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जम्मू-कश्मीरः नेताओं की नजरबंदी ने भी अटकाए पंचायत उपचुनाव में रोड़े, अगली अधिसूचना का इंतजार

Thu, 20 Feb 2020 03:55 PM IST
प्रशांत कुमार संजीव दुबे, जम्मू
संजीव दुबे, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Thu, 20 Feb 2020 03:55 PM IST
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house arrest of leaders hindered panchayat byelection in Jammu Kashmir
महबूबा मुफ्ती, उमर अब्दुल्ला - फोटो : अमर उजाला

प्रदेश में पंचायत उपचुनाव की राह में सियासी नेताओं की नजरबंदी भी बड़ा रोड़ा साबित हुई। प्रमुख दल नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी के अध्यक्षों समेत कई पदाधिकारी नजरबंद हैं। उप चुनाव पार्टी आधार पर कराने के घोषणा हुई थी जबकि उम्मीदवाराें की चयन सूची और नामांकन पत्र पर अध्यक्ष या सचिव के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं।

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ऐसी सूरत में उप चुनाव को अदालत में चुनौती मिल सकती थी। उप चुनाव स्थगित करने के पीछे यह एक बड़ी वजह रही है। माना जा रहा है कि उप चुनाव की अगली तिथियां घोषित करते समय उप चुनाव को पार्टी चिह्न पर कराने के एलान से परहेज किया जा सकता है।
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2018 में जम्मू कश्मीर में हुए पंचायत चुनाव में 33592 पंचों और 4290 सरपंचों में 22214 पंच और 3459 सरपंचों का गैर राजनीतिक आधार पर चुनाव हुआ था। ऐसे में रिक्त सीटों पर उप चुनाव को पार्टी आधार पर करवाए जाने पर भी सवाल खड़े हो गए।
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कुछ दल इस फैसले के खिलाफ अदालत का दरवाजा भी खटखटाने की तैयारी कर रहे थे। जम्मू कश्मीर चुनाव विभाग के उच्च पदस्थ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि राजनीतिक पार्टियों के लिए उम्मीदवारों के चयन और नामांकन फार्म में अध्यक्ष या सचिव के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं।

राजनीतिक पार्टियों को स्वतंत्र माहौल देना जरूरी है- पीडीपी

वर्तमान में नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला और पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती दोनों नजरबंद हैं। इन दोनों पार्टियों के लिए उम्मीदवारों के चयन और नामांकन की प्रक्रिया में दिक्कतें आ रही थीं। इस तकनीकी खामी से सरकार और निर्वाचन विभाग के लिए भी मुश्किल हो सकती थी। हालांकि प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी शैलेंद्र कुमार और प्रदेश सरकार की ओर से सुरक्षा को ही पंचायत उप चुनाव के स्थगित होने का प्रमुख कारण बताया है।

 

राजनीतिक पार्टियों को स्वतंत्र माहौल देना जरूरी है। यह स्वतंत्रता चुनाव से भी ज्यादा जरूरी है। इसके लिए नजरबंद या जेलों में बंद राजनीतिक नेताओं को रिहा किया जाना चाहिए। सियासी मतभेदों को राष्ट्र द्रोह नहीं माना जा सकता। सरकार एक तरफ विदेशी राजनयिकों को जम्मू-कश्मीर बुलाकर कानून व्यवस्था को साजगार बता रही है तो दूसरी ओर सुरक्षा कारणों का हवाला देकर चुनाव स्थगित कर रही है।
- फिरदोस टाक, पूर्व एमएलसी और प्रवक्ता पीडीपी

नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष डा. फारूक अब्दुल्ला से लेकर उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला तक चार अगस्त 2019 से नजरबंद हैं। पार्टी में चुनाव लड़ाने के लिए उम्मीदवारों का चयन और नामांकन फार्म भरवाने की प्रक्रिया को अंजाम नहीं दिया जा सकता। चुनाव विभाग और सीईओ के समक्ष मसले को जोरदार तरीके से रखा गया। विपक्ष का दबाव काम आया।
- रतन लाल गुप्ता, नेकां के केंद्रीय सचिव

सुरक्षा कारणों से उप चुनाव कुछ देर के लिए स्थगित हुए हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने बाकायदा इनपुट दिए थे। फैसले का गलत मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए। नई अधिसूचना जारी होते ही भाजपा पुरजोर तरीके से उप चुनाव लड़ेगी। भाजपा जमीनी स्तर पर लोकतंत्र की मजबूती चाहती है। इसके लिए सभी दलाें को मिलकर काम करना चाहिए।
- रवींद्र रैना, भाजपा अध्यक्ष जम्मू कश्मीर, लद्दाख

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