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जम्मू-कश्मीर: एसएमजीएस अस्पताल में दो माह में 122 बच्चों की मौत
Sat, 18 Jan 2020 08:25 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Sat, 18 Jan 2020 08:25 PM IST
सार
- नवंबर-दिसंबर में रोजाना औसतन दो बच्चों की जान गई, संभाग के दस जिलों से यहां रेफर होते हैं मामले
- प्रदेश के सबसे बड़े जच्चा-बच्चा अस्पताल में सिर्फ आठ वेंटिलेटर, चौबीस घंटे रहते हैं व्यस्त
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महाराजा गुलाब सिंह जच्चा बच्चा अस्पताल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर में उधमपुर जिले के रामनगर ब्लॉक में दस बच्चों की मौत ने स्वास्थ्य महकमे के जमीनी हालात उजागर कर दिए हैं। संदिग्ध बीमारी से मौतों के सिलसिले से इतर भी सरकारी अस्पतालों में रोजाना कई बच्चाें की मौत हो रही है। प्रदेश के सबसे बड़े श्री महाराजा गुलाब सिंह जच्चा बच्चा अस्पताल (एसएमजीएस) में दो माह में 122 बच्चों की जान गई है। इनमें से ज्यादातर दूसरे अस्पतालों से रेफर किए गए थे।
एसएमजीएस अस्पताल में रोजाना औसतन दो बच्चों की मौत हो रही है। प्रदेश के अन्य अस्पतालों में बच्चों की मौत के मामले अलग हैं। जम्मू संभाग के दस जिलों से रेफर होकर एसएमजीएस अस्पताल में बीमार बच्चों की भीड़ पहुंच रही है। इनमें दूरवर्ती और पहाड़ी क्षेत्रों से अधिकतर बीमार बच्चों की हालत गंभीर होती है।
अस्पताल के पेडियाट्रिक यूनिट में नवंबर-दिसंबर माह में 122 बच्चे दम तोड़ चुके हैं। यह हाल तब है जब एसएमजीएस अस्पताल में पेडियाट्रिक सेक्शन के साथ थैलेसीमिया, कैंसर, हीमोफीलिया, न्यूट्रिशियन पुनर्वास आदि केंद्र काम कर रहे हैं। इसके अलावा आठ वार्डों में बच्चों का इलाज किया जा रहा है।
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एसएमजीएस अस्पताल में रोजाना औसतन दो बच्चों की मौत हो रही है। प्रदेश के अन्य अस्पतालों में बच्चों की मौत के मामले अलग हैं। जम्मू संभाग के दस जिलों से रेफर होकर एसएमजीएस अस्पताल में बीमार बच्चों की भीड़ पहुंच रही है। इनमें दूरवर्ती और पहाड़ी क्षेत्रों से अधिकतर बीमार बच्चों की हालत गंभीर होती है।
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अस्पताल के पेडियाट्रिक यूनिट में नवंबर-दिसंबर माह में 122 बच्चे दम तोड़ चुके हैं। यह हाल तब है जब एसएमजीएस अस्पताल में पेडियाट्रिक सेक्शन के साथ थैलेसीमिया, कैंसर, हीमोफीलिया, न्यूट्रिशियन पुनर्वास आदि केंद्र काम कर रहे हैं। इसके अलावा आठ वार्डों में बच्चों का इलाज किया जा रहा है।
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इमरजेंसी-आईसीयू बीमार बच्चों से ओवरलोड
इमरजेंसी समेत अन्य आईसीयू में शिशु रोगियों का ओवरलोड है। पेडियाट्रिक सेक्शन में निकू (न्यू नेटल इंटेंसिव केयर यूनिट) बी में 33 बेड (इसमें संक्रमण से पीड़ित बच्चे रहते हैं), निकू-ए में 20 बेड (कम वजन और प्रिमेच्योर बच्चे) और निकू-सी में 11 बेड (वेंटिलेटर और इंक्यूबेटर से लैस) स्थापित हैं। इसके अलावा पिकू (पेडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) में 13 बेड पर एक माह से 18 साल तक के गंभीर रोगी रखे जाते हैं।
अस्पताल में बीमार बच्चों के लिए केवल आठ वेंटिलेटर हैं। अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 500-600 बच्चे आते हैं, जिसमें 80-90 बच्चे भर्ती किए जाते हैं। पेडियाट्रिक सेक्शन में नवंबर में 2100 और दिसंबर में 1800 से अधिक बीमार शिशु दाखिल किए गए। जिला उधमपुर में नवंबर-दिसंबर माह में एक भी बच्चे की मौत नहीं हुई लेकिन इस दौरान महिलाओं के गर्भ में ही बच्चों की मौत के 13 मामले सामने आए हैं।
अस्पताल में बीमार बच्चों के लिए केवल आठ वेंटिलेटर हैं। अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 500-600 बच्चे आते हैं, जिसमें 80-90 बच्चे भर्ती किए जाते हैं। पेडियाट्रिक सेक्शन में नवंबर में 2100 और दिसंबर में 1800 से अधिक बीमार शिशु दाखिल किए गए। जिला उधमपुर में नवंबर-दिसंबर माह में एक भी बच्चे की मौत नहीं हुई लेकिन इस दौरान महिलाओं के गर्भ में ही बच्चों की मौत के 13 मामले सामने आए हैं।
एसएमजीएस अस्पताल पर संभाग के दस जिलों के शिशु रोगियों का लोड है। अस्पताल प्रशासन शिशु रोगियों को सभी चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराने का प्रयास करता है।- डॉ. सुनंदा रैना, प्रिंसिपल, जीएमसी
जम्मू-कश्मीर में शिशु मृत्यु दर 24
शिशु मृत्यु दर में जम्मू-कश्मीर में सुधार आया है। जम्मू-कश्मीर ने भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी नवीनतम नमूना पंजीकरण प्रणाली (एसआरएस 2017) के आंकड़ों के अनुसार 5 वर्ष से कम आयु में मृत्यु दर में 24 तक की गिरावट दर्ज की गई है। 5 वर्ष से कम आयु दर का वर्तमान राष्ट्रीय औसत 37 है, जो जम्मू-कश्मीर की तुलना में अधिक है। मृत्यु दर का आंकड़ा एक हजार नवजात (एक साल तक की आयु तक) पर लिया जाता है।
प्रदेश में शिशु मृत्यु दर को दस से नीचे तक कम करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन जम्मू-कश्मीर द्वारा नार्वे इंडिया पार्टनरशिप पहल की तकनीकी सहायता से एक कार्ययोजना विकसित की गई है। सरकार का दावा है कि इससे 2030 तक नवजात शिशुुओं की मृत्यु दर शून्य हो सकेगी।
प्रदेश में शिशु मृत्यु दर को दस से नीचे तक कम करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन जम्मू-कश्मीर द्वारा नार्वे इंडिया पार्टनरशिप पहल की तकनीकी सहायता से एक कार्ययोजना विकसित की गई है। सरकार का दावा है कि इससे 2030 तक नवजात शिशुुओं की मृत्यु दर शून्य हो सकेगी।