भयंकर बिजली संकट की चपेट में जम्मू-कश्मीर
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जम्मू कश्मीर में केंद्रीय और राज्य सेक्टर की पन बिजली परियोजनाओं में उत्पादन में क्षमता से एक तिहाई ही रह जाने की वजह से बिजली संकट गहरा गया है। आलम तो यह है कि कश्मीर, लद्दाख में आठ से लेकर 14 घंटों तक की भारी बिजली कटौती का सामना करना पड़ा है। जम्मू संभाग में भी शेड्यूल से कहीं ज्यादा बिजली कटौती का उपभोक्ताओं को सामना करना पड़ रहा है।
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जम्मू-कश्मीर में केंद्रीय और स्टेट सेक्टर के तहत कुल 28 पन बिजली परियोजनाओं की 2693.45 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता है। कड़ाके की ठंड में दरियाओं में नदियों के जल स्तर में भारी गिरावट से 700 से 800 मेगावाट बिजली उत्पादन ही हो पा रहा है।
इसमें से भी केंद्रीय परियोजनाओं में एनएचपीसी की ओर से उत्पादित हो रही करीब आधी बिजली को देश के विभिन्न हिस्सों में भेजा जा रहा है। करीब 400 मेगावाट बिजली ही रियासत के उपभोक्ताओं के लिए प्रयोग करने को उपलब्ध हो पा रही है।
बिजली की मांग में 1200 मेगावाट तक का अंतर
उत्तरी ग्रिड से करीब 1200 से 1300 मेगावाट बिजली प्रतिदिन के आधार पर खरीदी जा रही है, जबकि रियासत में बिजली की मांग बढ़कर 2800 मेगावाट तक हो चुकी है। इस वजह से करीब 1200 मेगावाट की कमी पड़ रही है। बिजली की कमी की वजह से बिजली की अघोषित कटौती बढ़ गई है।
आठ से लेकर चौदह घंटे तक की बिजली कटौती का सामना उपभोक्ताओं को करना पड़ रहा है। बिजली विभाग जम्मू-कश्मीर के प्रधान सचिव अरुण मेहता ने रियासत में बिजली परियोजनाओं में उत्पादन गिरकर एक तिहाई रह जाने की पुष्टि की है।
केंद्रीय सेक्टर में जम्मू-कश्मीर में एनएचपीसी की ओर से सात परियोजनाएं चल रही हैं। इनमें कुल उत्पादन क्षमता 1889 मेगावाट है। इनमें 690 मेगावाट क्षमता की सलाल, 480 मेगावाट की उड़ी एक, 390 मेगावाट की डुलहस्ती, 120 मेगावाट की सेवा दो, 45 मेगावाट की निमो वाजगो, 44 मेगावाट की चुटुक, 240 मेगावाट की उड़ी दो परियोजना शामिल हैं।
वहीं स्टेट सेक्टर के अंतर्गत 21 पन बिजली परियोजनाओं से 761.95 मेगावाट बिजली की उत्पादन क्षमता है। इनमें 450 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता वाली बगलिहार एक परियोजना प्रमुख रूप से शामिल है।