उधमपुर से श्रीनगर तक हाईवे की हालत खस्ता, हाईकोर्ट का मुख्य सचिव को निर्देश- तत्काल बैठक करें
उधमपुर से श्रीनगर तक हाईवे की खस्ता हालत का कड़ा संज्ञान लेते हुए जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि वह वन, राजस्व और पीडीडी के आयुक्त, सचिवों के साथ तत्काल बैठक करें। जस्टिस अली मोहम्मद मागरे और जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर ने रोड की बदहाली को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई के दौरान यह हिदायत दी। याचिका में उधमपुर से चिनैनी और चिनैनी से बनिहाल के बीच सड़क की खस्ता हालत को प्रमुखता से उठाया गया है।
दरअसल, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने कोर्ट में बताया है कि उधमपुर-श्रीनगर रोड प्रोजेक्ट पूरा करने में राजस्व, पीडीडी और वन विभाग की ओर से दिक्कतें आ रही हैं। इन विभागों से वक्त पर एनओसी नहीं मिल रही है। कोर्ट ने इन विभागों को जल्द ही सभी मामले सुलझाने के लिए कहा है।
राजस्व विभाग के आयुक्त सचिव नोडल अफसर नियुक्त किए गए हैं, जो कोर्ट के इस आदेश की कंप्लायस रिपोर्ट अगली तारीख पर पेश करेंगे। प्रोजेक्ट से लेकर कितने मामले अदालतों में चल रहे हैं, हाइवे अथारिटी के चेयरमैन से इनकी जानकारी मांगी गई है।
हाईकोर्ट ने हाईवे अथॉरिटी से इस मामले की स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी
11 दिसंबर, 2019 को हाईकोर्ट ने हाईवे अथॉरिटी से इस मामले की स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी। सोमवार को प्रोजेक्ट डायरेक्टर पुरुषोत्तम कुमार कोर्ट में पेश होकर बताया कि उधमपुर-रामबन सेक्शन में जो काम होना है, उसके लिए सात गांवों की जमीन लेनी है। जमीन न मिलने से काम शुरू नहीं किया जा रहा। चंद्रकोट के पास भी जमीन नहीं मिली है। पेड़ों की कटाई में भी कुछ विजिलेंस के केस हैं। इसी तरह रामबन में बनने वाले पुल के बीच एक मस्जिद है, जो अभी नहीं हटाई गई है। इन समस्याओं के दूर होने पर दो वर्ष में प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा। रामबन से बनिहाल के बीच भी ऐसे ही मामले हैं।