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Jammu News: सदन पर डेढ़ लाख खर्च और परिणाम शून्य - चार माह 23 दिन बाद शहर को मिला सिर्फ हंगामा, बहसबाजी में दब गए मुद्दे
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। 4 माह 23 दिन बाद एक दिन का सदन हंगामे की भेंट चढ़ गया। विकास पर चर्चा के बजाय बहसबाजी चर्चा का विषय बन गई। विपक्ष-पक्ष आमने-सामने होने के कारण जनसमस्याएं ऊंची आवाज के आगे दब गईं। इतने लंबे समय के बाद शहर को सिर्फ एक सियासी मुद्दा मिला। वह है-एक कटाक्ष, जिस पर कांग्रेस, निर्दलीय के साथ-साथ भाजपा पार्षद उलझ गए। बैठक में डेढ़ लाख रुपये खर्च आने के बावजूद परिणाम शून्य रहा। इससे साफ है कि जनप्रतिनिधि लोगों की समस्याओं को लेकर कितने संजीदा हैं।
हुआ यूं कि जैसे ही सुबह साढ़े 11 बजे बैठक शुरू हुई तो पार्षदों ने देरी से सदन लगाने का कारण पूछा। इस पर संतोषजक जवाब नहीं मिला। इसी बीच निर्दलीय पार्षद प्रो. युद्धवीर सिंह ने कटाक्ष किया कि निगम में लोकतंत्र की धज्जियां उड़ रही हैं। पार्षदों की आवाज को दबाया जा रहा है। इससे पीएम को शर्मसार होना पड़ रहा है। इस बात पर माहौल गरमा गया। सत्तापक्ष की ओर से जवाब दिया गया तो विपक्ष सवाल पर अड़ा रहा और दोपहर 12 बजे वॉकआउट कर दिया। ऐसे में न प्रस्तावोंं और न ही प्रश्नों पर मंथन हो पाया।
दोपहर तीन बजे तक सदन ठप रहा। निर्दलीय और कांग्रेस पार्षदों ने टाउन हाल के बाहर नारेबाजी कर मांगों को दोहराया। पार्षदों का कहना है कि लोगों के हित के लिए आवाज उठाई, पर प्रस्तावों को हटा दिया गया। नगर निगम हाय-हाय के नारे लगाकर पार्षद घर चले गए। 14 प्रस्तावों पर मंथन के लिए तीन बजे के बाद दूसरा सत्र शुरू हुआ। भाजपा के 44 में 34 ही पार्षद रह गए। ऐसे में पार्किंग और उपनियमों पर विशेष सत्र चलाया गया। यानी समय ही बर्बाद हुआ।
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30 मिनट में बस यही हुआ...
नेता विपक्ष द्वारका चौधरी ने प्रॉपर्टी टैक्स का प्रस्ताव हटाने का कारण पूछा। इस पर विपक्ष एकमत हुआ, पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला। पार्षद भानू महाजन ने कहा- बिजली, पानी, नाले-नालियों की समस्याएं उठा रहे हैं, पर समाधान नहीं हो रहा। ऐसे में बैठक का क्या फायदा। इस पर लॉ अधिकारी की ओर से प्रस्तावों पर विस्तृत जानकारी दी। साथ ही बताया कि मंथन हो सकता है और इन्हें सरकार के पास भेजा जा सकता है। इस पर विपक्ष ने खूब तंज कसे। द्वारका चौधरी ने कहा कि पहले ही बता दो, कौन से प्रस्ताव रखने है। इससे समय बच जाएगा। इसके बाद प्रीतम सिंह और रितू ने सीटें छोड़ दीं। मेयर राजेंद्र शर्मा ने समझाने का प्रयास किया, मगर पार्षद माने नहीं। मेयर ने कहा कि नियम का उल्लंघन नहीं किया है। जो प्रस्ताव पास किए जा सकते हैं, उन्हें ही मंथन के लिए रखा है।
बिना विपक्ष का विशेष सत्र - उपनियम का होगा पालन, पार्किंग बनाकर बढ़ाएंगे आय
बिना विपक्ष की बैठक में पार्किंग के हल पर सुझाव दिए गए। मेयर ने कहा कि सड़कों के पास पार्किंग का निर्माण किया जा सकता है। इससे निगम को आय होगी। इस पर पार्षदों ने सुझाव दिए। अनिल मसूम ने कहा कि परेड के पास नगर निगम बहुमंजिला पार्किंग का निर्माण कर सकता है। इससे साथ लगते बाजार में जाम नहीं लगेगा। इसी तरह पुराने शहर में नई बनने वाली दुकानों और पुरानी दुकानों को किस तरह से व्यवस्थित करना है पर सहमति मांगी गई। पार्षदों ने कहा कि पुरानी दुकानों को कॉमर्शियल दायरे में लाया जाए। इसके अलावा गांधी नगर, शास्त्री नगर सहित अन्य जगहों में पार्किंग बनाने पर सहमति बनी। पूर्व मेयर चंद्र मोहन गुप्ता ने कहा कि शहर को व्यवस्थित करना अहम काम है। ऐसे में पहले उपनियमों के हिसाब से काम हो। जवाब में मेयर बोले- नगर निगम उपनियमों के अनुसार ही काम करेगा।
इन पर चर्चा थी प्रस्तावित
पूर्व डिप्टी मेयर पूर्णिमा शर्मा : पद्मश्री अवार्डी को नगर निगम में हर सुविधा देने के लिए प्रस्ताव रखना था।
पार्षद पवन और मोनिका : बुढ़ापा पेंशन की अदायगी के लिए प्रस्ताव लाना था।
पार्षद अमित गुप्ता : रेहड़ी धारकों को लाइसेंस देने के लिए प्रस्ताव लेकर आए थे।
पार्षद निधि मंगोत्रा : शहर में रात को भी दुकानें खोलने का प्रस्ताव सदन में रखना था।
पार्षद प्रीतम चंद : कुंजवानी में अतिक्रमण को हटाने पर प्रस्ताव रखने वाले थे।
बारिश होने पर जलभराव की समस्या, बिजली-पानी, सड़कों, वाटर कूलर, सफाई जैसे मसलों पर भी मंथन किया जाना था।
इधर कार्रवाई : हंगामे के बाद 72 में से 14 आजाद, 16 कांग्रेस और 10 भाजपा के पार्षद घर चले गए। वहीं, नगर निगम एक्ट 2000 की धारा 59 के तहत सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाने पर पार्षद प्रो. युद्धवीर सिंह को एक दिन के लिए निलंबित कर दिया गया।
प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया
जम्मू। मेयर राजेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि पार्षद प्रो. युद्धवीर सिंह ने प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया। इसके लिए उन्हें एक दिन के लिए निष्कासित किया गया। पीएम ने कोविड-19 के दौरान करोड़ों भारतीयों और दुनिया भर के अन्य लोगों को बचाने का काम किया। प्रो. सिंह ने उस महान व्यक्ति के खिलाफ अपशब्द बोले जिसने गरीबों के दरवाजे पर भोजन उपलब्ध कराया और मदद के लिए बैंक खातों में रुपये डाले। इसके लिए उन्हें माफ नहीं किया जा सकता। मेयर ने कहा कि सदन में इंस्पेक्टर राज को समाप्त करने वाले प्रस्तावों पर चर्चा और पारित करना था, लेकिन विपक्ष ऐसा नहीं चाहता था, शांति भंग की गई। ब्यूरो
भाजपा पार्षदों ने तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया : भल्ला
जम्मू। कांग्रेस के कार्यवाहक अध्यक्ष रमण भल्ला ने सदन की बैठक में शोर शराबा करने के लिए भाजपा पार्षदों की आलोचना की। उन्होंने पार्षद प्रो. युद्धवीर सिंह को अपनी बात रखने पर मार्शलों को बुलाने और विपक्ष को वॉकआउट करने में मजबूर करने पर मेयर की निंदा की। भाजपा पार्षदों पर तथ्यों को तोड़ मरोड़कर पेश करने और सदन की पवित्रता को कम करने का आरोप लगाया। कहा कि किसी ने भी प्रधानमंत्री के खिलाफ नहीं बोला। प्रो. सिंह ने संपत्ति कर, स्मार्ट बिजली मीटर, भारी बिजली बिल, बिजली कटौती, शहर में अपर्याप्त पानी जैसे जनहित प्रस्ताव अस्वीकृत होने पर सवाल उठाए थे। ब्यूरो
बैठक का क्या फायदा है, जब लोगों की बात नहीं सुनी जाएगी। प्रॉपर्टी टैक्स मसले पर प्रस्ताव को बाहर कर दिया। ऐसे में वॉकआउट किया गया।
- द्वारका चौधरी, नेता विपक्ष
कई प्रस्ताव गायब हैं। पार्षद जानकारी मांग रहे हैं तो सदन नहीं दे रहा। ऐसे में हाउस में बैठने का क्या मतलब।
- गौरव चोपड़ा, नेता विपक्ष
सदन में बात नहीं सुनी गई। इस कारण वॉकआउट किया। कुछ पार्षदों के प्रस्तावों को ही तव्वजो दी जा रही है।
- रितू चौधरी, पार्षद
निर्दलीय और कांग्रेस पार्षदों को मनाने की कोशिश की थी। हाउस चलना चाहिए था। चार माह बाद सदन की बैठक बुलाई थी।
- राजेंद्र शर्मा, मेयर
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जम्मू। 4 माह 23 दिन बाद एक दिन का सदन हंगामे की भेंट चढ़ गया। विकास पर चर्चा के बजाय बहसबाजी चर्चा का विषय बन गई। विपक्ष-पक्ष आमने-सामने होने के कारण जनसमस्याएं ऊंची आवाज के आगे दब गईं। इतने लंबे समय के बाद शहर को सिर्फ एक सियासी मुद्दा मिला। वह है-एक कटाक्ष, जिस पर कांग्रेस, निर्दलीय के साथ-साथ भाजपा पार्षद उलझ गए। बैठक में डेढ़ लाख रुपये खर्च आने के बावजूद परिणाम शून्य रहा। इससे साफ है कि जनप्रतिनिधि लोगों की समस्याओं को लेकर कितने संजीदा हैं।
हुआ यूं कि जैसे ही सुबह साढ़े 11 बजे बैठक शुरू हुई तो पार्षदों ने देरी से सदन लगाने का कारण पूछा। इस पर संतोषजक जवाब नहीं मिला। इसी बीच निर्दलीय पार्षद प्रो. युद्धवीर सिंह ने कटाक्ष किया कि निगम में लोकतंत्र की धज्जियां उड़ रही हैं। पार्षदों की आवाज को दबाया जा रहा है। इससे पीएम को शर्मसार होना पड़ रहा है। इस बात पर माहौल गरमा गया। सत्तापक्ष की ओर से जवाब दिया गया तो विपक्ष सवाल पर अड़ा रहा और दोपहर 12 बजे वॉकआउट कर दिया। ऐसे में न प्रस्तावोंं और न ही प्रश्नों पर मंथन हो पाया।
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दोपहर तीन बजे तक सदन ठप रहा। निर्दलीय और कांग्रेस पार्षदों ने टाउन हाल के बाहर नारेबाजी कर मांगों को दोहराया। पार्षदों का कहना है कि लोगों के हित के लिए आवाज उठाई, पर प्रस्तावों को हटा दिया गया। नगर निगम हाय-हाय के नारे लगाकर पार्षद घर चले गए। 14 प्रस्तावों पर मंथन के लिए तीन बजे के बाद दूसरा सत्र शुरू हुआ। भाजपा के 44 में 34 ही पार्षद रह गए। ऐसे में पार्किंग और उपनियमों पर विशेष सत्र चलाया गया। यानी समय ही बर्बाद हुआ।
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नेता विपक्ष द्वारका चौधरी ने प्रॉपर्टी टैक्स का प्रस्ताव हटाने का कारण पूछा। इस पर विपक्ष एकमत हुआ, पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला। पार्षद भानू महाजन ने कहा- बिजली, पानी, नाले-नालियों की समस्याएं उठा रहे हैं, पर समाधान नहीं हो रहा। ऐसे में बैठक का क्या फायदा। इस पर लॉ अधिकारी की ओर से प्रस्तावों पर विस्तृत जानकारी दी। साथ ही बताया कि मंथन हो सकता है और इन्हें सरकार के पास भेजा जा सकता है। इस पर विपक्ष ने खूब तंज कसे। द्वारका चौधरी ने कहा कि पहले ही बता दो, कौन से प्रस्ताव रखने है। इससे समय बच जाएगा। इसके बाद प्रीतम सिंह और रितू ने सीटें छोड़ दीं। मेयर राजेंद्र शर्मा ने समझाने का प्रयास किया, मगर पार्षद माने नहीं। मेयर ने कहा कि नियम का उल्लंघन नहीं किया है। जो प्रस्ताव पास किए जा सकते हैं, उन्हें ही मंथन के लिए रखा है।
बिना विपक्ष का विशेष सत्र - उपनियम का होगा पालन, पार्किंग बनाकर बढ़ाएंगे आय
बिना विपक्ष की बैठक में पार्किंग के हल पर सुझाव दिए गए। मेयर ने कहा कि सड़कों के पास पार्किंग का निर्माण किया जा सकता है। इससे निगम को आय होगी। इस पर पार्षदों ने सुझाव दिए। अनिल मसूम ने कहा कि परेड के पास नगर निगम बहुमंजिला पार्किंग का निर्माण कर सकता है। इससे साथ लगते बाजार में जाम नहीं लगेगा। इसी तरह पुराने शहर में नई बनने वाली दुकानों और पुरानी दुकानों को किस तरह से व्यवस्थित करना है पर सहमति मांगी गई। पार्षदों ने कहा कि पुरानी दुकानों को कॉमर्शियल दायरे में लाया जाए। इसके अलावा गांधी नगर, शास्त्री नगर सहित अन्य जगहों में पार्किंग बनाने पर सहमति बनी। पूर्व मेयर चंद्र मोहन गुप्ता ने कहा कि शहर को व्यवस्थित करना अहम काम है। ऐसे में पहले उपनियमों के हिसाब से काम हो। जवाब में मेयर बोले- नगर निगम उपनियमों के अनुसार ही काम करेगा।
इन पर चर्चा थी प्रस्तावित
पूर्व डिप्टी मेयर पूर्णिमा शर्मा : पद्मश्री अवार्डी को नगर निगम में हर सुविधा देने के लिए प्रस्ताव रखना था।
पार्षद पवन और मोनिका : बुढ़ापा पेंशन की अदायगी के लिए प्रस्ताव लाना था।
पार्षद अमित गुप्ता : रेहड़ी धारकों को लाइसेंस देने के लिए प्रस्ताव लेकर आए थे।
पार्षद निधि मंगोत्रा : शहर में रात को भी दुकानें खोलने का प्रस्ताव सदन में रखना था।
पार्षद प्रीतम चंद : कुंजवानी में अतिक्रमण को हटाने पर प्रस्ताव रखने वाले थे।
बारिश होने पर जलभराव की समस्या, बिजली-पानी, सड़कों, वाटर कूलर, सफाई जैसे मसलों पर भी मंथन किया जाना था।
इधर कार्रवाई : हंगामे के बाद 72 में से 14 आजाद, 16 कांग्रेस और 10 भाजपा के पार्षद घर चले गए। वहीं, नगर निगम एक्ट 2000 की धारा 59 के तहत सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाने पर पार्षद प्रो. युद्धवीर सिंह को एक दिन के लिए निलंबित कर दिया गया।
प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया
जम्मू। मेयर राजेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि पार्षद प्रो. युद्धवीर सिंह ने प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया। इसके लिए उन्हें एक दिन के लिए निष्कासित किया गया। पीएम ने कोविड-19 के दौरान करोड़ों भारतीयों और दुनिया भर के अन्य लोगों को बचाने का काम किया। प्रो. सिंह ने उस महान व्यक्ति के खिलाफ अपशब्द बोले जिसने गरीबों के दरवाजे पर भोजन उपलब्ध कराया और मदद के लिए बैंक खातों में रुपये डाले। इसके लिए उन्हें माफ नहीं किया जा सकता। मेयर ने कहा कि सदन में इंस्पेक्टर राज को समाप्त करने वाले प्रस्तावों पर चर्चा और पारित करना था, लेकिन विपक्ष ऐसा नहीं चाहता था, शांति भंग की गई। ब्यूरो
भाजपा पार्षदों ने तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया : भल्ला
जम्मू। कांग्रेस के कार्यवाहक अध्यक्ष रमण भल्ला ने सदन की बैठक में शोर शराबा करने के लिए भाजपा पार्षदों की आलोचना की। उन्होंने पार्षद प्रो. युद्धवीर सिंह को अपनी बात रखने पर मार्शलों को बुलाने और विपक्ष को वॉकआउट करने में मजबूर करने पर मेयर की निंदा की। भाजपा पार्षदों पर तथ्यों को तोड़ मरोड़कर पेश करने और सदन की पवित्रता को कम करने का आरोप लगाया। कहा कि किसी ने भी प्रधानमंत्री के खिलाफ नहीं बोला। प्रो. सिंह ने संपत्ति कर, स्मार्ट बिजली मीटर, भारी बिजली बिल, बिजली कटौती, शहर में अपर्याप्त पानी जैसे जनहित प्रस्ताव अस्वीकृत होने पर सवाल उठाए थे। ब्यूरो
बैठक का क्या फायदा है, जब लोगों की बात नहीं सुनी जाएगी। प्रॉपर्टी टैक्स मसले पर प्रस्ताव को बाहर कर दिया। ऐसे में वॉकआउट किया गया।
- द्वारका चौधरी, नेता विपक्ष
कई प्रस्ताव गायब हैं। पार्षद जानकारी मांग रहे हैं तो सदन नहीं दे रहा। ऐसे में हाउस में बैठने का क्या मतलब।
- गौरव चोपड़ा, नेता विपक्ष
सदन में बात नहीं सुनी गई। इस कारण वॉकआउट किया। कुछ पार्षदों के प्रस्तावों को ही तव्वजो दी जा रही है।
- रितू चौधरी, पार्षद
निर्दलीय और कांग्रेस पार्षदों को मनाने की कोशिश की थी। हाउस चलना चाहिए था। चार माह बाद सदन की बैठक बुलाई थी।
- राजेंद्र शर्मा, मेयर