जम्मू कश्मीर के किसानों के लिए बड़ी खबर
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प्राकृतिक आपदाओं से तबाह होने वाले कश्मीर के सेब और राज्य के अन्य फल उत्पादों सहित सब्जियों का बीमा होगा। रियासत सरकार राज्य में हार्टीकल्चर सेक्टर में क्राप इंश्योरेंस को लागू करने जा रही है।
अगर सब कुछ ठीक रहा तो साल के अंत तक यह योजना लागू हो जाएगी। इसके लिए शेर-ए-कश्मीर कृषि विश्वविद्यालय, कश्मीर के वाइस चांसलर के नेतृत्व वाली कमेटी का गठन कर दिया गया है। इसमें हार्टीकल्चर विभाग के दोनों संभागों के निदेशक और आयुक्त सचिव सहित कई अन्य विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं।
हार्टीकल्चर मंत्री अब्दुल रहमान वीरी ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब तक राज्य में हार्टीकल्चर सेक्टर में बीमा योजना नहीं है। कमेटी इस योजना को लागू करने का खाका तैयार करेगी। इसके बाद कैबिनेट में इसे मंजूरी दी जाएगी। हार्टीकल्चर राज्य की बैकबोन है, जिसका बीमा होना आवश्यक है।
क्यों पड़ी आवश्यकता
2014 की बाढ़ में कश्मीर में सेब की फसल खराब होने से दो हजार करोड़ का नुकसान हुआ था। इसके अलावा अन्य फसलों का नुकसान भी हुआ। इससे पहले भी प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसलों को नुकसान पहुंचता है।
पिछले कई सालों से कश्मीर का हार्टीकल्चर सेक्टर बीमा करने की मांग कर रहा था। सेब उत्पादक एसोसिएशन के प्रधान अमीन मीर का कहना है कि कई सालों से इसकी मांग कर रहे थे। सरकार को चाहिए कि जल्द ही इस बीमा योजना को लागू करे।
राज्य में सेब, बादाम, अखरोट, नाशपाती, खुमानी, चेरी, ऑलिव, अंगूर, आलूबुखारा, बेर, अमरूद, आम, केला, लिची, स्ट्राबरी आदि फल उत्पाद हैं। हर साल फलों की 25 लाख मीट्रिक टन से अधिक की पैदावार होती है।
हालांकि इसमें 13 से 15 लाख मीट्रिक टन सेब की पैदावार रहती है। राज्य में करीब 12 लाख मीट्रिक टन सब्जियां भी होती हैं। यह भी क्राप इंश्योरेंस के दायरे में शामिल होंगी।