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Jammu Ground Report: यहां 70 फीसदी किसान... इस सीट पर जीत पाना नहीं रहता आसान; मुकाबला त्रिकोणीय होना तय
Thu, 12 Sep 2024 02:00 PM IST
शाहरुख खान
सतीश वालिया, अमर उजाला, जम्मू
सतीश वालिया, अमर उजाला, जम्मू
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 12 Sep 2024 02:00 PM IST
सार
जम्मू-कश्मीर की इस सीट पर इस बार धमाल भी होगा। नेकां ने सकीना को चौथी बार मौका दिया है। अब्दुल मजीद दो पार्टियां बदलकर अपनी पार्टी से उतरे हैं। पीडीपी ने नए चेहरे गुलजार अहमद डार पर दांव लगाया है।
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Jammu Election
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दमहाल हांजी पोरा (डीएच पोरा) धमाल मचाने के लिए तैयार है। पहले यह विधानसभा क्षेत्र नूराबाद के नाम से जाना जाता था। झीलों के नजारों वाले कुलगाम जिले की इस विधानसभा सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला बन रहा है। यह पहली बार नहीं है। पूर्व के तीन चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबले ही देखे गए हैं।
नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां), पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और अपनी पार्टी के उम्मीदवार एक-दूसरे से बाजी मारने व मतदाताओं को लुभाने के लिए जोर लगा रहे हैं। क्षेत्र में चुनाव का माहौल है। डीएच पोरा में प्रवेश करते ही समर्थकों से भरे वाहन, लाउडस्पीकरों पर बजते पार्टी के थीम गीत, दुकानों और घरों की छतों पर विभिन्न पार्टियों के झंडे आपका स्वागत करते हैं।
बस, ऑटो में और दुकानों पर हर दूसरे व्यक्ति की जुवां पर राजनीति और उम्मीदवारों की चर्चा है। विधानसभा सीट डीएच पोरा के जिला कुलगाम में 70 फीसदी लोग खेतीबाड़ी के धंधे से जुड़े हैं। रोजगार के लिए बड़े उद्योग न होने से बेरोजगारी यहां के युवाओं के बड़ा मुद्दा है।
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कोसरनाग झील और ब्रह्मसर जैसे ऐतिहासिक स्थल होने के चलते स्थानीय लोगों की आर्थिकी मुख्य रूप से पर्यटन पर निर्भर है। यहां देश-विदेश से हजारों लोग घूमने पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों का कहना कि वक्त की सरकारों ने पर्यटन पर खास ध्यान नहीं दिया जिससे यहां अच्छी सड़कों से लेकर अन्य सुविधाएं नाकाफी हैं।
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नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां), पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और अपनी पार्टी के उम्मीदवार एक-दूसरे से बाजी मारने व मतदाताओं को लुभाने के लिए जोर लगा रहे हैं। क्षेत्र में चुनाव का माहौल है। डीएच पोरा में प्रवेश करते ही समर्थकों से भरे वाहन, लाउडस्पीकरों पर बजते पार्टी के थीम गीत, दुकानों और घरों की छतों पर विभिन्न पार्टियों के झंडे आपका स्वागत करते हैं।
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बस, ऑटो में और दुकानों पर हर दूसरे व्यक्ति की जुवां पर राजनीति और उम्मीदवारों की चर्चा है। विधानसभा सीट डीएच पोरा के जिला कुलगाम में 70 फीसदी लोग खेतीबाड़ी के धंधे से जुड़े हैं। रोजगार के लिए बड़े उद्योग न होने से बेरोजगारी यहां के युवाओं के बड़ा मुद्दा है।
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कोसरनाग झील और ब्रह्मसर जैसे ऐतिहासिक स्थल होने के चलते स्थानीय लोगों की आर्थिकी मुख्य रूप से पर्यटन पर निर्भर है। यहां देश-विदेश से हजारों लोग घूमने पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों का कहना कि वक्त की सरकारों ने पर्यटन पर खास ध्यान नहीं दिया जिससे यहां अच्छी सड़कों से लेकर अन्य सुविधाएं नाकाफी हैं।
बात राजनीति की करें तो यहां 2014 में पीडीपी और नेकां के बीच मुख्य मुकाबला रहा। इसमें पीडीपी के अब्दुल मजीद ने विजय पाई और इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। नेकां की सकीना मसूद चुनाव हार गई थीं। 370 की समाप्ति के बाद हो रहे पहले विधानसभा चुनाव में यहां काफी कुछ बदला हुआ है। 2010 में अस्तित्व में आई अपनी पार्टी के अब्दुल मजीद यहां से ताकत आजमाने उतरे हैं।
इससे पहले इन्होंने पीडीपी की झोली में इस सीट को डाला था। 2014 के विधानसभा चुनावों में पीडीपी से लड़ते हुए अब्दुल मजीद ने 28,698 वोट हासिल किए और नेशनल कॉन्फ्रेंस की सकीना इतू को 3,708 वोट के अंतर से हराया। इसी सीट से 2008 में हुए विधानसभा चुनाव में सकीना मसूद विजयी रहीं। उन्हें 16,240 वोट मिले और उन्होंने पीडीपी के अब्दुल अजीज को हराया। अजीज को 11,721 वोट मिले थे। जीत का अंतर 4,518 वोट रहा।
पिछले तीन चुनाव में चेहरा दोहराया नहीं
नूराबाद विधानसभा क्षेत्र जो अब डीएच पोरा के नाम से जाना जाता है, ने पिछले तीन चुनाव से किसी भी चेहरे को दोहराया नहीं है। हालांकि जीत नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के हाथों में ही रही है। वर्ष 2002, 2008 औ्रर 2014 में यहां से कांग्रेस ने चुनाव तो लड़ा लेकिन तीसरे स्थान से ही संतोष करना पड़ा। इस बार कांग्रेस नेकां का सहयोगी है और अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है।
नूराबाद विधानसभा क्षेत्र जो अब डीएच पोरा के नाम से जाना जाता है, ने पिछले तीन चुनाव से किसी भी चेहरे को दोहराया नहीं है। हालांकि जीत नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के हाथों में ही रही है। वर्ष 2002, 2008 औ्रर 2014 में यहां से कांग्रेस ने चुनाव तो लड़ा लेकिन तीसरे स्थान से ही संतोष करना पड़ा। इस बार कांग्रेस नेकां का सहयोगी है और अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है।
2014 के विजेता अब्दुल मजीद 2002 और 2008 में कांग्रेस की टिकट से चुनाव लड़े। 2014 में पीडीपी में जाकर सीट का प्रतिनिधित्व किया। इस बार मजीद पीडीपी का साथ छोड़कर अपनी पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने यहां अपना वोट शेयर बढ़ाया है। 2002 में नेकां को लगभग 27 फीसदी वोट मिला था जो 2014 में 42 फीसदी तक पहुंच गया। पीडीपी ने इस बाद चेहरा बदला है और गुलजार अहमद डार को टिकट दिया है। नेकां के पास पिछले तीन चुनाव से सकीना ही चेहरा हैं।
10 साल में क्या मिला
कई कच्ची सड़कें पक्की हुई
जर्जर स्कूलों की मरम्मत हुई
एक कॉलेज का निर्माण हुआ
गांवों में पेयजल सुविधा पहुंच रही
कई कच्ची सड़कें पक्की हुई
जर्जर स्कूलों की मरम्मत हुई
एक कॉलेज का निर्माण हुआ
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क्षेत्र के प्रमुख मुद्दे
झरने का जीर्णोद्धार
रोजगार का सृजन
ग्रामीण सड़कों का विकास
झरने का जीर्णोद्धार
रोजगार का सृजन
ग्रामीण सड़कों का विकास
विस क्षेत्र में कुल वोटर-99037
पुरुष-50153
महिलाएं-48878
पुरुष-50153
महिलाएं-48878