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जम्मू-कश्मीर में कम हुआ शिशु मृत्यु दर
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Tue, 30 Dec 2014 02:31 PM IST
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राष्ट्रीय शिशु मृत्यु दर औसत के मुकाबले जम्मू-कश्मीर में वर्ष 2013-14 में शिशु मृत्यु दर में गिरावट आई है। राष्ट्रीय औसत पर एक हजार नवजात बच्चों पर चालीस शिशु मृत्यु दर है। जिसमें रियासत में इसका औसत गिरकर 37 पर आ गया है। वर्ष 2012 में यह 39 था। सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम 2014 बुलेटिन के ताजा आंकड़ों में यह खुलासा किया गया है।
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जम्मू-कश्मीर में वर्ष 2017 तक राष्ट्रीय शिशु मृत्यु दर औसत से 24 कम का लक्ष्य रखा गया है। नेशनल हेल्थ मिशन जम्मू-कश्मीर के मिशन निदेशक डा. यशपाल शर्मा के अनुसार जेएंडके में शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए विभिन्न जच्चा-बच्चा योजनाएं शुरू की गई हैं। इसमें चिकित्सा केंद्रों में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही हैं।
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शिशु मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से राज्य के जिला अस्पतालों में 15 विशेष न्यूवार्न केयर यूनिट खोले गए हैं। इसमें नवजात को सभी बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही हैं। इसके अलावा कम्युनिटी हेल्थ सेंटरों में 76 न्यूवार्न स्टेबिलाइजेशन यूनिट और विभिन्न अस्पतालों में अलग से 274 बेबी केयर कार्नर स्थापित किए गए हैं।
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इसमें शिशुओं को बेहतर चिकित्सा देने के लिए विशेष न्यू वार्न केयर यूनिट में एक शिशु विशेषज्ञ, चार डाक्टर, पांच स्टाफ नर्स, एक लैब टेक्नीशियन और एक डाटा एंट्री आपरेटर नियुक्त किया गया है। न्यू वार्न केयर यूनिटों में एफबीएनसी, नई दिल्ली से नेशनल केलोब्रेटिव सेंटरों से प्रशिक्षण प्राप्त 112 डाक्टरों और स्टाफ नर्सों की सेवाएं ली जा रही हैं।
शिशु मृत्युदर में कटौती के लिए आशा वर्करों की भूमिका भी अहम रही है। इसमें संस्थान और घर में प्रसव के लिए आशा वर्करों की सेवाएं ली जा रही हैं। रियासत में शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए करोड़ों रुपये की योजनाओं पर अमल किया जा रहा है।