अब्दुल्ला के लंदन से लौटने पर फिर बढ़ेगी सियासी हलचल
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रियासत में नई सरकार के गठन पर असमंजस केबादल 10 दिन बाद भी नहीं छंटे हैं। पीडीपी और भाजपा की ओर से राज्यपाल से मिलकर सरकार गठन पर बातचीत के बाद भी फिलहाल तस्वीर साफ नहीं हो पाई है। पहली बार रियासत में पावर सेंटर बनने के लिए पूरी शिद्दत से जुटी भाजपा हर दांव आजमा रही है।
लंदन से डा. फारुक अब्दुल्ला तथा उमर अब्दुल्ला के लौटने के बाद सात जनवरी से एक बार फिर सरकार गठन को लेकर सियासी हलचल तेज होने की उम्मीद है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव के भी दो-तीन दिनों में घाटी पहुंचने की संभावना है। पार्टी की ओर से नौ-दस जनवरी तक सरकार गठन के बाबत कोई औपचारिक घोषणा की जा सकती है।
भाजपा सूत्रों का कहना है कि पीडीपी हो या नेकां किसी से भी सरकार बनाने पर औपचारिक बातचीत नहीं हुई है। नेकां से बातचीत को विराम नहीं दिया गया है, बल्कि अब्दुल्ला परिवार के लौटने पर इस दिशा में तेजी से बातचीत बढ़ सकती है।
सरकार में क्षेत्रीय संततुलन जरुरी
सूत्रों ने बताया कि शीर्ष स्तर पर बातचीत चल रही है। स्थायी सरकार, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के समान विकास तथा अन्य मुद्दों को लेकर संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। भाजपा के कश्मीर प्रभारी रमेश अरोड़ा का कहना है कि नौ-दस जनवरी तक सरकार गठन के बारे में कोई औपचारिक घोषणा हो सकती है।
इसके लिए बातचीत सकारात्मक दिशा में चल रही है। उनका कहना है कि रणनीति तैयार करने के लिए राम माधव अगले दो-तीन दिनों में यहां आ सकते हैं। उधर, पर्याप्त संख्या बल न होने के कारण सियासी गतिविधियों पर नेकां बारीकी से नजर रखे हुए है।
पार्टी के कश्मीर प्रधान नसीर असलम वानी का कहना है कि पार्टी ने पीडीपी को समर्थन देने की घोषणा कर रखी है, लेकिन उसकी ओर से अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। पीडीपी और भाजपा जिसके पास नंबर है, सरकार बनाने के लिए उन्हीं को पहल करनी है।