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J&K: पीडीपी नेता कर्रा का बयान कहा- भाजपा ने तीन बार मुझे दिया सीएम बनने का ऑफर
एजेंसी/जम्मू
Updated Wed, 21 Dec 2016 11:16 AM IST
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पीडीपी नेता तारिक हमीद कर्रा
- फोटो : File Photo
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कश्मीर हिंसा मामले पर सरकार की विफलता का आरोप लगाकर पीडीपी और लोक सभा की सदस्यता से इस्तीफा देने वाले तारिक हमीद कर्रा ने कहा है कि भाजपा ने उन्हें तीन मर्तबा मुख्यमंत्री बनने का ऑफर दिया था।
कर्रा ने कहा मुफ्ती मोहम्मद सईद की मौत के बाद भाजपा ने उन्हें दो बार मुख्यमंत्री बनने का ऑफर दिया जबकि एक बार तो मुफ्ती मोहम्मद सईद के जीवित रहते भी ऐसा ही ऑफर दिया गया था।
कर्रा ने मीडिया से बातचीत में बिना किसी का नाम लिए कहा कि मुफ्ती मोहम्मद सईद के अस्वस्थ रहने पर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें मुख्यमंत्री बनने का ऑफर दिया था। उनका कहना था कि मुफ्ती मोहम्मद सईद अब सरकार चला पाने की स्थिति में नहीं हैं, लिहाजा उन्हें ही मुख्यमंत्री बनने के लिए आगे आना चाहिए। भाजपा के इस ऑफर को उन्होंने त्वरित रूप से खारिज कर दिया।
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कर्रा ने कहा मुफ्ती मोहम्मद सईद की मौत के बाद भाजपा ने उन्हें दो बार मुख्यमंत्री बनने का ऑफर दिया जबकि एक बार तो मुफ्ती मोहम्मद सईद के जीवित रहते भी ऐसा ही ऑफर दिया गया था।
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कर्रा ने मीडिया से बातचीत में बिना किसी का नाम लिए कहा कि मुफ्ती मोहम्मद सईद के अस्वस्थ रहने पर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें मुख्यमंत्री बनने का ऑफर दिया था। उनका कहना था कि मुफ्ती मोहम्मद सईद अब सरकार चला पाने की स्थिति में नहीं हैं, लिहाजा उन्हें ही मुख्यमंत्री बनने के लिए आगे आना चाहिए। भाजपा के इस ऑफर को उन्होंने त्वरित रूप से खारिज कर दिया।
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'आरएसएस की नीतियों के खिलाफ'
तारिक हमीद कर्रा
- फोटो : File Photo
कर्रा ने कहा उन पर जो आरोप लगाए जा रहे हैं कि सरकार में मंत्रालय न दिए जाने पर ही उन्होंने पार्टी और संसदीय सदस्यता से इस्तीफा दिया है, जबकि सच्चाई तो ये है कि उन्हाेंने मुख्यमंत्री पद के ऑफर भी ठुकरा दिए थे।
राजनीतिक विफलता के सवाल पर उन्हाेंने कहा कि उनके सामने नया सियासी दल बनाने सहित तीन विकल्प हैं, कश्मीर समस्या के हल के लिए जो भी विकल्प मुफीद होगा वे उसी पर अमल करेंगे। खासकर रियासत में भाजपा और आरएसएस की बांटने वाली नीतियों की खिलाफत करना उनकी प्राथमिकता है। अंतिम फैसला कार्यकर्ताआें से चर्चा के बाद होगा।
राजनीतिक विफलता के सवाल पर उन्हाेंने कहा कि उनके सामने नया सियासी दल बनाने सहित तीन विकल्प हैं, कश्मीर समस्या के हल के लिए जो भी विकल्प मुफीद होगा वे उसी पर अमल करेंगे। खासकर रियासत में भाजपा और आरएसएस की बांटने वाली नीतियों की खिलाफत करना उनकी प्राथमिकता है। अंतिम फैसला कार्यकर्ताआें से चर्चा के बाद होगा।