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बेटी का वर ढूंढते-ढूंढते ‘हंगामा हो गया’
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Sun, 19 Oct 2014 10:10 PM IST
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एक अमीर बाप की ओर से अपनी बेटी के लिए सुयोग्य वर ढूंढने की प्रक्रिया के दौरान हास्यास्पद परिस्थितियों से गुजरने की स्थिति को नटरंग के कलाकारों ने बड़ी बखूबी से निभाया। नटरंग ने रविवार संस्करण के तहत अशोक मिश्रा के लिखे और नीरजकांत के निर्देशन में नाटक ‘हंगामा हो गया’ का मंचन किया गया।
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नाटक की कहानी एक अमीर व्यक्ति छग्गू मल के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी बेटी के लिए सुयोग्य वर की तलाश कर रहा होता है। नाटक में अमीर व्यक्ति एक अखबार में शादी से जुड़ा अपनी शर्तों पर आधारित विज्ञापन देता है। इस विज्ञापन को पढ़कर काफी संख्या में लड़के छग्गू मल के घर में इंटरव्यू देने के लिए पहुंचने लगते हैं।
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इस मौके पर शादी के प्रपोजल से आने वाले ज्यादातर युवाओं के चेहरे और हावभाव में लालच की प्रवृत्ति साफ देखने को मिल रही होती है। इस तरह की स्थिति में सभी कलाकार हास्यास्पद माहौल बना देते हैं। नाटक में मोड़ तब आता है, जब छग्गू मल की बेटी चिट्ठी के माध्यम से अपने पिता को जानकारी देती है कि उसने अपना जीवन साथी चुन लिया है और वह उसी से ही शादी करेगी।
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नाटक में सचिन बांबा, शेखर शर्मा, सुशील रैना, अरुण शर्मा, अभिशेक खजूरिया, रविंद्र मन्हास और अन्य कलाकारों ने मुख्य भूमिकायें निभायी।