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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में POK की खाली सीटों को भरना संभव नहीं
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/श्रीनगर
Updated Fri, 19 Aug 2016 10:46 AM IST
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जम्मू-कश्मीर विधानसभा
- फोटो : Amar Ujala
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जम्मू कश्मीर विधानसभा में पीओके के लिए आरक्षित 24 सीटों को भरना फिलहाल संभव नहीं है। इसे विदेशों में रहने वाले पीओके के नागरिकों से भी नहीं भरा जा सकता है। इन सीटों को भरना तभी संभव हो सकेगा जब पाकिस्तान के कब्जे से कश्मीर के हिस्से को मुक्त कराकर उसे भारत का हिस्सा बनाया जाए। उस स्थिति में भी इन सीटों को चुनाव के बाद ही भरा जा सकता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लाल किले से पीओके और बलूचिस्तान का जिक्र किए जाने के बाद से इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा नेताओं द्वारा पीओके के खाली सीटों को भरने की बात की जा रही है लेकिन संवैधानिक स्थिति बिल्कुल अलग है।
जम्मू कश्मीर कांस्टीच्यूयेंट असेम्बली में संपूर्ण कश्मीर के लिए 100 सीटें तय की गईं थीं। इनमें 75 सीटें जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के लिए तथा 25 सीटें पीओके के लिए आरक्षित की गईं।
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जम्मू कश्मीर के संविधान के अनुच्छेद 48 के तहत यह व्यवस्था की गई। बाद में जम्मू कश्मीर के संविधान में संशोधन कर जम्मू-कश्मीर के लिए सीटें 76 कर दी गईं और पीओके के लिए 24 सीटें शेष रह गईं।
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लाल किले से पीओके और बलूचिस्तान का जिक्र किए जाने के बाद से इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा नेताओं द्वारा पीओके के खाली सीटों को भरने की बात की जा रही है लेकिन संवैधानिक स्थिति बिल्कुल अलग है।
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जम्मू कश्मीर कांस्टीच्यूयेंट असेम्बली में संपूर्ण कश्मीर के लिए 100 सीटें तय की गईं थीं। इनमें 75 सीटें जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के लिए तथा 25 सीटें पीओके के लिए आरक्षित की गईं।
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जम्मू कश्मीर के संविधान के अनुच्छेद 48 के तहत यह व्यवस्था की गई। बाद में जम्मू कश्मीर के संविधान में संशोधन कर जम्मू-कश्मीर के लिए सीटें 76 कर दी गईं और पीओके के लिए 24 सीटें शेष रह गईं।
पीओके के लोगों को भारत आने के लिए लेनी होती है परमिट
पीओके
- फोटो : PTI
जम्मू कश्मीर में 1988 में डीलिमिटेशन से रियासत की सीटें 76 से बढ़कर 87 हुईं लेकिन पीओके की सीटें यथावत 24 बनी रहीं। पीओके में इस तरह का सीमांकन संभव नहीं था। 1994 में संसद ने प्रस्ताव पारित कर पीओके को हासिल करने की बात कही लेकिन इस दिशा में आगे कोई कदम नहीं उठाया गया।
वर्तमान में जम्मू कश्मीर विधानसभा के लिए 87 सीटें पर चुनाव होते हैं और दो महिलाओं को गवर्नर मनोनीत करते हैं। जम्मू कश्मीर संविधान विशेषज्ञों का कहना है कि पीओके के लिए खाली रखी गईं सीटें यह दर्शाती हैं कि हम उस हिस्सा को भारत का अंग मानते हैं लेकिन व्यवहार में पीओके के नागरिक भारत आने के लिए पाकिस्तान से परमिट लेते हैं और उनके पास पाकिस्तानी पासपोर्ट होता है।
वे जम्मू कश्मीर के स्टेट सब्जेक्ट हैं लेकिन सिर्फ उसी हालत में जब वे भारत में आकर बस जाएं। तब उन्हें देश की नागरिकता भी हासिल हो सकती है। इसके बगैर वे जम्मू कश्मीर विधानसभा के लिए न तो मनोनीत हो सकते हैं और न ही यहां के लिए चुनाव लड़ सकते हैं।
वर्तमान में जम्मू कश्मीर विधानसभा के लिए 87 सीटें पर चुनाव होते हैं और दो महिलाओं को गवर्नर मनोनीत करते हैं। जम्मू कश्मीर संविधान विशेषज्ञों का कहना है कि पीओके के लिए खाली रखी गईं सीटें यह दर्शाती हैं कि हम उस हिस्सा को भारत का अंग मानते हैं लेकिन व्यवहार में पीओके के नागरिक भारत आने के लिए पाकिस्तान से परमिट लेते हैं और उनके पास पाकिस्तानी पासपोर्ट होता है।
वे जम्मू कश्मीर के स्टेट सब्जेक्ट हैं लेकिन सिर्फ उसी हालत में जब वे भारत में आकर बस जाएं। तब उन्हें देश की नागरिकता भी हासिल हो सकती है। इसके बगैर वे जम्मू कश्मीर विधानसभा के लिए न तो मनोनीत हो सकते हैं और न ही यहां के लिए चुनाव लड़ सकते हैं।
वर्तमान स्थिति में पीओके की सीटों को नहीं भरा जा सकता
पीएम मोदी
- फोटो : ANI
संविधान विशेषज्ञ और पूर्व वरिष्ठ एडिशनल एडवोकेट जनरल बलवीर सिंह मन्हास का कहना है कि वर्तमान स्थिति में पीओके के लिए आरक्षित सीटों को किसी भी सूरत में नहीं भरा जा सकता।
अगर ऐसा कोई प्रयास होता है तो वह असंवैधानिक होगा। पीओके के नागरिक चाहे वे विदेश में हों या पीओके में, भारत के नागरिक नहीं हैं। इसलिए उनका जम्मू कश्मीर विधानसभा के लिए मनोनयन नहीं हो सकता। उनके चुनाव लड़ने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता।
अगर ऐसा कोई प्रयास होता है तो वह असंवैधानिक होगा। पीओके के नागरिक चाहे वे विदेश में हों या पीओके में, भारत के नागरिक नहीं हैं। इसलिए उनका जम्मू कश्मीर विधानसभा के लिए मनोनयन नहीं हो सकता। उनके चुनाव लड़ने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता।