गिलानी की ‘न’ के ‘हां’ में बदलते ही सक्रिय हुई सरकार
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कश्मीर के अलगाववादी नेताओं की अचानक नजरबंदी, गिरफ्तारी और फिर रिहाई के पीछे हुर्रियत के सबसे वरिष्ठ नेता सैयद अली शाह गिलानी की पहले ‘न’ और बाद में ‘हां’ की कहानी छिपी हुई है।
दरअसल, गिलानी ने पहले भारत सरकार के आग्रह को मानते हुए पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सरताज अजीज से मिलने से मना कर दिया था।
मगर बुधवार देर रात गिलानी ने रुख में बदलाव करते हुए एनएसए स्तर की वार्ता से पहले ही सरताज के साथ बैठक के लिए तैयार हो गए।
इस आशय की सूचना मिलते ही अचानक सक्रिय हुई सरकार ने पहले से नजरबंद गिलानी पर सख्ती बढ़ाई तो अन्य अलगाववादी नेताओं को तत्काल नजरबंद कर दिया।
सरकार ने पाकिस्तान को दिया कड़ा संदेश
भारत सरकार के सूत्रों की मानें तो गिलानी ने अब सरकार को एनएसए वार्ता के बाद सोमवार शाम को सरताज अजीज से मिलने का ठोस आश्वासन दिया है। इससे पहले रविवार को अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर देर शाम एक प्रतिनिधिमंडल के साथ सरताज से बात करेंगे।
एक अन्य अलगाववादी नेता यासीन मलिक भी प्रतिनिधिमंडल भेजेंगे। सरकारी सूत्रों का कहना है कि चूंकि एनएसए वार्ता आतंकवाद पर ही केंद्रित होना तय हो गया है, इसलिए सरकार ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश देने के बाद अलगाववादी नेताओं के साथ थोड़ी रियायत बरती है।
सरकार के वरिष्ठ सूत्र के मुताबिक पहले कश्मीर मामले में पाकिस्तान को बड़ा झटका देने की तैयारी थी। गिलानी सरकार का सरताज से मिलने से मना करने का प्रस्ताव स्वीकार कर चुके थे।
अगर गिलानी अपने वादे पर कायम रहते तो इस मुद्दे पर पाकिस्तान की किरकिरी तय थी। भारत इस बार वार्ता से पीछे हट कर वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की चाल को कामयाब नहीं होने देना चाहता।