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Jammu News: घंटों मोबाइल फोन का उपयोग घातक
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- लंबे समय तक नियमित उपयोग से युवाओं की श्रवण क्षमता पर पड़ रहा असर
विश्व सुनवाई दिवस आज
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। घंटों तक मोबाइल फोन से चिपके रहना आपके लिए घातक हो सकता है। इसके नियमित उपयोग से श्रवण क्षमता पर असर पड़ने के साथ अन्य समस्याएं हो सकती हैं। वैसे कान में सुनने की कमी के लिए कई कारण होते हैं। लेकिन युवाओं में कानों पर मोबाइल के साथ इलेक्ट्रानिक उपकरणों के उपयोग का बढ़ता चलन उनके लिए कई परेशानियां ला रहा है। इसका खुलासा श्री महाराजा गुलाब सिंह अस्पताल के ईएनटी व हेड नेक सर्जरी विभाग द्वारा करवाए गए एक अध्ययन में हुआ है। इसमें पांच वर्षों तक नियमित तौर पर अधिक मोबाइल फोन का उपयोग कर रहे कई लोगों में सुनने की क्षमता कम हुई है।
इस अध्ययन में 100 लोगों को लिया गया था। जिसमें 15 से 55 वर्ष के लोग शामिल थे। इसमें आधे पचास सदस्यों को पांच साल से कम और पचास को पांच साल से अधिक मोबाइल या दूसरे इलेक्ट्रानिक उपकरणों का कानों पर उपयोग की श्रेणी में लिया गया। इसमें पाया गया कि जिन लोगों ने पांच साल तक मोबाइल फोन और अन्य दूसरे इलेक्ट्रानिक उपकरणों का प्रयोग किया उनकी सुनने की शक्ति में हाई फ्रीक्वेंसी कम हुई। इसके साथ उन्हें काम में जलन, भारीपन, रिंगिंग सेंसेशन आदि की समस्या हुई है। ईएनटी विभाग के एचओडी डाॅ. प्रमोद कलसोत्रा के अनुसार मोबाइल फोन से लंबे समय तक और लगातार ईएमएफ के संपर्क में रहने से सामान्य बातचीत सुनने में कठिनाई होती है। बच्चों के साथ युवाओं में यह चलन तेजी से बढ़ा है। अमूमन उम्र बढ़ने पर कानों में सुनने की क्षमता कम होती हैए लेकिन मोबाइल का अधिक इस्तेमाल करने से यह पहले ही शुरू हो जाती है। सुनने में दिक्कत आने पर इलाज न कराने से हमारे जीवन की गुणवत्ता पर असर पड़ता है। गांधीनगर अस्पताल के अधीक्षक डाॅ. प्रवीण योगराज के अनुसार मोबाइल फोन से रेडिएशन निकलता है। इसलिए इसे जरूरत पर ही इस्तेमाल करें। रात को सोते समय फोन को थोड़ा दूर रखें। एक व्यक्ति को एक दिन में लगभग 1 से 2 घंटे मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि अधिक फोन करे इस्तेमाल से हमारी आंखों के साथ तनाव बढ़ता है।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। घंटों तक मोबाइल फोन से चिपके रहना आपके लिए घातक हो सकता है। इसके नियमित उपयोग से श्रवण क्षमता पर असर पड़ने के साथ अन्य समस्याएं हो सकती हैं। वैसे कान में सुनने की कमी के लिए कई कारण होते हैं। लेकिन युवाओं में कानों पर मोबाइल के साथ इलेक्ट्रानिक उपकरणों के उपयोग का बढ़ता चलन उनके लिए कई परेशानियां ला रहा है। इसका खुलासा श्री महाराजा गुलाब सिंह अस्पताल के ईएनटी व हेड नेक सर्जरी विभाग द्वारा करवाए गए एक अध्ययन में हुआ है। इसमें पांच वर्षों तक नियमित तौर पर अधिक मोबाइल फोन का उपयोग कर रहे कई लोगों में सुनने की क्षमता कम हुई है।
इस अध्ययन में 100 लोगों को लिया गया था। जिसमें 15 से 55 वर्ष के लोग शामिल थे। इसमें आधे पचास सदस्यों को पांच साल से कम और पचास को पांच साल से अधिक मोबाइल या दूसरे इलेक्ट्रानिक उपकरणों का कानों पर उपयोग की श्रेणी में लिया गया। इसमें पाया गया कि जिन लोगों ने पांच साल तक मोबाइल फोन और अन्य दूसरे इलेक्ट्रानिक उपकरणों का प्रयोग किया उनकी सुनने की शक्ति में हाई फ्रीक्वेंसी कम हुई। इसके साथ उन्हें काम में जलन, भारीपन, रिंगिंग सेंसेशन आदि की समस्या हुई है। ईएनटी विभाग के एचओडी डाॅ. प्रमोद कलसोत्रा के अनुसार मोबाइल फोन से लंबे समय तक और लगातार ईएमएफ के संपर्क में रहने से सामान्य बातचीत सुनने में कठिनाई होती है। बच्चों के साथ युवाओं में यह चलन तेजी से बढ़ा है। अमूमन उम्र बढ़ने पर कानों में सुनने की क्षमता कम होती हैए लेकिन मोबाइल का अधिक इस्तेमाल करने से यह पहले ही शुरू हो जाती है। सुनने में दिक्कत आने पर इलाज न कराने से हमारे जीवन की गुणवत्ता पर असर पड़ता है। गांधीनगर अस्पताल के अधीक्षक डाॅ. प्रवीण योगराज के अनुसार मोबाइल फोन से रेडिएशन निकलता है। इसलिए इसे जरूरत पर ही इस्तेमाल करें। रात को सोते समय फोन को थोड़ा दूर रखें। एक व्यक्ति को एक दिन में लगभग 1 से 2 घंटे मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि अधिक फोन करे इस्तेमाल से हमारी आंखों के साथ तनाव बढ़ता है।
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