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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Jammu and Kashmir and Ladakh High Court said that advertisement for appointment of coaches should be published

श्रीनगर: बेहतर खेल सुविधाओं के लिए सरकार ने किए ईमानदार प्रयास, पीआईएल बंद

Mon, 25 Oct 2021 10:29 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Mon, 25 Oct 2021 10:29 PM IST
सार

अदालत ने कहा, प्रतिवादी (अधिकारी) आवश्यकता के अनुसार खेल के किसी भी विषय में उचित कोचों को शामिल करने से इनकार नहीं कर रहे हैं। यह एक सतत प्रक्रिया है। तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए खंडपीठ ने कहा कि जनहित याचिका शुरू करने की उपयोगिता समाप्त हो गई है।

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Jammu and Kashmir and Ladakh High Court said that advertisement for appointment of coaches should be published
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने श्रीनगर और प्रदेश के दूसरे स्थानों पर खेल सुविधाओं में सुधार के लिए सरकार की ओर से किए गए ईमानदार प्रयासों के बाद खेल सुविधाओं में कमियों से जुड़ी एक याचिका को बंद कर दिया। अदालत ने खेल सुविधाओं में कुछ कमियों के सामने आने के बाद स्वत: सज्ञान लेते हुए जनहित याचिका के तौर पर सुनवाई शुरू की थी।

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मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल और न्यायमूर्ति विनोद चटर्जी कौल की खंडपीठ ने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया है कि खेल के किसी भी विषय में आवश्यकता के अनुसार कोचों की नियुक्ति पारदर्शी तरीके से उचित विज्ञापन द्वारा आवेदन आमंत्रित करके की जानी चाहिए। खेल सुविधाओं में सुधार के लिए समय-समय पर अधिकारियों को कुछ कदम उठाने के निर्देश देते हुए कई आदेश पारित किए गए।
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अदालत ने कहा कि कई कार्रवाई की रिपोर्ट पहले से ही रिकॉर्ड में है, जिनके अध्ययन से पता चलता है कि श्रीनगर और अन्य जगहों पर खेल सुविधाओं में सुधार के लिए गंभीर प्रयास किए गए हैं। अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता और न्याय मित्र एसएफ कादरी का बयान भी दर्ज किया, जिसमें कहा गया था कि अधिकारियों ने एक सराहनीय काम किया है और खेल के संबंध में बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि आज की तारीख में अच्छे प्रशिक्षकों को नियुक्त करने के लिए उचित कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।
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कहा कि खेल सुविधाओं के सुधार के संबंध में न्यायालय द्वारा बहुत कुछ नहीं किया जाना है। हम जनहित याचिका को बंद करने का निर्देश देते हैं। साथ ही संबंधित पक्षों को यह स्वतंत्रता भी देते हैं कि यदि कुछ कमी पाई जाती है या कुछ अतिरिक्त करने की आवश्यकता होती है, तो वे उचित आवेदन कर सकते हैं।

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