गर्मी से कोई राहत नहीं, पारा सामान्य से ऊपर
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झुलसा देने वाली गर्मी से जम्मू शहर को वीरवार को भी कोई राहत नहीं मिल पाई। यहां पारा सामान्य से ऊपर चल रहा है। जन्नत कहे जाने वाले श्रीनगर में भी तपिश का अहसास हो रहा है। ठंडक का अहसास पाने के लिए पहुंच रहे पर्यटकों को दिन में तपिश का सामना करना पड़ रहा है। रियासत में माइनस 6.5 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ कारगिल सबसे ज्यादा सर्द चल रहा है।
मौसम विभाग के अनुसार, अगले चौबीस घंटों में भी मौसम खुश्क रहेगा। जम्मू में वीरवार सुबह की शुरुआत साफ मौसम के साथ हुई। दिन चढ़ने के साथ गर्मी ने भी अपना रंग दिखाया। दोपहर को बाहर निकलना भी मुश्किल हो रहा है। पिछले डेढ़ हफ्ते से जम्मू के तापमान में लगातार इजाफा हो रहा है। गर्मी का बाजार पर भी असर दिख रहा है।
दिन के समय बाजारों से खरीदारों की रौनक कम हुई है। यहां वीरवार को दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से पांच डिग्री ऊपर 31.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बीती रात के न्यूनतम तापमान में भी बढ़ोतरी के साथ सामान्य से दो डिग्री ज्यादा 17.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। श्रीनगर में भी पारा लगातार सामान्य से ऊपर चल रहा है।
यहां वीरवार को दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से सामान्य से पांच डिग्री ज्यादा 20.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान भी सामान्य से चार डिग्री ऊपर 7.6 डिग्री सेल्सियस रहा। लेह में दिन का अधिकतम तापमान 16.3 और न्यूनतम तापमान माइनस 2.7 डिग्री सेल्सियस रहा। पहलगाम में अधिकतम तापमान 17.7 और न्यूनतम माइनस 0.2 तथा गुलमर्ग में न्यूनतम तापमान 2.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
पारा चढ़ने पर बिगड़ेगी सेहत
पारे के लगातार ऊपर जाने से दूषित पानी से होने वाली बीमारियां पनपेंगी। प्राकृतिक जलस्रोतों पर निर्भर रहने वाले उधमपुर, कठुआ, राजोरी, पुंछ, डोडा आदि जिलों के पहाड़ी क्षेत्र इन बीमारियों से प्रभावित होते रहे हैं। तापमान बढ़ने से पेट की समस्या से लेकर अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी होने लगी है। इसमें उल्टी, दस्त, बुखार हावी है।
दूषित पानी से बच्चे ज्यादा चपेट में आते हैं। तापमान के तीस डिग्री के ऊपर चले जाने से आने वाले दिनों में डायरिया, डिसेंटरी के साथ अन्य पेट संबंधी बीमारियों का प्रकोप बढ़ेगा। डाक्टरों के अनुसार तापमान बढ़ने से बाहर रखे खाद्य पदार्थ और पेयजल में कई वैक्टीरिया पैदा हो जाते हैं जो सीधे सेहत पर हमला करते हैं।
जीएमसी के अधीक्षक डा. रविंद्र रतनपाल के अनुसार, अस्पताल में पेट संबंधी रोगों से मरीजों का पहुंचना शुरू हो गया है। इसमें दूषित पानी से अधिकांश लोग बीमार हो रहे हैं। तापमान बढ़ने पर ई कोली बैक्टीरिया सबसे ज्यादा सक्रिय रहता है, जो डायरिया की मुख्य वजह होता है। इसमें दूषित पानी का सेवन करने से उल्टी और दस्त के साथ हल्का या तेज बुखार रहता है।
डायरिया के लक्षण में एक ही दिन में तीन से ज्यादा बार दस्त आना रहता है। इसमें दस्त पहले और बाद में किस तरह से आई, उस पर भी डायरिया निर्भर करता है। स्वास्थ्य निदेशक डा. बलजीत सिंह पठानिया के अनुसार, जिला स्तर पर सभी सीएमओ को निर्देश दिए गए हैं कि प्राकृतिक जलस्रोतों पर निर्भर रहने वाले क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने के साथ पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाई जाएं।
उल्लेखनीय है कि संभाग में डायरिया सबसे अधिक कई बार कहर बनकर लोगों पर बरपा है। इससे कठुआ जिले के बिलावर, महानपुर, उधमपुर जिले के रामनगर, रियासी, जिला राजोरी में कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।