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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Jammu and Kashmir final report of delimitation will come by March 2022

जम्मू-कश्मीर: मार्च 2022 तक आ जाएगी परिसीमन की अंतिम रिपोर्ट, आयोग की अध्यक्ष ने कहा- पारदर्शी पूरी होगी प्रक्रिया

Sat, 10 Jul 2021 10:43 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Sat, 10 Jul 2021 10:43 AM IST
सार

मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने बताया कि चार दिवसीय दौरे के दौरान आयोग ने श्रीनगर, पहलगाम, किश्तवाड़ और जम्मू में कुल 290 प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की। राजनीतिक दलों के अलावा सिविल सोसायटी, वकीलों, जनजातीय लोगों, स्थानीय निकायों के नेताओं और गैर सरकारी संगठनों के नेताओं ने भी अपनी बात रखी है। परिसीमन आयोग के कार्य को लेकर जम्मू-कश्मीर के लोगों में दिखे उत्साह से आयोग प्रसन्न है।

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Jammu and Kashmir final report of delimitation will come by March 2022
परिसीमन आयोग का जम्मू कश्मीर दौरा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

परिसीमन आयोग ने साफ किया है कि पीओजेके के लिए जम्मू-कश्मीर विधानसभा में रिक्त रखी गई 24 सीटों पर कोई विचार नहीं कर रहा है। यह उसके क्षेत्राधिकार का विषय नहीं है। आयोग परिसीमन को लेकर अपनी अंतिम रिपोर्ट मार्च 2022 तक दे देगा। परिसीमन अधिनियम और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत आयोग अपना काम कर रहा है। प्रदेश में विधानसभा की सात सीटें बढ़ाई जानी हैं। इन सीटों के बढ़ने से कुल 90 निर्वाचन क्षेत्र हो जाएंगे। अनुसूचित जाति और जनजाति को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने का प्रावधान है। अनुसूचित जनजाति को पहली बार सीटों में आरक्षण मिलेगा। ज्ञात हो कि एक दिन पहले भाजपा के प्रतिनिधिमंडल ने परिसीमन आयोग से मिलकर पीओजेके की 24 में से आठ सीटें खोलने की मांग की थी। 

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चार दिवसीय दौरे के अंतिम दिन आयोग की अध्यक्ष जस्टिस (रिटायर्ड) रंजना प्रकाश देसाई ने पत्रकारों से कहा कि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन सांविधानिक प्रक्रिया है। आयोग इस प्रक्रिया को साफ, सुथरे और पारदर्शी तरीके से पूरी करने के लिए प्रतिबद्ध है। निष्पक्षता को लेकर किसी को भ्रम में नहीं रहना चाहिए। परिसीमन आयोग जल्द ही ड्राफ्ट प्रस्तावों पर प्रदेश के सांसदों से भी चर्चा करेगा। जम्मू-कश्मीर के सांसद आयोग के एसोसिएट सदस्य भी हैं। इसके अलावा ड्राफ्ट को पब्लिक डोमेन में भी लाया जाएगा। आपत्तियों व सुझावों पर गौर करने के बाद अंतिम रिपोर्ट तय समयावधि में तैयार कर सरकार को सौंप दी जाएगी। देसाई ने कहा कि आयोग का जम्मू-कश्मीर का पहला दौरा था। आयोग के अभी और दौरे भी होंगे। 
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मुख्य चुनाव आयुक्त बोले, 2011 की जनगणना होगा आधार
मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में आखिरी बार परिसीमन 1995 में हुआ था। उस समय जम्मू-कश्मीर में 12 जिले और 58 तहसीलें हुआ करती थीं। वर्तमान में प्रदेश में 20 जिले हैं और 270 तहसील हैं। पिछला परिसीमन 1981 की जनगणना के आधार पर हुआ था। इस बार परिसीमन आयोग 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन का काम कर रहा है।
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जनसंख्या, क्षेत्रफल, भौगोलिक स्थिति, संचार सुविधाओं पर गौर
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन में जनसंख्या तो मुख्य आधार रहता ही है। इसके अलावा क्षेत्रफल, भौगोलिक परिस्थिति, संचार की सुविधा आदि पर भी गौर किया जा रहा है। सुशील चंद्रा ने कहा जम्मू-कश्मीर में अब तक 1963, 1973 व 1995 में परिसीमन की प्रक्रिया हुई है। एक सवाल के जवाब में रंजना प्रकाश देसाई ने कहा कि पीडीपी ने प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया। आयोग केवल उन लोगों से चर्चा कर रहा है जो प्रक्रिया में भागीदारी कर रहे हैं। प्रक्रिया में शामिल न होने का फैसला अपनी पसंद का विषय है।

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