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क्या मोदी-शाह की खामोशी का फायदा उठा रही हैं महबूबा?

Mon, 09 Nov 2020 06:56 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 09 Nov 2020 06:56 PM IST
सार

महबूबा मुफ्ती ने कहा, वह तभी तिरंगा उठाएंगी, जब पूर्व राज्य का झंडा और संविधान बहाल किया जाएगा। महबूबा ने कहा, जहां तक मेरी बात है, तो मुझे चुनाव में कोई दिलचस्पी नहीं है...

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Is Mehbooba taking advantage of Modi-Shah's silence, expats wants action on gupkar group
फारूख अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती - फोटो : ANI (File)

विस्तार

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जम्मू-कश्मीर में 'गुपकार' समझौता करने वाले राजनीतिक दलों की टोली से लगातार तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। एक तरफ पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला तो दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती विवादित बयान दे रही हैं। सोमवार को भी उन्होंने बड़ा बयान दिया है। मुफ्ती ने केंद्र सरकार पर हमला करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में युवाओं के पास हथियार उठाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।

जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक और सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ कैप्टन अनिल गौर (रिटायर्ड) का कहना है कि महबूबा मुफ्ती, पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की खामोशी का भरपूर फायदा उठा रही हैं। 'गुपकार' समझौते वाली टोली, कश्मीर को लेकर विवादित बयान दे रही है और केंद्र उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहा। अगर ये बयानबाजी नहीं थमी तो घाटी का वह माहौल जो दशकों बाद कुछ शांत हुआ है, उसे दोबारा बिगड़ने में देर नहीं लगेगी। दूसरी ओर, भाजपा प्रवक्ता ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता (रिटायर्ड) कहते हैं कि अब इन नेताओं पर बहुत जल्द सख्त कार्रवाई होगी।

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इससे पहले पूर्व सीएम फारुख अब्दुल्ला चीन को लेकर विवादित बयान दे चुके हैं। उसके बाद महबूबा मुफ्ती ने कहा, वह तभी तिरंगा उठाएंगी, जब पूर्व राज्य का झंडा और संविधान बहाल किया जाएगा। महबूबा ने कहा, जहां तक मेरी बात है, तो मुझे चुनाव में कोई दिलचस्पी नहीं है। चीन ने हमारी जमीन के एक हजार वर्ग किलोमीटर हिस्से पर कब्जा कर लिया है। मुझे लगता है कि हम किसी तरह लगभग 40 किमी जमीन वापस लाने में कामयाब रहे हैं। अब उन्होंने कश्मीर के युवाओं को लेकर बड़ा बयान दे दिया है।
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महबूबा मुफ्ती ने कहा, अनुच्छेद 370 हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में लोगों का रोजगार और भूमि से हक छीन लिया गया है। दूध की नदियां बहाने की बातें करने वाली भाजपा सरकार जम्मू-कश्मीर के संसाधनों को लूटने के अलावा यहां के लोगों की जमीन व रोजगार भी छीन रही है। कश्मीर के युवाओं को या तो जेल में डाला जा रहा है, या वे मजबूर होकर बंदूक उठा रहे हैं। सरकार ने ऐसे हालात पैदा कर दिए हैं कि युवाओं के पास बंदूक उठाने या फिर जेल जाने का विकल्प ही बचा है।

महबूबा के इस बयान पर कैप्टन अनिल गौर (रिटायर्ड) का कहना है कि केंद्र सरकार को उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। महबूबा और फारुख अब्दुल्ला, इन दोनों नेताओं के सामने अब राजनीतिक विरासत को बचाने की चुनौती है। इनके प्रति आम लोगों में अब न तो कोई लगाव है और न ही सहानुभूति। ऐसे में ये तोड़फोड़ वाले बयान दे रहे हैं। इनका मकसद है कि घाटी में लोग इनकी बात सुनें, लेकिन ये उसमें भी कामयाब नहीं हो रहे हैं। ऐसे बयानों का मतलब है कि अब ये लोग किसी भी हद तक जाकर अपने उस वजूद को हासिल करना चाहते हैं, जो ये खो चुके हैं।


दशकों बाद जब घाटी में कुछ शांति हुई है, ऐसे में महबूबा कह रही हैं कि युवाओं के पास हथियार उठाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। वे सीधे तौर पर युवाओं से हथियार उठाने की अपील कर रही हैं। उनका यह बयान घाटी का माहौल बिगाड़ने के लिए काफी है। पड़ोसी राष्ट्र पहले ही जम्मू-कश्मीर में युवाओं को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है। ऐसे समय में महबूबा भी युवाओं को लेकर इस तरह की बयानबाजी कर रही हैं तो उसका खामियाजा जम्मू-कश्मीर भुगतने के लिए तैयार रहे।



ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता (रिटायर्ड) का कहना है कि ये लोग सत्ता की खातिर कुछ भी कर सकते हैं। खैर, अब इनके खिलाफ कार्रवाई होगी। इनके बयानों को लेकर केंद्र को रिपोर्ट भेज दी गई हैं। बिहार चुनाव के वोटों की गिनती के बाद इस तरह की बयानबाजी पर अंकुश लग जाएगा।

 

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