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आपसी खींचतान से एमसीएच का थमा विस्तार
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जम्मू। स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग की आपसी खींचतान से दो सौ बिस्तर वाले एमसीएच (जच्चा-बच्चा अस्पताल) अस्पताल गांधीनगर का विस्तार नहीं हो पाया है। अस्पताल को अपने अधीन लेने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से जोड़तोड़ की जा रही है। वर्तमान में यह अस्पताल जीएमसी जम्मू के अधीन है। अस्पताल को चलाने के लिए स्टाफ के तीन सौ पद सृजित किए गए थे, जिनमें से चिकित्सा अधीक्षक और इक्का-दुक्का कर्मियों को छोड़कर कोई नई तैनाती नहीं हो पाई है। स्टाफ की कमी से मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
एमसीएच में चार आपरेशन थियेटर, चार लेबर रूम, 14 बिस्तर इमरजेंसी, मातृ आईसीयू और निकू-पीकू के अलावा अन्य चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं। अस्पताल में कोई स्थायी मेडिकल अफसर (डाक्टर) की नियुक्ति नहीं होने के कारण एसएमजीएस अस्पताल से कुछ रजिस्ट्रार और पीजी डॉक्टर को लाकर काम चलाया जा रहा है। सुविधाओं के विस्तार के लिए अलग से कोई बजट मंजूर नहीं हुआ है, जिससे कई सालों से अस्पताल का विस्तार नहीं हो पाया है। कोविड की तीन लहरों के दौरान एमसीएच को पूरी तरह से महामारी पर समर्पित कर दिया गया। लेकिन हालात सामान्य होने पर कोविड और गैर कोविड दोनों मरीजों को सुविधाएं दी जा रही हैं। लेकिन अपर्याप्त स्टाफ और बजट की कमी से काम चलाने में दिक्कत हो रही है।
सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं के बुनियादी ढांचे के विस्तार पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन ऐसे प्रतिष्ठित संस्थानों को चलाने के लिए डाक्टरों, पैरा मेडिकल और अन्य दूसरे स्टाफ की उचित व्यवस्था नहीं कर पाई है। स्वास्थ्य विभाग का तर्क है कि अगर उसके अधीन एमसीएच आ जाता है तो वह इसे चला लेंगे, जबकि जीएमसी जम्मू इसे अभी छोड़ने के मूड में नहीं है। इन परिस्थितियों में अस्पताल का विस्तार नहीं होने से मरीजों को नुकसान हो रहा है। अस्पताल को अधीन लेने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ दो बैठकें हुई हैं, जो बेनतीजा रही हैं।
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बन सकता है मजबूत रेफरल अस्पताल
अगर एमसीएच अस्पताल को विभाग के अधीन दिया जाता है तो यह मजबूत रेफरल अस्पताल बन सकता है। इसमें संभाग के दस जिलों से रेफर होने वाले मरीजों को एक ही जगह उचित चिकित्सा सुविधाएं दी जा सकती हैं। इससे जीएमसी जम्मू सहित अन्य एसोसिएटेड अस्पतालों पर गंभीर मरीजों का लोड कम होगा।
डॉ. सलीम उर रहमान, स्वास्थ्य निदेशक जम्मू (डीजी)
उपलब्ध करवाया जा रहा स्टॉफ
एमसीएच अस्पताल में स्टाफ की उपलब्धता की जा रही है। इसके लिए भर्ती एजेंसी को पद रेफर किए गए हैं। अस्पताल में पर्याप्त स्टाफ की उपलब्धता को सुनिश्चित बनाने के उचित प्रयास किए जा रहे हैं।
- डॉ. शशि सूदन, प्रिंसिपल, जीएमसी जम्मू
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एमसीएच में चार आपरेशन थियेटर, चार लेबर रूम, 14 बिस्तर इमरजेंसी, मातृ आईसीयू और निकू-पीकू के अलावा अन्य चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं। अस्पताल में कोई स्थायी मेडिकल अफसर (डाक्टर) की नियुक्ति नहीं होने के कारण एसएमजीएस अस्पताल से कुछ रजिस्ट्रार और पीजी डॉक्टर को लाकर काम चलाया जा रहा है। सुविधाओं के विस्तार के लिए अलग से कोई बजट मंजूर नहीं हुआ है, जिससे कई सालों से अस्पताल का विस्तार नहीं हो पाया है। कोविड की तीन लहरों के दौरान एमसीएच को पूरी तरह से महामारी पर समर्पित कर दिया गया। लेकिन हालात सामान्य होने पर कोविड और गैर कोविड दोनों मरीजों को सुविधाएं दी जा रही हैं। लेकिन अपर्याप्त स्टाफ और बजट की कमी से काम चलाने में दिक्कत हो रही है।
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सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं के बुनियादी ढांचे के विस्तार पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन ऐसे प्रतिष्ठित संस्थानों को चलाने के लिए डाक्टरों, पैरा मेडिकल और अन्य दूसरे स्टाफ की उचित व्यवस्था नहीं कर पाई है। स्वास्थ्य विभाग का तर्क है कि अगर उसके अधीन एमसीएच आ जाता है तो वह इसे चला लेंगे, जबकि जीएमसी जम्मू इसे अभी छोड़ने के मूड में नहीं है। इन परिस्थितियों में अस्पताल का विस्तार नहीं होने से मरीजों को नुकसान हो रहा है। अस्पताल को अधीन लेने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ दो बैठकें हुई हैं, जो बेनतीजा रही हैं।
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बन सकता है मजबूत रेफरल अस्पताल
अगर एमसीएच अस्पताल को विभाग के अधीन दिया जाता है तो यह मजबूत रेफरल अस्पताल बन सकता है। इसमें संभाग के दस जिलों से रेफर होने वाले मरीजों को एक ही जगह उचित चिकित्सा सुविधाएं दी जा सकती हैं। इससे जीएमसी जम्मू सहित अन्य एसोसिएटेड अस्पतालों पर गंभीर मरीजों का लोड कम होगा।
डॉ. सलीम उर रहमान, स्वास्थ्य निदेशक जम्मू (डीजी)
उपलब्ध करवाया जा रहा स्टॉफ
एमसीएच अस्पताल में स्टाफ की उपलब्धता की जा रही है। इसके लिए भर्ती एजेंसी को पद रेफर किए गए हैं। अस्पताल में पर्याप्त स्टाफ की उपलब्धता को सुनिश्चित बनाने के उचित प्रयास किए जा रहे हैं।
- डॉ. शशि सूदन, प्रिंसिपल, जीएमसी जम्मू