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हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक भुगतान करें बीमा कंपनियां
ब्यूरो/अमर उजाला, श्रीनगर
Updated Sat, 11 Oct 2014 01:37 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में आई बाढ़ की विभीषिका के मद्देनजर बीमा कंपनियों को नियमों को दरकिनार कर बाढ़ पीड़ितों के दावे का भुगतान करना होगा। उन्हें पच्चीस लाख से कम के दावे का 95 प्रतिशत तथा पच्चीस लाख से अधिक के दावे का 50 फीसदी भुगतान तुरंत करना होगा।
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सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश बीमा कंपनियों की याचिका को खारिज करते हुए दिया है। बीमा कंपनियों ने जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च अदालत ने कहा कि कश्मीर के लोग प्राकृतिक आपदा से बहुत ज्यादा आहत हुए हैं।
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अब उन्हें और अधिक कष्ट नहीं दिया जा सकता। साथ ही चीफ जस्टिस एचएल दत्तू और जस्टिस शरद अरविंद बोबडे की बेंच ने बाढ़ पीड़ितों के दावों का भुगतान करने के बारे में हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत ने बीमा कंपनियों के इन दावों का निबटारा करने से पहले सर्वे के लिए एक महीने का वक्त देने का अनुरोध भी ठुकरा दिया।
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पीठ ने कहा कि कभी-कभी प्राकृतिक आपदा से पीड़ित लोगों के हितों की खातिर हमें नियमों को नजरअंदाज करना होता है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने आपदा को अपनी आंखों से देखा है और उनका आदेश न्यायोचित है। चीफ जस्टिस ने कहा कि हम हाईकोर्ट के आदेश में एक शब्द भी नहीं बदलेंगे।
यूनाइटेड इंश्योरेंस कंपनी, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी, ओरिएंटल इंडिया और न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी ने अदालत में कहा था कि नौ अक्तूबर, 2014 तक उन्हें करीब 980 करोड़ रुपये के लगभग दस हजार दावे मिले हैं। कंपनियों का यह भी कहना था कि वे तकरीबन 25 करोड़ रुपये के 983 चेक पहले ही बना चुकी हैं।
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि हाईकोर्ट को सोमवार से कार्यशील बनाने के लिये उचित कदम उठाए जाएं। राज्य में बाढ़ के बाद से हाईकोर्ट अस्थाई स्थान से काम कर रहा है।