कंडक्टर भर्ती पर आया हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
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एचआरटीसी की ओर से की जा रही कंडक्टर भर्ती को चुनौती देने वाली याचिका में प्रदेश हाई कोर्ट ने प्रेस कांफ्रेंस पर रोक लगा दी है। अदालत ने पाया कि प्रेस कांफ्रेंस से इस मामले पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभाव पड़ रहा है।
मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया कि जब तक इस मामले का निपटारा नहीं किया जाता तब तक इस तरह की कोई भी गतिविधि नहीं की जाएगी।
प्रार्थी शशिभूषण द्वारा दायर याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार कंडक्टर 680 पदों को भरने के लिए लगभग 35 हजार उम्मीदवारों के परीक्षा दी।
आरोप, लीक हो गया था परीक्षा का प्रश्न पत्र
याचिका में आरोप लगाया गया है कि भाई भतीजावाद के चलते इस परीक्षा का प्रश्न पत्र पहले ही लीक हो गया था। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि परिवहन मंत्री के विधानसभा क्षेत्र से लगभग 100 ऐसे उम्मीदवार हैं जिन्होंने पूरे 80 नंबर प्राप्त किए।
आरोप यह भी लगाया गया है कि यदि मेरिट के आधार पर सूची बनाई जाए तो लगभग 200 उम्मीदवार केवल परिवहन मंत्री के चुनावी क्षेत्र से ही चयनित किए जाएंगे। प्रार्थी ने अदालत से गुहार लगाईं है कि कंडक्टर भर्ती को रद्द किया जाए और इस प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवाने के आदेश पारित किये जाए।
चार सप्ताह में मांगा जवाब
प्रार्थी ने यह भी गुहार लगाईं है कि इस मामले की जाँच किसी स्वतंत्र एजेंसी जोकि हिमाचल के बाहर की हो से करवाई जाए। मामले की आगामी सुनवाई 16 मई को निर्धारित की गई है। कांगड़ा जिला में कूल्हों पर पीढ़ी दर पीढ़ी कार्य कर रहे कर्मियों द्वारा दायर याचिका पर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है।
प्रार्थी सभा ने अदालत से गुहार लगाईं है कि उन्हें न्यूनतम दिहाड़ी देने के राज्य सरकार को आदेश दिए जाएं। याचिका में दलील दी गई है कि जब राज्य सरकार राजस्व चौकीदारों, वाटर केरियर, जल रक्षकों और आंगनबाडी जैसे कर्मियों के लिए सेवा लाभ देने के लिए नीति बना सकती है तो प्रार्थी को सेवा लाभ के लिए नजरंदाज नहीं किया जा सकता।