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जम्मू-कश्मीर डीडीसी चुनाव: सात दशक के संघर्ष के बाद शरणार्थियों को मिला मतदान का अधिकार
Sat, 28 Nov 2020 08:18 PM IST
Mohit Mudgal
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: Mohit Mudgal
Updated Sat, 28 Nov 2020 08:18 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : फाइल फोटो
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अनुच्छेद 370 हटने के बाद प्रदेश में पहली बार जिला विकास परिषद (डीडीसी) चुनाव के पहले चरण के लिए मतदान हुआ। यह चुनाव कई समुदायों के लिए खास रहा। इन चुनावों में पश्चिमी पाकिस्तान से आए शरणार्थी, वाल्मीकि, गोरखा समुदाय के लोगों ने पहली बार अपने मताधिकार का उपयोग किया। सात दशक के लंबे संघर्ष के बाद इन लोगों को प्रदेश में मतदान करने का अधिकार मिला।
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पहले चरण के चुनाव में कुल 51.76 प्रतिशत मतदान हुआ है। जम्मू में 64.2 प्रतिशत जबकि कश्मीर में 40.65 प्रतिशत मतदान किया गया है। इस दौरान सांबा, आरएसपुरा, अखनूर, हीरानगर में इन समुदाय के लोगों ने मतदान में बढ़चढ़ कर भाग लिया।
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प्रदेश में वर्तमान में 1.5 लाख से अधिक शरणार्थी हैं, जो पिछले सात दशकों से मतदान के अधिकार से वंचित थे। अनुच्छेद 370 हटने के बाद पहली बार इन लोगों को मतदान करने को अधिकार मिला। जम्मू शहर के बाहरी इलाके अखनूर के गारी में मतदान करने पहुंची पश्चिमी पाकिस्तान से आई युवा शरणार्थी सुजाती भारती ने कहा कि वह अब अपने आपको स्वतंत्र महसूस कर रही हैं। वे प्रदेश के अन्य लोगों के साथ पहली बार वोट देने के लिए कतार में खड़ी थीं। इस दिन को देखने के लिए हमारे लोगों ने सात दशक तक का लंबा संघर्ष किया है।
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दशकों बाद मिला न्याय, उज्जवल भविष्य देखने के लिए करता है प्रेरित
चुनाव में पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि हमने न्याय, समानता और स्वतंत्रता जैसे शब्द सुन रखे थे लेकिन पहली बार हम उन्हें महसूस कर रहे हैं। 67 वर्षीय बिशन दास ने कहा कि आज हमें अपना अधिकारी मिला है। यह दिन हमें उज्जवल भविष्य देखने के लिए प्रेरित करता है। अब हमारी युवा पीढ़ी को भी प्रदेश के अन्य युवाओं की तरह रोजगार मिल सकेगा। हमारा वोट नहीं होने से पहले उम्मीदवार हमसे दूरी बनाते थे, आज वह उम्मीदवार कई बार हमारे दरवाजों पर आकर वोट देने की अपील करते हैं।