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जम्मू में फुस्स हो सकता है मोदी का महत्वाकांक्षी अभियान

Thu, 02 Oct 2014 01:53 AM IST
Updated Thu, 02 Oct 2014 01:53 AM IST
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How do sanitation without sweepers

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से दो अक्तूबर को स्वच्छता अभियान शुरू करने के ऐलान के बाद सरकारी और गैर सरकारी विभाग भी अभियान चलाने के लिए कमर कस चुके हैं।

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हालांकि नगर निगम ने वीरवार को शहर के पांच अलग-अलग केंद्र से सफाई शुरू करने की योजना बनाई है, लेकिन देखना यह है कि यह योजना सफाई कर्मियों के कम स्टाफ में भी कितनी कारगर रहती है।
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वर्तमान में नगर निगम के पास मात्र 709 सफाई कर्मचारी हैं। इसके अलावा एनजीओ के सफाई कर्मियों की मदद ली जा रही है। इस तरह से देखा जाए तो मंदिरों के शहर में 7000 सफाई कर्मियों की जरूरत है।
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सात हजार की जगह 7 सौ से चल रहा काम

How do sanitation without sweepers

ऐसा नहीं होने के कारण सड़कों पर गंदगी बिखरी नजर आती है। नगर निगम की हद 112 स्क्वेयर किलोमीटर तक फैली है, जिसमें 71 वार्ड हैं और शहर की आबादी पंद्रह लाख से अधिक है।

कुंजवानी से अशोक नगर, सिटी से पाटा बोहड़ी, सिटी से पंजतीर्थी, सिटी से सिद्दड़ा और सिटी से बनतालाब तक नगर निगम की सीमा है। पक्के 922 कर्मचारी हैं, इनमें से मात्र 709 ही फील्ड में काम करते हैं, जिस कारण शहर की गंदगी साफ करना सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।

नगर निगम एनजीओ के 1099 कर्मचारियों की मदद ले रहा है, जिन्हें शहर की गंदगी साफ करने की एवज में नाममात्र की वेतन मिलता है। जिसमें से ठेकेदार अपनी कमीशन काट लेता है।

अधिकतर पक्के मुलाजिम पुराने शहर में

How do sanitation without sweepers

नगर निगम के अधिकतर पक्के मुलाजिम पुराने शहर में लगाए गए हैं, जिनकी संख्या भी काफी है लेकिन पुराने मकान साथ-साथ होने के कारण साफ-सफाई करने तथा कचरा लिफ्ट करने में ज्यादा परेशानी नहीं होती है।

ऐसे हालात में सड़क और बाजारों में कचरा बिखरना लाजमी है। लोग सफाई अच्छे से नहीं होने का आरोप लगाते हैं तो निगम अधिकारी गंदगी के लिए लोगों को जिम्मेदार ठहराते हैं।

ऐसी परिस्थितियों में स्वच्छता अभियान के सामने कई चुनौती है। हालांकि नगर निगम ने वीरवार से सफाई अभियान शुरू करने के लिए कमर कस ली है लेकि न स्टाफ कम होने के कारण अभियान भी चुनौती बना हुआ है।

यूजर्स चार्जेज लेना बना चुनौती

How do sanitation without sweepers

नगर निगम में सफाई व्यवस्था को बहाल रखने के लिए घरों में पचास से सौ रुपये यूजर्स चार्जेज लगाया था लेकिन लोगों से पैसे इकट्ठा करना सबसे बड़ी चुनौती बन रहा है। अधिकतर लोग पैसे देने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं।
 
वहीं नगर निगम के हेल्थ अफसर डा. मोहम्मद सलीम खान कहते हैं कि लोगों को खुद जागरूक होने की जरूरत है। रास्ते और बाजार फल आदि कोई भी चीज खाने के बाद सड़क पर न फेंके।

लोग अपने घरों में डस्टबिन लगाएं। दुकानदार भी कचरा सड़क पर न फेंककर कलेक्शन प्वाइंट तक पहुंचाएं। इन सब के बाद ही स्वच्छता अभियान कारगर साबित हो सकता है।

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