{"_id":"62324b9ad699c715df68baf6","slug":"holi-jammu-city-news-jmu255912314","type":"story","status":"publish","title_hn":"मंदिरों के शहर में उड़ेगा मथुरा और वृंदावन का गुलाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मंदिरों के शहर में उड़ेगा मथुरा और वृंदावन का गुलाल
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जम्मू। कोरोना के चलते दो साल बाद पाबंदियों में छूट और मामलों में कमी होने पर रंगों का त्योहार इस बार मंदिरों के शहर में धूमधाम से मनाया जाएगा। त्योहार को लेकर शहरवासियों में काफी उत्साह है। वहीं, इस बार मथुरा और वृंदावन से रंग और गुलाल मंगवा कर रंगने की तैयारी है। भरैव मंदिर सहित चौक को फूलों से भव्य रूप से सजाया गया है।
होली के लिए शहरवासियों ने विशेष तैयारी की है। युवाओं ने तो रंग और गुलाल उड़ाना भी शुरू कर दिया है। स्कूलों और कॉलेजों में युवा होली मनाते दिखाई दे रहे हैं। बुधवार को जम्मू विश्वविद्यालय में बाइक सवार युवाओं की टोलियों खूब होली खेली है। त्योहार पर जम्मू यूनिवर्सिटी में विशेष कार्यक्रम होगा, जिसमें विद्यार्थी और प्रबंधन के लोग शामिल होंगे। इसके बाद होलिका दहन भी किया जाएगा। भैरव चौक स्थित भैरव मंदिर में होली का पर्व मनाया जाएगा, जिसके लिए चौक सहित मंदिर को रंगबिरंगे फूलों और लाइट से सजाया जा रहा है। मंदिर के महंत रुमिल शर्मा ने बताया कि होली के दिन मथुरा और वृंदावन से मंगवाए रंग और गुलाल के स्टाल लगाए जाएंगे।
आज शाम 6:34 से होलिका दहन का शुभ मुहूर्त
होली का पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। मंहत रोहित शास्त्री के अनुसार इस वर्ष होली 18 मार्च को मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि का आरंभ 17 मार्च गुरुवार दोपहर डेढ़ पर होगा, जो 18 मार्च दोपहर 12: 48 बजे तक रहेगी। ऐसे में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 17 मार्च को शाम 6:34 बजे से लेकर रात्रि 8:57 तक है।
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इसलिए किया जाता है होलिका दहन
महंत रोहित शास्त्री के अनुसार हिरण्यकश्यप नामक एक राक्षस था, प्रहलाद नामक पुत्र था। वह भगवान विष्णु का बड़ा भक्त था, लेकिन हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु का घोर विरोधी था। वह नहीं चाहता था कोई उसके राज्य में भगवान विष्णु की पूजा करे। वह अपने पुत्र को मारने का कई बार प्रयास कर चुका था। तब हिरण्यकश्यप ने भक्त प्रहलाद को मारने के लिए लिए अपनी बहन होलिका को भेजा, होलिका को एक वरदान मिला था कि वह आग से नहीं जलेगी। होलिका ने प्रहलाद को गोद में बैठाकर आग में कूद गई, लेकिन वह बच गया और होलिका राख हो गई। तभी से होलिका दहन का पर्व मनाने की परंपरा है।
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होली के लिए शहरवासियों ने विशेष तैयारी की है। युवाओं ने तो रंग और गुलाल उड़ाना भी शुरू कर दिया है। स्कूलों और कॉलेजों में युवा होली मनाते दिखाई दे रहे हैं। बुधवार को जम्मू विश्वविद्यालय में बाइक सवार युवाओं की टोलियों खूब होली खेली है। त्योहार पर जम्मू यूनिवर्सिटी में विशेष कार्यक्रम होगा, जिसमें विद्यार्थी और प्रबंधन के लोग शामिल होंगे। इसके बाद होलिका दहन भी किया जाएगा। भैरव चौक स्थित भैरव मंदिर में होली का पर्व मनाया जाएगा, जिसके लिए चौक सहित मंदिर को रंगबिरंगे फूलों और लाइट से सजाया जा रहा है। मंदिर के महंत रुमिल शर्मा ने बताया कि होली के दिन मथुरा और वृंदावन से मंगवाए रंग और गुलाल के स्टाल लगाए जाएंगे।
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आज शाम 6:34 से होलिका दहन का शुभ मुहूर्त
होली का पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। मंहत रोहित शास्त्री के अनुसार इस वर्ष होली 18 मार्च को मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि का आरंभ 17 मार्च गुरुवार दोपहर डेढ़ पर होगा, जो 18 मार्च दोपहर 12: 48 बजे तक रहेगी। ऐसे में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 17 मार्च को शाम 6:34 बजे से लेकर रात्रि 8:57 तक है।
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इसलिए किया जाता है होलिका दहन
महंत रोहित शास्त्री के अनुसार हिरण्यकश्यप नामक एक राक्षस था, प्रहलाद नामक पुत्र था। वह भगवान विष्णु का बड़ा भक्त था, लेकिन हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु का घोर विरोधी था। वह नहीं चाहता था कोई उसके राज्य में भगवान विष्णु की पूजा करे। वह अपने पुत्र को मारने का कई बार प्रयास कर चुका था। तब हिरण्यकश्यप ने भक्त प्रहलाद को मारने के लिए लिए अपनी बहन होलिका को भेजा, होलिका को एक वरदान मिला था कि वह आग से नहीं जलेगी। होलिका ने प्रहलाद को गोद में बैठाकर आग में कूद गई, लेकिन वह बच गया और होलिका राख हो गई। तभी से होलिका दहन का पर्व मनाने की परंपरा है।