पाक और आईएस के झंडे लहराए जाने पर खुफिया एजेंसियां सतर्क
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कश्मीर घाटी में पिछले दिनों पाकिस्तान और आतंकी संगठन आईएस के झंडे लहराए जाने और आईएस के इराक और सीरिया से बाहर पैर फैलाने की इच्छा को देखते हुए सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां बेहद सतर्क हो गईं हैं।
इन घटनाओं पर गंभीर रुख अपनाते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से इनकी जांच करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है। लेकिन, समस्या केवल झंडा लहराए जाने से कहीं ज्यादा गंभीर है।
उत्तरी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुडा पढ़े-लिखे कश्मीरी युवकों के आतंकवादी संगठन से प्रभावित होने को लेकर रविवार को चिंता जता चुके हैं।
उनका मानना है कि केंद्र और राज्य सरकारों को इस पर विचार करने की जरूरत है कि आखिर क्यों अवसरों की कमी के कारण ये युवक बंदूक उठा रहे हैं।
आईएस के विस्तार के बारे में कोई खुफिया रिपोर्ट नहीं
लेफ्टिनेंट जनरल हूडा ने कहा कि घाटी में आईएस के झंडे लहराए जाने के प्रत्यक्षदर्शी हैं लेकिन कश्मीर या भारत के भीतर आईएस के विस्तार के बारे में कोई खुफिया रिपोर्ट नहीं है। यहां तक कि केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने पिछले दिनों इस्लामी कट्टरपंथ की समस्या को एक बड़ी चुनौती करार दिया था।
सिंह ने हाल ही में कहा था कि कथित जिहादी ताकतों से खतरा केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश की समस्या है और इसे खत्म करने के लिए राज्यों और केंद्र दोनों को मिलकर लड़ना होगा।
गृह मंत्रालय की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब आईएस का प्रभाव बढ़ते जा रहा है। भारत में आईएस द्वारा मुस्लिम युवकों को इंटरनेट के जरिए प्रभावित करने और महाराष्ट्र के कुछ युवकों के आईएस में शामिल होने के लिए इराक और सीरिया जाने के मामले सामने आने के बाद सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील राज्यों की स्थिति पर पैनी नजर रख रही है।
अबू बक्र अल- बगदादी का मकसद
सूत्रों ने बताया कि सबसे बड़ी जरूरत राज्य और केंद्र की एजेंसियों के बीच संयोजन है। गौरतलब है कि आईएस का प्रमुख अबू बक्र अल- बगदादी पूरी दुनिया पर इस्लामी शासन स्थापित करने की अपनी इच्छा जाहिर कर चुका है।
आईएस का असर इराक और सीरिया से बाहर के देशों में फैल गया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आई रिपोर्टों के मुताबिक यमन और रूस सहित 11 देशों में आईएस के अपने दस्ते हैं।
भारत और कुछ अन्य देशों में कई संगठनों ने खुद को आईएस से संबंध होने का दावा किया है लेकिन अल-बगदादी ने इसे अभी तक स्वीकार नहीं किया है।