and-kashmir-judicial-officers-will-get-accommodation-at-the-place-of-posting-will-not-have-to-pay-fee","type":"story","status":"publish","title_hn":"जम्मू-कश्मीर: न्यायिक अफसरों को तैनाती स्थल पर ही मिलेगा आवास, नहीं देना होगा शुल्क","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जम्मू-कश्मीर: न्यायिक अफसरों को तैनाती स्थल पर ही मिलेगा आवास, नहीं देना होगा शुल्क
Sun, 19 Sep 2021 11:16 PM IST
करिश्मा चिब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Sun, 19 Sep 2021 11:16 PM IST
सार
जम्मू-कश्मीर में स्थानांतरण पर दो हफ्ते और सेवानिवृत्ति पर चार सप्ताह में खाली करना होगा सरकारी आवास।
विज्ञापन
हाईकोर्ट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जम्मू-कश्मीर, लद्दाख हाईकोर्ट ने जिला कोर्ट और सहयोगी अदालतों में तैनात न्यायिक अधिकारियों के लिए आवासीय नीति लागू कर दी है। इसके तहत हर अधिकारी को निशुल्क आवास मिलेंगे। यह आवास तैनाती वाली जगह ही मिलेंगे। आवास आवंटन वरिष्ठता के आधार पर दिए जाएंगे।
विज्ञापन
आवास नीति के तहत किसी भी अफसर की पोस्टिंग के अलावा किसी दूसरे स्थान पर आवास लेने के लिए आवेदन मंजूर नहीं किया जाएगा। नई नीति के तहत यदि कोई अफसर रिटायर होने वाला है तो रिटायरमेंट के अधिक से अधिक चार हफ्तों तक वह आवास में रह सकता है। इसके बाद आवास छोड़ना होगा।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर: गिरफ्तारी से पहले ही सरपंच ने ले ली जमानत, पुलिस चौकी प्रभारी पर तानी थी तलवार
विज्ञापन
हाईकोर्ट की अनुमति के बिना अफसर आवास में कोई बदलाव नहीं कर पाएंगे, न ही सरकारी आवास के ढांचे में किसी तरह का परिवर्तन कर सकते हैं। स्थानांतरण होने पर अफसरों को दो हफ्तों के बाद ही आवास छोड़ना पड़ेगा। हाईकोर्ट ने यह नीति न्यायिक अफसरों को बेहतर आवासीय सुविधा देने के उद्देश्य से बनाई है।