महबूबा मुफ्ती की रिहाई की उड़ी अफवाह, गुपकार रोड पर समर्थकों और मीडिया का लगा जमावड़ा
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पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की रिहाई की अफवाह बुधवार को आग की तरह फैली। इसके बाद मीडिया कर्मियों और कुछ समर्थकों का जमावड़ा गुपकार रोड पर देखने को मिला, लेकिन कोरोना वायरस के चलते लागू की गई पाबंदियों के कारण किसी को भी महबूबा के आवास फेयरव्यू गुपकार की ओर जाने नहीं दिया गया। देर शाम तक भी प्रशासन की तरफ से ऐसा कोई ऑर्डर सामने नहीं आया जिसमें उन पर लगे पीएसए को हटाने की बात की गई हो। बता दें कि महबूबा और उमर अब्दुल्ला पर पांच फरवरी को एक साथ पीएसए लगाया गया था। उमर को मंगलवार को रिहा कर दिया गया।
घाटी में पांच अगस्त को अनुछेद 370 हटाने से पहले यहां करीब 50 से अधिक बड़े राजनेताओं को हिरासत में लिया गया था, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती भी शामिल थीं। उमर और फारूक समेत कई की रिहाई हो चुकी है जबकि महबूबा सहित कुछ अन्य अभी भी नजरबंद हैं। बता दें कि महबूबा को पहले उनके गुपकार स्थित घर पर नजरबंद रखा गया था। इसके बाद उन्हे हरी निवास और फिर चश्मा शाही में एक हट में रखा गया था।
नवंबर के दूसरे सप्ताह उनकी बेटी इल्तिजा ने राज्यपाल को एक पत्र लिखकर अपील की थी कि सर्दियां शुरू होने पर उनकी मां को कहीं और शिफ्ट किया जाए। जहां वह हैं वहां हीटिंग का प्रबंध नहीं है। इस पर प्रशासन ने उन्हे मौलाना आजाद रोड स्थित सरकारी बंगला नंबर छह में शिफ्ट कर दिया, जहां वह अभी नजरबंद हैं।
उमर ने कहा, ऐसे समय हिरासत में रखना क्रूरता है
उमर अब्दुल्ला को मंगलवार को करीब सात महीने के बाद रिहा किया गया और रिहाई के तुरंत बाद उन्होंने महबूबा समेत सभी उन लोगों की रिहाई की मांग की जो राज्य में और राज्य से बाहर जेलों में बंद हैं। बुधवार को भी उन्होंने एक ट्वीट किया जिसमें उन्होंने लिखा कि ऐसे समय में महबूबा मुफ्ती और अन्य लोगों को हिरासत में रखना क्रूरता है। पहले तो सभी को हिरासत में एक जगह रखना औचित्य था लेकिन अब ये जायज नहीं जब पूरा देश में 21 दिन का लॉकडाउन लागू है। मुझे उम्मीद है कि पीएमओ और एचएम उन्हें रिहा करेंगे।