J&K:आतंकियों की धमकियों से पंचायत चुनाव पर बढ़ा असमंजस
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जम्मू कश्मीर में आतंकियों की धमकियों के कारण पंचायत चुनाव पर असमंजस की स्थिति है। पीडीपी और भाजपा की गठबंधन सरकार श्रीनगर और अनंतनाग की लोकसभा सीट पर उपचुनाव को भी फिलहाल टालना चाहती है।
हांलाकि, उपचुनाव टालने के पीछे पंचायत चुनाव को ही कारण बताया जा रहा है, लेकिन हिजबुल मुजाहिदीन के धमकी भरे पोस्टरों से पंचायत चुनाव के भी प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। एक ओर रियासत सरकार हालात को सामान्य बताने के लिए बंद स्कूल खोल रही है और दूसरी ओर चुनावों पर टालमटोल की स्थिति बनी हुई है।
रियासत सरकार ने पहले मार्च में पंचायत चुनाव कराने का एलान किया था। अब इसे अप्रैल में कराने की बात कही जा रही है। इस बीच हिजबुल मुजाहिदीन ने पुलवामा और अनंतनाग समेत कश्मीर के कई हिस्सों में पोस्टर चिपका कर लोगों को पंचायत चुनाव में शिरकत नहीं करने की हिदायत दी है। इन पोस्टरों में फरमान नहीं मानने पर अंजाम भुगतने की भी चेतावनी दी गई है।
हिजबुल के पोस्टरों के बारे में पुलिस ने जांच शुरू की
हिजबुल मुजाहिदीन का दक्षिणी कश्मीर पर खासा प्रभाव है। आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद दक्षिणी कश्मीर के 200 से अधिक कश्मीरी युवक हिजबुल मुजाहिदीन में भर्ती हुए हैं। हिजबुल के पोस्टरों के बारे में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
आतंकियों ने तीन साल पहले पंचों और सरपंचों पर कई हमले किए थे। तब पंचों और सरपंचों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया था। हिजबुल की ताजा धमकियों के कारण पंचों और सरपंचों के भावी प्रत्याशियों में दहशत है। इससे आशंका बढ़ी है कि रियासत सरकार द्वारा सुरक्षा सुनिश्चित नहीं किए जाने की स्थिति में चुनाव में नामांकन नहीं के बराबर होंगे। इस बीच मुख्य चुनाव अधिकारी शांतमनु पंचायत चुनाव की तैयारियों की समीक्षा कर चुके हैं।
ग्रामीण विकास विभाग के सूत्रों के मुताबिक पंचायत वार्डों की हदबंदी का काम मार्च के पहले सप्ताह में पूरा कर लिया जाएगा। हदबंदी पर आपत्तियां ली गई हैं। दरअसल सरकार ने पंचायत चुनाव के नियम बदल दिए हैं, इसलिए हदबंदी जरूरी हो गई थी। नए नियमों के तहत पंचों के चुनाव होंगे और पंच ही सरपंच को चुनेंगे।